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चरणदासी संप्रदाय

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सत्यापित: 03 October 2026
मुख्य बिंदु: चरणदासी संप्रदाय उत्तर भारत और विशेष रूप से राजस्थान व दिल्ली क्षेत्र का एक प्रमुख और अनुशासित भक्ति संप्रदाय है। परीक्षा की दृष्टि से (जैसे RPSC, RAS, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए) चरणदासी संप्रदाय और इसके संस्थापक संत चरणदास जी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है: 1. संत […]
चरणदासी संप्रदाय उत्तर भारत और विशेष रूप से राजस्थान व दिल्ली क्षेत्र का एक प्रमुख और अनुशासित भक्ति संप्रदाय है। परीक्षा की दृष्टि से (जैसे RPSC, RAS, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए) चरणदासी संप्रदाय और इसके संस्थापक संत चरणदास जी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं का विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है:

1. संत चरणदास जी – जीवन परिचय

  • जन्म: संवत 1760 (ईस्वी सन 1703) की वैशाख शुक्ल दशमी के दिन हुआ था।
  • जन्म स्थान: डेहरा ग्राम (वर्तमान अलवर जिला, राजस्थान)।
  • माता-पिता: इनके पिता का नाम मुरलीधर और माता का नाम कुंजू था।
  • बचपन का नाम: इनका वास्तविक/बचपन का नाम रंजीत था।
  • भक्ति का स्वरूप: ये निर्गुण और सगुण भक्ति के महान समन्वित संत माने जाते हैं। ये भगवान श्रीकृष्ण (जिन्हें ये ‘सुखदेव जी’ और ‘हरी’ के रूप में भजते थे) की उपासना पर जोर देते थे।
  • भविष्यवाणी: संत चरणदास जी को भविष्य की घटनाओं का विशेष ज्ञान था। इन्होंने नादिर शाह द्वारा दिल्ली पर आक्रमण करने की सटीक भविष्यवाणी की थी, जो अक्षरशः सत्य साबित हुई थी।

2. चरणदासी संप्रदाय की स्थापना एवं मुख्य पीठ

  • स्थापना: समाज में व्याप्त कुरीतियों, धार्मिक पाखंडों, जाति-पाती के भेदभाव और छुआछूत को दूर करने के लिए संत चरणदास जी ने ‘चरणदासी संप्रदाय’ की स्थापना की थी।
  • प्रधान पीठ (मुख्य गद्दी): इस संप्रदाय की मुख्य प्रधान पीठ नई दिल्ली में स्थित है।
  • प्रमुख क्षेत्र: इस संप्रदाय का मुख्य प्रभाव क्षेत्र राजस्थान का अलवर, भरतपुर और एनसीआर (दिल्ली के आस-पास का इलाका) रहा है।

3. संप्रदाय के मुख्य नियम और विशेषताएँ

  • 42 नियम: चरणदासी संप्रदाय के अनुयायियों और साधुओं के लिए कुल 42 कड़े नियम निर्धारित किए गए हैं। इन नियमों में नशा त्याग, चोरी न करना, झूठ न बोलना, सदाचार का पालन करना और सादा जीवन जीना अनिवार्य होता है।
  • सामाजिक सद्भाव: इस संप्रदाय ने हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों की संकीर्णताओं और बुराइयों का खुलकर विरोध किया तथा आपसी प्रेम, भाईचारे और धार्मिक सद्भाव का संदेश दिया।

4. प्रमुख शिष्याएँ एवं साहित्य (रचनाएँ)

संत चरणदास जी के कई शिष्य थे, जिनमें उनकी दो महिला शिष्याएँ और महान कवयित्रियाँ पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध हुईं:
  1. दयाबाई: इन्होंने ‘दया बोध’ और ‘विनय मालिका’ नामक ग्रंथों की रचना की।
  2. सहजोबाई: इन्होंने ‘सहज प्रकाश’ नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की।
  • अन्य रचनाएँ: संत चरणदास जी ने स्वयं हिंदी और ब्रज भाषा में कई आत्मिक पद, साखियाँ और ग्रंथ रचे हैं, जो उनके उच्च कोटि के दार्शनिक और संत होने का प्रमाण देते हैं।


📖 Exam Questions & Answers
5 questions · Curated from multiple competitive exams

Q1. चरणदासी संप्रदाय के संस्थापक कौन थे?

Asked in: RPSC RAS CET
Answer

चरणदासी संप्रदाय की स्थापना संत चरणदास जी ने की थी, जिनका जन्म डेहरा (अलवर) में हुआ था। उनके बचपन का नाम रंजीत था।

📌 Note: निर्गुण और सगुण भक्ति का समन्वय।

Q2. चरणदासी संप्रदाय की प्रधान पीठ कहाँ स्थित है?

Asked in: Rajasthan Police REET RPSC Grade II
Answer

चरणदासी संप्रदाय की मुख्य प्रधान पीठ नई दिल्ली में स्थित है, जबकि इसका मुख्य प्रभाव क्षेत्र अलवर और एनसीआर है।

📌 Note: संप्रदाय की स्थापना समाज सुधार के लिए की गई थी।

Q3. चरणदासी संप्रदाय के अनुयायियों के लिए कितने नियम निर्धारित हैं?

Asked in: RSMSSB LDC Patwari
Answer

इस संप्रदाय के अनुयायियों के लिए कुल 42 नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनमें नशा त्याग, सत्य आचरण और सादा जीवन शामिल है।

📌 Note: नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है।

Q4. संत चरणदास जी की प्रमुख महिला शिष्याएँ कौन थीं?

Asked in: RAS RPSC School Lecturer
Answer

संत चरणदास जी की दो प्रमुख शिष्याएँ और कवयित्रियाँ दयाबाई और सहजोबाई थीं।

📌 Note: दयाबाई ने 'दया बोध' तथा सहजोबाई ने 'सहज प्रकाश' की रचना की।

Q5. किस संत ने नादिर शाह के दिल्ली आक्रमण की सटीक भविष्यवाणी की थी?

Asked in: RPSC 2nd Grade RAS
Answer

संत चरणदास जी ने नादिर शाह के दिल्ली आक्रमण की भविष्यवाणी की थी, जो बिल्कुल सच साबित हुई।

📌 Note: इन्हें भविष्य की घटनाओं का विशेष ज्ञान था।

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