मुख्य बिंदु: यहाँ रामस्नेही संप्रदाय और इसके संस्थापक संत रामचरण जी से संबंधित महत्त्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी नोट्स दिए जा रहे हैं: रामस्नेही संप्रदाय एवं संत रामचरण जी – प्रमुख नोट्स संत रामचरण जी का जन्म: इनका जन्म संवत 1776 (ईस्वी सन 1719) की वैशाख शुक्ल त्रयोदशी को सोडा ग्राम (टोंक जिला) में हुआ था। इनके बचपन का नाम […]
यहाँ रामस्नेही संप्रदाय और इसके संस्थापक संत रामचरण जी से संबंधित महत्त्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी नोट्स दिए जा रहे हैं:
रामस्नेही संप्रदाय एवं संत रामचरण जी – प्रमुख नोट्स
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संत रामचरण जी का जन्म: इनका जन्म संवत 1776 (ईस्वी सन 1719) की वैशाख शुक्ल त्रयोदशी को सोडा ग्राम (टोंक जिला) में हुआ था। इनके बचपन का नाम रामकृष्ण था।
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संप्रदाय की स्थापना: संत रामचरण जी ने समाज में व्याप्त पाखंडों और जाति-पाती के भेदभाव का विरोध करते हुए ‘रामस्नेही संप्रदाय’ की स्थापना की।
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प्रधान पीठ: रामस्नेही संप्रदाय की मुख्य प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
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प्रमुख विशेषताएँ:
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इस संप्रदाय में मूर्तिपूजा का निषेध है और कण-कण में व्याप्त निराकार परब्रह्म (निर्गुण राम) की उपासना की जाती है।
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इसके साधु और अनुयायी वैराग्य व प्रेम के प्रतीक के रूप में गुलाबी या लाल रंग के वस्त्र धारण करते हैं तथा पूर्णतः शाकाहारी, नशा-मुक्त और अहिंसक होते हैं।
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संप्रदाय की अन्य प्रमुख शाखाएँ (पीठें):
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शाहपुरा (भीलवाड़ा): मुख्य पीठ (संत रामचरण जी)
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रेण (मेड़ता, नागौर): संत दरियाव जी
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सिंहथल (बीकानेर): संत हरिदास जी
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खेड़ा (बांसवाड़ा): संत रामदास जी
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प्रमुख ग्रंथ / साहित्य: संत रामचरण जी के उपदेशों और भजनों का विशाल संग्रह ‘अवाणी’ (वाणी) नामक ग्रंथ में संकलित है।