मुख्य बिंदु: मारवाड़ (जोधपुर रियासत) क्षेत्रफल की दृष्टि से राजपूताना की सबसे बड़ी रियासत थी, जहाँ लगभग 83% भूमि जागीरदारी क्षेत्र के अधीन थी। यह आंदोलन सामंती अत्याचारों, अत्यधिक लाग-बाग, बिगौड़ी (नकद लगान) और उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए प्रजामंडल तथा लोक परिषद के मार्गदर्शन में लड़ा गया। 1. पृष्ठभूमि व आंदोलन के प्रमुख कारण जागीरदारी […]
मारवाड़ (जोधपुर रियासत) क्षेत्रफल की दृष्टि से राजपूताना की सबसे बड़ी रियासत थी, जहाँ लगभग 83% भूमि जागीरदारी क्षेत्र के अधीन थी। यह आंदोलन सामंती अत्याचारों, अत्यधिक लाग-बाग, बिगौड़ी (नकद लगान) और उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए प्रजामंडल तथा लोक परिषद के मार्गदर्शन में लड़ा गया।
1. पृष्ठभूमि व आंदोलन के प्रमुख कारण
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जागीरदारी शोषण: मारवाड़ में खालसा भूमि केवल 17% थी, शेष 83% भूमि जागीरदारों के अधीन थी जहाँ किसानों से 100 से अधिक प्रकार की लाग-बाग (अवैध कर) और बेगार वसूली जाती थी।
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सूखा व अकाल में भी सख्ती: मरुस्थलीय विषम परिस्थितियों के बावजूद लता-कुंता पद्धति से मनमाना लगान वसूला जाता था।
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मादा पशुओं का निष्कासन (1920-21 ई.): रियासत द्वारा मादा पशुओं (गाय, बकरी, ऊँटनी आदि) के राज्य से बाहर निर्यात की अनुमति देने से किसानों व पशुपालकों में भारी असंतोष फैला (प्रारंभिक विरोध चांदमल सुराणा द्वारा)।
2. आंदोलन के विकास के चरण
प्रथम चरण (1923 – 1929 ई.) : प्रारंभिक जागरण
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मारवाड़ सेवा संघ (1920) व मारवाड़ हितकारिणी सभा (1923 पुनर्गठन):
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चांदमल सुराणा और जयनारायण व्यास ने मारवाड़ हितकारिणी सभा के माध्यम से किसानों की समस्याओं और जागीरी जुल्मों को उजागर किया।
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मादा पशुओं के निर्यात पर रोक लगवाने में पहली सफलता मिली।
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तोल आंदोलन (1920-21): मारवाड़ में 100 तोले के सेर को घटाकर 80 तोला करने का विरोध कर जनचेतना जगाई गई।
द्वितीय चरण (1929 – 1938 ई.) : संगठनात्मक मजबूती
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मारवाड़ राज्य लोक परिषद (1929 ई.):
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अध्यक्ष: जयनारायण व्यास।
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1931 में पुष्कर में मारवाड़ राज्य लोक परिषद का पहला सम्मेलन चांदकरण शारदा की अध्यक्षता में हुआ (कस्तूरबा गांधी और काका कालेलकर भी उपस्थित रहे), जहाँ जागीरदारी प्रथा की समाप्ति का प्रस्ताव पारित हुआ।
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मारवाड़ प्रजामंडल (1934 ई.): भंवरलाल सर्राफ की अध्यक्षता में गठित, जिसने किसानों के राजनीतिक अधिकारों का समर्थन किया।
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मारवाड़ किसान सभा (1941 ई.):
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स्थापना: 22 जून 1941।
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प्रथम अध्यक्ष: मंगलसिंह कच्छावा।
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उद्देश्य: किसानों के अधिकारों की कानूनी रक्षा, बेगार प्रथा का खात्मा और नया भूमि-बंदोबस्त लागू करवाना।
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3. प्रमुख हिंसक घटनाएं व सामंती दमन
(क) चंडावल की घटना (28 मार्च 1942 ई.)
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स्थान: चंडावल (सोजत परगना, पाली)।
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घटनाक्रम: मारवाड़ लोक परिषद के कार्यकर्ता चंडावल में ‘उत्तरदायी शासन दिवस’ मनाने के लिए एकत्र हो रहे थे।
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हमला: चंडावल के ठाकुर के लठैतों और पुलिस ने शांतिपूर्ण सत्याग्रहियों पर लाठियों और भालों से बर्बर हमला किया।
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घायल नेता: मीठालाल त्रिवेदी, हरिराम, चंपालाल और विजयकिशन गंभीर रूप से घायल हुए।
(ख) डाबड़ा हत्याकांड (13 मार्च 1947 ई.)
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स्थान: डाबड़ा गाँव (डीडवाना परगना, तत्कालीन मारवाड़ रियासत; वर्तमान डीडवाना-कुचामन जिला)।
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आयोजन: मारवाड़ लोक परिषद और मारवाड़ किसान सभा का संयुक्त किसान सम्मेलन डाबड़ा में किसान नेता मोतीराम चौधरी के घर आयोजित हो रहा था।
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सामंती हमला:
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डीडवाना और आसपास के जागीरदारों के हथियारबंद गुंडों ने सम्मेलन स्थल पर धावा बोल दिया।
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सम्मेलन में पहुँचे वरिष्ठ नेताओं—मथुरादास माथुर, द्वारकादास पुरोहित, राधाकृष्ण तात, किशनलाल शाह और सीआर चौधरी पर जानलेवा हमला कर लहूलुहान कर दिया गया।
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मोतीराम चौधरी के घर को लूटा गया और उनकी वयोवृद्ध माता के पैर काट दिए गए।
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अमर शहीद किसान:
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इस नृशंस हमले में मौके पर 5 किसान शहीद हुए:
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चुन्नीराम
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रूगाराम
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धन्नाराम
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जग्गू जाट
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रामूराम (कुम्हार)
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ऐतिहासिक महत्व: यह राजस्थान में स्वतंत्रता से ठीक पूर्व सामंती क्रूरता का अंतिम और सबसे वीभत्स नरसंहार था। इसकी जांच के लिए पं. जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रीय नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
4. आंदोलन से जुड़े प्रमुख प्रचार माध्यम व साहित्य
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‘पोपाबाई की पोल’ तथा ‘मारवाड़ की अवस्था’: जयनारायण व्यास द्वारा रचित पुस्तिकाएं, जिनमें मारवाड़ प्रशासन व जागीरदारों के कुशासन की पोल खोली गई।
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‘आगीबाण’ (Agiban): ब्यावर से जयनारायण व्यास द्वारा संपादित राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक समाचार पत्र (1932)।
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‘अखंड भारत’: मुंबई से जयनारायण व्यास द्वारा प्रकाशित दैनिक पत्र।
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‘पीप’ (Peep): अंग्रेजी पाक्षिक समाचार-पत्र।
5. परिणाम व समाधान
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जनआक्रोश और भारत की स्वतंत्रता के निकट आने पर जोधपुर दरबार ने 1947 में ‘मारवाड़ टेनेंसी एक्ट’ (मारवाड़ काश्तकारी अधिनियम) पारित किया।
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स्वतंत्रता के पश्चात राजस्थान में जागीरदारी उन्मूलन अधिनियम (1952) और राजस्थान काश्तकारी अधिनियम (1955) लागू होने के साथ किसानों को खातेदारी व भू-स्वामित्व अधिकार प्राप्त हुए।
6. परीक्षा उपयोगी सूक्ष्म तथ्य (Quick Revision Table)
| प्रमुख बिंदु | परीक्षा उपयोगी तथ्य |
| अवधि | 1923 से 1947 ई. |
| जागीरी भूमि का प्रतिशत | लगभग 83% |
| मादा पशु निर्यात विरोधी आंदोलन | 1920-21 (चांदमल सुराणा द्वारा) |
| मारवाड़ हितकारिणी सभा (पुनर्गठन) | 1923 ई. (जयनारायण व्यास व चांदमल सुराणा) |
| मारवाड़ किसान सभा की स्थापना | 1941 ई. (प्रथम अध्यक्ष: मंगलसिंह कच्छावा) |
| चंडावल घटना | 28 मार्च 1942 ई. (सोजत, पाली) |
| डाबड़ा हत्याकांड की तिथि | 13 मार्च 1947 ई. (डीडवाना) |
| डाबड़ा सम्मेलन का आयोजन स्थल | किसान नेता मोतीराम चौधरी का घर |
| डाबड़ा के अमर शहीद | चुन्नीराम, रूगाराम, धन्नाराम, जग्गू जाट, रामूराम |
| राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक पत्र | ‘आगीबाण’ (1932), ब्यावर (संपादक: जयनारायण व्यास) |
| प्रमुख पुस्तकें/पुस्तिकाएं | ‘पोपाबाई की पोल’ और ‘मारवाड़ की अवस्था’ (जयनारायण व्यास) |