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मध्य अरावली की प्रमुख चोटियां: तारागढ़, मोरमजी/टॉडगढ़ एवं नाग पहाड़

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सत्यापित: 02 October 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC RAS, स्कूल व्याख्याता/1st Grade, वरिष्ठ अध्यापक/2nd Grade, RSMSSB आदि) के लिए राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी (डॉ. हरिमोहन सक्सेना) एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित ‘मध्य अरावली की प्रमुख चोटियां: तारागढ़, मोरमजी/टॉडगढ़ एवं नाग पहाड़’ का प्रामाणिक व व्यवस्थित संकलन: 1. परिचय / मुख्य तथ्य (Introduction & […]

राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC RAS, स्कूल व्याख्याता/1st Grade, वरिष्ठ अध्यापक/2nd Grade, RSMSSB आदि) के लिए राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी (डॉ. हरिमोहन सक्सेना) एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित ‘मध्य अरावली की प्रमुख चोटियां: तारागढ़, मोरमजी/टॉडगढ़ एवं नाग पहाड़’ का प्रामाणिक व व्यवस्थित संकलन:

1. परिचय / मुख्य तथ्य (Introduction & Core Facts)

मध्य अरावली मुख्य रूप से अजमेर एवं ब्यावर जिलों में विस्तृत है। यह अरावली पर्वतमाला का सबसे संकीर्ण (Narrowest) एवं अत्यधिक विच्छेदित (Dissected) भाग है।

मध्य अरावली की प्रमुख पर्वत चोटियों का विवरण:

क्र.सं. चोटी का नाम प्रामाणिक ऊँचाई संबंधित जिला मुख्य पहचान / विशेषता
1. मोरम जी / टॉडगढ़ (गौरम जी) 933 / 934 मी. ब्यावर (पूर्व में अजमेर) मध्य अरावली का सर्वोच्च शिखर
2. तारागढ़ 873 मी. अजमेर गढ़ बीठली / अजयमेरु दुर्ग स्थित
3. नाग पहाड़ 795 मी. अजमेर – पुष्कर के मध्य सर्पिलाकार आकृति; लूणी नदी का उद्गम स्थल

2. प्रमुख रचनाएँ और रचनाकार (Major Works & Authors related to the Region)

मध्य अरावली की इन सामरिक पहाड़ियों और दुर्गों का साहित्यिक व ऐतिहासिक ग्रंथों में व्यापक उल्लेख मिलता है:

  • चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो): तारागढ़ (अजयमेरु) दुर्ग की सामरिक स्थिति, चौहान शासकों के शौर्य और अरावली की पहाड़ियों से घिरे होने का विशद काव्य वर्णन।
  • कर्नल जेम्स टॉड (Annals and Antiquities of Rajasthan):
    • तारागढ़ दुर्ग को पूर्व का ‘जिब्राल्टर’ (Gibraltar of the East) कहा (बिशप हेबर ने भी इसे ‘राजस्थान का जिब्राल्टर’ कहा)।
    • टॉडगढ़ (बोरासवाड़ा) क्षेत्र के सामरिक महत्व और मेरवाड़ा पहाड़ियों का भौगोलिक दस्तावेजीकरण।
  • जयानक (पृथ्वीराज विजय): अजयराज चौहान द्वारा तारागढ़ पहाड़ी (बीठली) पर अजयमेरु नगर और दुर्ग की स्थापना का प्रामाणिक संस्कृत काव्य विवरण।
  • मुहणौत नैणसी (मारवाड़ रा परगनां री विगत एवं नैणसी री ख्यात): मेरवाड़ा की पहाड़ियों, घाटियों (दर्रों) और मारवाड़-मेवाड़-अजमेर के सीमांत मार्गों का ऐतिहासिक ब्योरा।

3. विशिष्ट विशेषताएँ या प्रवृत्तियाँ (Key Characteristics / Trends)

(A) मोरम जी / टॉडगढ़ (गौरम जी – 933 मी.):

  • सर्वोच्चता: यह मध्य अरावली का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है।
  • टॉडगढ़ दुर्ग: कर्नल जेम्स टॉड द्वारा निर्मित दुर्ग; स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विजय सिंह पथिक और राव गोपाल सिंह खरवा को इसी दुर्ग में नजरबंद रखा गया था।
  • टॉडगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्य: यह पर्वतीय क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण अभयारण्य का हिस्सा है।

(B) तारागढ़ (873 मी.):

  • गढ़ बीठली: बीठली पहाड़ी पर स्थित होने के कारण इसे ‘गढ़ बीठली’ कहा जाता है।
  • ऐतिहासिक महत्व: यहाँ मीरां साहब (मीर सैयद हुसैन खिंगसवार) की दरगाह, घोड़े की मजार और रूठी रानी (उमादे) की छतरी/महल स्थित हैं।
  • दारा शिकोह का संबंध: मुगल राजकुमार दारा शिकोह का जन्म इसी दुर्गम पर्वतीय परिवेश में हुआ था तथा उत्तराधिकार के युद्ध (दोराई का युद्ध, 1659 ई.) की पृष्ठभूमि भी यही क्षेत्र रहा।

(C) नाग पहाड़ (795 मी.):

  • लूणी नदी का उद्गम: नाग पहाड़ से ही प्रसिद्ध ‘सागरमती’ नदी निकलती है, जो गोविंदगढ़ में ‘सरस्वती’ नाले से मिलकर आगे लूणी नदी कहलाती है।
  • पुष्कर घाटी: यह पहाड़ी अजमेर शहर को पवित्र तीर्थ नगरी पुष्कर से अलग करती है।
  • भू-आकृति: सर्पिलाकार संरचना होने के कारण इसका नाम ‘नाग पहाड़’ पड़ा।

4. परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु और संभावित प्रश्न

  • मध्य अरावली का विभाजन: इसे दो उप-भागों में बाँटा जाता है—(1) शेखावाटी निम्न पहाड़ियाँ तथा (2) मेरवाड़ा पहाड़ियाँ (अजमेर-ब्यावर)।
  • प्रमुख दर्रे (Passes): मध्य अरावली में घाटियों को काटकर बने प्रमुख दर्रे—बर दर्रा (पाली-ब्यावर को जोड़ने वाला NH-25 मार्ग), शिवपुरा घाट, सूरा घाट, देबारी और परवेरिया। 

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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