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कुमारसिंह

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सत्यापित: 27 August 2026
मुख्य बिंदु: सामान्य परिचय शासक: कुमारसिंह (Kumarsimha) राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (रावल शाखा) पिता: रावल क्षेमसिंह भाई: सामंतसिंह (ज्येष्ठ भ्राता) शासनकाल: लगभग 1179 ई. से 1191 ई. राजधानी: नागदा / आहड़ प्रमुख सैन्य अभियान एवं मेवाड़ का पुनरुद्धार कीर्तिपाल चौहान (कीतू) का निष्कासन: सामंतसिंह की पराजय के बाद मेवाड़ पर नाडोल के कीर्तिपाल चौहान का अधिकार […]
सामान्य परिचय
  • शासक: कुमारसिंह (Kumarsimha)
  • राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (रावल शाखा)
  • पिता: रावल क्षेमसिंह
  • भाई: सामंतसिंह (ज्येष्ठ भ्राता)
  • शासनकाल: लगभग 1179 ई. से 1191 ई.
  • राजधानी: नागदा / आहड़
प्रमुख सैन्य अभियान एवं मेवाड़ का पुनरुद्धार
  1. कीर्तिपाल चौहान (कीतू) का निष्कासन:
    • सामंतसिंह की पराजय के बाद मेवाड़ पर नाडोल के कीर्तिपाल चौहान का अधिकार हो गया था।
    • कुमारसिंह ने कूटनीतिक और सैन्य तैयारी के साथ कीर्तिपाल पर आक्रमण किया और उसे मेवाड़ से खदेड़कर मेवाड़ के मुख्य सिंहासन पर गुहिल वंश का पुनः अधिकार स्थापित किया।
    • मेवाड़ से पराजित होकर ही कीर्तिपाल चौहान जालौर गया और वहाँ उसने 1181-82 ई. में जालौर के चौहान वंश (सोनगरा शाखा) की स्थापना की।
  2. गुजरात के चालुक्यों (सोलंकियों) का सहयोग:
    • ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार कुमारसिंह ने अन्हिलवाड़ (गुजरात) के चालुक्य शासक अजयपाल / मूलराज द्वितीय को अपनी ओर मिलाकर सैन्य सहायता प्राप्त की थी, जिससे कीर्तिपाल को पराजित करना संभव हुआ।
प्रशासनिक एवं राजनीतिक महत्व
  • वंश परंपरा की निरंतरता: सामंतसिंह के वागड़ चले जाने के बाद मेवाड़ की मुख्य ‘रावल शाखा’ को कुमारसिंह ने आगे बढ़ाया।
  • राज्य की सीमाओं की सुरक्षा: कीतू के निष्कासन के बाद आंतरिक अशांति को समाप्त कर मेवाड़ के प्रशासन को पुनः सुदृढ़ किया।
प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत व अभिलेख
  • आबू का अचलेश्वर शिलालेख (1285 ई.): इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि कुमारसिंह ने कीर्तिपाल को पराजित कर अपने पैतृक राज्य मेवाड़ को पुनः प्राप्त किया था।
  • कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.): कुमारसिंह द्वारा मेवाड़ की पुनर्स्थापना और गुहिल वंशावली के क्रम को प्रमाणित करती है।
  • रणकपुर प्रशस्ति (1439 ई.): मेवाड़ के उद्धारकर्ता शासकों में कुमारसिंह का नाम दर्ज करती है।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
  • कीर्तिपाल चौहान (कीतू) को मेवाड़ से खदेड़ने वाले शासक: रावल कुमारसिंह।
  • मेवाड़ में गुहिल (रावल) शाखा के पुनर्स्थापक: कुमारसिंह (1179 ई.)।
  • कीतू के जालौर जाने का कारण: कुमारसिंह द्वारा मेवाड़ से पराजित होना।
  • सहायक शक्ति: गुजरात के चालुक्य (सोलंकी) शासक।
  • वंशानुक्रम (मेवाड़ की मुख्य शाखा): क्षेमसिंह $\rightarrow$ सामंतसिंह (वागड़ गमन) / कुमारसिंह (मेवाड़ पुनर्प्राप्ति) $\rightarrow$ मथनसिंह $\rightarrow$ पद्मसिंह $\rightarrow$ रावल जैत्रसिंह।

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