मुख्य बिंदु: निष्कलंक संप्रदाय संस्थापक: इस संप्रदाय की स्थापना संत मावजी ने की थी। संत मावजी को निष्कलंक संप्रदाय के अनुयायी भगवान विष्णु का ‘कल्कि अवतार’ मानते हैं। जन्म एवं मुख्य क्षेत्र: संत मावजी का जन्म राजस्थान के डूंगरपुर जिले के साबला गाँव में हुआ था। इस संप्रदाय का मुख्य केंद्र और कार्यक्षेत्र वागड़ (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) क्षेत्र रहा […]
निष्कलंक संप्रदाय
-
संस्थापक:
-
इस संप्रदाय की स्थापना संत मावजी ने की थी। संत मावजी को निष्कलंक संप्रदाय के अनुयायी भगवान विष्णु का ‘कल्कि अवतार’ मानते हैं।
-
-
जन्म एवं मुख्य क्षेत्र:
-
संत मावजी का जन्म राजस्थान के डूंगरपुर जिले के साबला गाँव में हुआ था। इस संप्रदाय का मुख्य केंद्र और कार्यक्षेत्र वागड़ (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) क्षेत्र रहा है।
-
-
बेणेश्वर धाम की स्थापना:
-
संत मावजी ने डूंगरपुर जिले की आसपुर तहसील के नवाटापरा गाँव में सोम, माही और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर प्रसिद्ध बेणेश्वर धाम की स्थापना की थी। यहीं उन्होंने निष्कलंक धाम का निर्माण करवाया और माघ पूर्णिमा का मेला भरवाने की परंपरा शुरू की (जिसे आदिवासियों का कुंभ कहा जाता है)।
-
-
प्रमुख ग्रंथ (चोपड़):
-
संत मावजी द्वारा रचित भविष्यवाणियों और आध्यात्मिक उपदेशों के ग्रंथों को ‘चोपड़’ कहा जाता है। इनके प्रमुख चोपड़ निम्नलिखित हैं:
-
प्रेम सागर चोपड़
-
मेघ सागर चोपड़
-
रतन सागर चोपड़
-
श्याम सागर चोपड़
-
-
ये सभी चोपड़ वागड़ी और मेवाड़ी मिश्रित भाषा में लिखे गए हैं।
-