मुख्य बिंदु: राजस्थान की ऐतिहासिक एवं मौर्यकालीन सभ्यताएँ (Historical & Mauryan Age Civilizations) प्रामाणिक स्रोतों (आरबीएसई, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी और आरपीएससी पाठ्यक्रम) के अनुसार, प्रागैतिहासिक और ताम्र-लौह युगों के बाद भारत में महाजनपद काल, मौर्य काल, शुंग, कुषाण और गुप्त काल का आगमन हुआ, जिसे ऐतिहासिक काल (Historical Period) कहा जाता है। राजस्थान में इस काल […]
राजस्थान की ऐतिहासिक एवं मौर्यकालीन सभ्यताएँ (Historical & Mauryan Age Civilizations)
प्रामाणिक स्रोतों (आरबीएसई, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी और आरपीएससी पाठ्यक्रम) के अनुसार, प्रागैतिहासिक और ताम्र-लौह युगों के बाद भारत में महाजनपद काल, मौर्य काल, शुंग, कुषाण और गुप्त काल का आगमन हुआ, जिसे ऐतिहासिक काल (Historical Period) कहा जाता है।
राजस्थान में इस काल के दौरान कई नगर विकसित हुए, जो राजनीतिक, धार्मिक और व्यापारिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बने। राजस्थान की प्रमुख ऐतिहासिक एवं मौर्यकालीन सभ्यताओं की विस्तृत सूची नीचे दी जा रही है:
1. बैराठ / विराट नगर (Bairat) — मौर्य एवं महाभारत कालीन प्रमुख केंद्र
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जिला: कोटपूतली-बहरोड़ (राजस्थान) — (पहले यह जयपुर जिले के अंतर्गत था)।
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नदी: बाणगंगा नदी के तट पर।
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खोज व उत्खनन: दयाराम साहनी (1936), नील रत्न बनर्जी, और कैलाश नाथ दीक्षित।
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मुख्य विशेषताएँ / लिस्ट:
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मत्स्य महाजनपद की राजधानी: महाभारत काल में यह प्राचीन ‘मत्स्य महाजनपद’ की राजधानी थी, जहाँ पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय बिताया था।
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अशोक का भाब्रू (भाबरू) शिलालेख: बीजक की पहाड़ी से मौर्य सम्राट अशोक का प्रसिद्ध ‘भाब्रू शिलालेख’ प्राप्त हुआ है, जिसमें अशोक ने बुद्ध, धम्म और संघ (त्रिरत्न) के प्रति अपनी अगाध आस्था व्यक्त की है। (यह शिलालेख वर्तमान में कोलकाता के संग्रहालय में सुरक्षित है)।
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बौद्ध धर्म का केंद्र: यहाँ से मौर्य कालीन गोल बौद्ध मंदिर (चैत्य गृह) और अशोक के स्तूपों के अवशेष मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि राजस्थान में बौद्ध धर्म का यह सबसे बड़ा केंद्र था।
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यूनानी मुद्राएँ: बैराठ से यूनानी शासक मिनेन्डर (Menander) की मुद्राएँ सहित कुल 28 आहत (पंचमार्क) और इंडो-ग्रीक सिक्के मिले हैं, जो विदेशी व्यापार के प्रमाण हैं।
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2. नगरी सभ्यता / मध्यमिका (Nagari / Madhyamika) — वैष्णव/भागवत धर्म का प्राचीनतम केंद्र
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जिला: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
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नदी: बेड़च नदी के तट पर।
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खोज व उत्खनन: डी.आर. भंडारकर (Devadatta Ramakrishna Bhandarkar) द्वारा वर्ष 1904 में।
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मुख्य विशेषताएँ / लिस्ट:
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शिव जनपद के सिक्के: इस प्राचीन नगर का नाम प्राचीन ग्रंथों और सिक्कों में ‘मध्यमिका’ मिलता है। यहाँ से ‘सिवि जनपद’ (Sibi Janapada) के तांबे के सिक्के मिले हैं जिन पर ‘मज्झिमिकाया सिवि जनपदस’ अंकित है।
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भागवत धर्म का प्राचीनतम साक्ष्य: नगरी के पास से प्रसिद्ध ‘घोषुंडी शिलालेख’ प्राप्त हुआ है, जो संस्कृत भाषा में ब्राह्मी लिपि में है। इस शिलालेख से भारत में वैष्णव या भागवत धर्म (संकर्षण और वासुदेव की पूजा) के प्रचलन का सबसे प्राचीन पुरातात्विक साक्ष्य मिलता है।
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यहाँ से गुप्त काल और मौर्य काल के अवशेष, सुंदर मृदभांड, और प्राचीन दीवारों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
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3. भीनमाल सभ्यता / श्रीमाल (Bhinmal) — ह्वेनसांग का आगमन और कवि माघ की जन्मस्थली
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जिला: सांचौर (राजस्थान) — (प्रशासनिक पुनर्गठन से पहले यह जालौर जिले के अंतर्गत था)।
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खोज व उत्खनन: आर.सी. अग्रवाल और अन्य पुरातत्वविदों द्वारा।
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मुख्य विशेषताएँ / लिस्ट:
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प्राचीन नाम: इसे प्राचीन काल में ‘श्रीमाल’ कहा जाता था, जो बाद में ‘भीनमाल’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
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चीनी यात्री ह्वेनसांग का आगमन: 7वीं शताब्दी में प्रसिद्ध चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) भारत यात्रा के दौरान भीनमाल आया था, उसने अपनी यात्रा वृत्तांत में इसे ‘लो-कि-लो-ची’ (पिलोमालो) नाम से पुकारा है और इसे व्यापार का बड़ा केंद्र बताया है।
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साहित्यकारों की जन्मस्थली: यह महान संस्कृत कवि कवि माघ (जिन्होंने ‘शिशुपाल বধ’ महाकाव्य लिखा) और ब्रह्मगुप्त (प्रसिद्ध गणितज्ञ/खगोलशास्त्री) की जन्मस्थली रही है।
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प्रतिहार वंश के शासनकाल में यह सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से अत्यंत समृद्ध रहा था।
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4. नगर सभ्यता (Nagar) — मालव जनपद की राजधानी
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जिला: टोंक (राजस्थान) — (यह उनियारा के पास स्थित है)।
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मुख्य विशेषताएँ / लिस्ट:
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यहाँ से प्राचीन काल के ‘मालव जनपद’ (Malava Janapada) के सिक्कों का बहुत बड़ा भंडार मिला है। यहाँ से हज़ारों की संख्या में तांबे और चांदी के मालवी सिक्के प्राप्त हुए हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि यह मालव गणराज्य की राजधानी या प्रमुख केंद्र रहा होगा।
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यहाँ से शुंग, कुषाण और गुप्त कालीन टेराकोटा की मूर्तियाँ, सुंदर आभूषण और भवनों के अवशेष मिले हैं।
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आरपीएससी (RPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से ऐतिहासिक काल की इन सभ्यताओं में बैराठ (भाब्रू शिलालेख, मिनेन्डर के सिक्के), नगरी (घोषुंडी शिलालेख, मध्यमिका), और भीनमाल (ह्वेनसांग का आगमन, कवि माघ) से जुड़े प्रश्न सबसे अधिक बार पूछे जाते हैं।