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क्षेमसिंह

श्रेणी: प्रमुख व्यक्तित्व, राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति, राजस्थान का मध्यकालीन इतिहास एवं राजवंश | लक्षित परीक्षाएं: RPSC (RAS, SI), RSMSSB (CET, पटवार, VDO, LDC)
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सामान्य परिचय
  • शासक: क्षेमसिंह (Kshemasimha)
  • राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (मेवाड़)
  • शाखा: रावल शाखा के प्रथम प्रमुख शासक
  • शासनकाल: 12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में (लगभग 1168 ई. से 1172 ई.)
  • राजधानी: नागदा / आहड़
रावल शाखा का विस्तार एवं उत्तराधिकारी
रणसिंह के ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते क्षेमसिंह को मेवाड़ का मुख्य राज्य और राजसिंहासन प्राप्त हुआ। इन्होंने अपने नाम के साथ ‘रावल’ पदवी का विधिवत प्रयोग शुरू किया। क्षेमसिंह के दो प्रमुख पुत्र हुए, जिनका राजस्थान के इतिहास में विशेष महत्व है:
  1. सामंतसिंह (ज्येष्ठ पुत्र):
    • क्षेमसिंह के बाद मेवाड़ की गद्दी पर बैठे।
    • जालौर के कीर्तिपाल चौहान (कीतू) से पराजित होने के बाद इन्होंने दक्षिण राजस्थान में वागड़ (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) में गुहिल वंश की स्वतंत्र शाखा की स्थापना की।
    • तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में पृथ्वीराज चौहान तृतीय की ओर से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।
  2. कुमारसिंह (कनिष्ठ पुत्र):
    • इन्होंने गुजरात के चालुक्य शासक (अजयपाल/मूलराज द्वितीय) की सहायता से जालौर के कीर्तिपाल चौहान को मेवाड़ से खदेड़कर मेवाड़ का मूल राजसिंहासन पुनः प्राप्त किया।
राजनीतिक स्थिति एवं संघर्ष
  • प्रतिद्वंद्विता: क्षेमसिंह के समय गुजरात के चालुक्यों (सोलंकी) और नाडोल/जालौर के चौहानों के साथ मेवाड़ की सीमाओं पर निरंतर संघर्ष की स्थिति बनी रही।
  • साम्राज्य की सुरक्षा: अपने छोटे से शासनकाल में क्षेमसिंह ने नागदा और आहड़ के आसपास के क्षेत्रों पर गुहिल नियंत्रण बनाए रखा।
प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत
  • कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.): क्षेमसिंह, सामंतसिंह और कुमारसिंह के उत्तराधिकार और संघर्ष का प्रामाणिक विवरण देती है।
  • आबू का अचलेश्वर अभिलेख (1285 ई.): इसमें क्षेमसिंह की वंशावली और उनकी संतानों का उल्लेख है।
  • एकलिंग महात्म्य: रावल शाखा के आरंभ और क्षेमसिंह के शासन का उल्लेख करता है।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
  • मेवाड़ के मुख्य सिंहासन पर रावल शाखा के पहले शासक: क्षेमसिंह।
  • वागड़ (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) में गुहिल वंश की नींव रखने वाले सामंतसिंह के पिता: क्षेमसिंह।
  • कीर्तिपाल चौहान को हराकर मेवाड़ पुनः जीतने वाले कुमारसिंह के पिता: क्षेमसिंह।
  • वंशानुक्रम: रणसिंह $\rightarrow$ क्षेमसिंह $\rightarrow$ सामंतसिंह / कुमारसिंह $\rightarrow$ मथनसिंह $\rightarrow$ पद्मसिंह $\rightarrow$ जैत्रसिंह

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