मुख्य बिंदु: भटनेर दुर्ग राजस्थान के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक किलों में से एक है। परीक्षा की दृष्टि से (RAS, RPSC, REET, Rajasthan Police आदि) इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. सामान्य परिचय एवं स्थिति नाम: भटनेर दुर्ग (इसे हनुमानगढ़ का किला भी कहा जाता है)। अवस्थिति: यह दुर्ग राजस्थान […]
भटनेर दुर्ग राजस्थान के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक किलों में से एक है। परीक्षा की दृष्टि से (RAS, RPSC, REET, Rajasthan Police आदि) इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ नीचे विस्तार से दी गई हैं:
1. सामान्य परिचय एवं स्थिति
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नाम: भटनेर दुर्ग (इसे हनुमानगढ़ का किला भी कहा जाता है)।
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अवस्थिति: यह दुर्ग राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्गर नदी (प्राचीन सरस्वती नदी) के किनारे स्थित है।
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श्रेणी: यह एक ‘धान्वन दुर्ग’ (रेगिस्तान या मरुस्थल के बीच बना दुर्ग) की श्रेणी में आता है, हालांकि यह चारों तरफ से रेगिस्तान और कंटीली झाड़ियों से घिरा हुआ है।
2. निर्माण एवं वंशानुक्रम (राजवंश)
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निर्माणकर्ता: इस दुर्ग का निर्माण भाटी राजवंश के शासक भूपति भाटी ने तीसरी शताब्दी (लगभग 295 ईस्वी) में करवाया था।
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नामकरण: इस दुर्ग का नाम भूपति भाटी के पुत्र भाटन या भाटी राजवंश के नाम पर ‘भटनेर’ पड़ा था। बाद में बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने मंगलवार के दिन इस पर अधिकार किया था, जिसके बाद इसका नाम बदलकर ‘हनुमानगढ़’ रख दिया गया।
3. प्रमुख युद्ध एवं ऐतिहासिक घटनाएँ
भटनेर दुर्ग अपने सामरिक महत्व और रणनीतिक स्थिति के कारण उत्तर भारत के आक्रमणकारियों के लिए मुख्य प्रवेश द्वार था। इस पर इतिहास में कई बड़े आक्रमण हुए हैं:
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सर्वाधिक विदेशी आक्रमण:
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भटनेर दुर्ग को “उत्तर भारत का प्रहरी” कहा जाता है। इस दुर्ग पर भारत पर उत्तर-पश्चिम से आने वाले विदेशी आक्रमणकारियों ने सर्वाधिक आक्रमण किए हैं।
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महमूद गंधवी का आक्रमण (1001 ई.):
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महमूद गज़नी ने 1001 ईस्वी में इस दुर्ग पर आक्रमण किया था।
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तिमूरलंग का आक्रमण (1398 ई.):
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भटनेर दुर्ग का सबसे प्रसिद्ध और भयानक आक्रमण 1398 ईस्वी में तुर्क आक्रमणकारी तिमूरलंग का था।
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विशेषता (शाका): तिमूर ने अपनी आत्मकथा (तुजुक-ए-तिमूरी) में इस बात का उल्लेख किया है कि उसने इतना मजबूत और सुरक्षित किला पूरे हिंदुस्तान में नहीं देखा। इस आक्रमण के दौरान यहाँ के शासक राव दूल्हड़ भाटी के नेतृत्व में राजपूत वीरों ने केसरिया किया और महिलाओं ने जोहर किया।
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विशेष जोहर: यहाँ राजपूत महिलाओं के साथ-साथ मुसलमान महिलाओं ने भी जोहर (अग्निसमाधि) किया था, जो राजस्थान के इतिहास की एक अनूठी घटना है।
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राव जैतसी का अधिकार (1527 ई.):
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बीकानेर के शासक राव लूणकरण के पुत्र राव जैतसी ने इस दुर्ग पर अधिकार कर लिया था। बाद में यह बीकानेर रियासत के नियंत्रण में आ गया।
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4. मुख्य विशेषताएँ एवं दर्शनीय स्थल
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प्राचीनता: यह राजस्थान और उत्तर भारत का सबसे प्राचीन दुर्ग माना जाता है।
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सुरक्षा दीवार: इसकी प्राचीरें और बुर्ज बहुत मजबूत हैं, जो मिट्टी और ईंट-पत्थरों से बने हैं।
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शेरखान की कब्र: इस दुर्ग के भीतर भटिंडा के गवर्नर शेरखान (जो ग्यासुद्दीन बलबन का भतीजा था) की कब्र स्थित है।
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भूपाल सिंह की छतरी व मंदिर: दुर्ग के अंदर हनुमान जी और भद्रकाली माता के मंदिर तथा ऐतिहासिक जल स्रोत (कुएं) बने हुए हैं।