मुख्य बिंदु: श्रीगंगानगर जिले (राजस्थान के उत्तरी सीमांत व नहरी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: रामनगर (रामू जाट की ढाणी)। उपनाम: राजस्थान का अन्नागार / अन्न का कटोरा (Food Basket of Rajasthan), बागानों की भूमि, राजस्थान की किन्नू नगरी, हरित […]
श्रीगंगानगर जिले (राजस्थान के उत्तरी सीमांत व नहरी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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प्राचीन नाम: रामनगर (रामू जाट की ढाणी)।
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उपनाम: राजस्थान का अन्नागार / अन्न का कटोरा (Food Basket of Rajasthan), बागानों की भूमि, राजस्थान की किन्नू नगरी, हरित क्रांति की जन्मस्थली।
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स्थापना व नामकरण:
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1927 ई. में बीकानेर के आधुनिक निर्माता महाराजा गंगासिंह द्वारा ‘रामनगर’ का नाम बदलकर अपने नाम पर ‘श्रीगंगानगर’ रखा गया।
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भौगोलिक स्थिति व अक्षांश:
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राजस्थान का सबसे उत्तरी बिंदु: कोणा गाँव (श्रीगंगानगर तहसील) — $30^\circ 12’$ उत्तरी अक्षांश।
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सूर्य की किरणों का सर्वाधिक तिरछापन: राजस्थान में सूर्य की किरणें सर्वाधिक तिरछी श्रीगंगानगर में पड़ती हैं।
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सर्वाधिक आंधियां: राजस्थान में सर्वाधिक दिनों तक (औसत 27 दिन/वर्ष) धूलभरी आंधियां चलने वाला जिला।
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नदियाँ एवं नहरी तंत्र:
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घग्घर नदी: अनूपगढ़ व सूरतगढ़ क्षेत्र से होते हुए पाकिस्तान (फोर्ट अब्बास – जहाँ यह ‘हकरा’ कहलाती है) तक जाती है।
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गंगनहर (Gang Canal):
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भारत की प्रथम पक्की नहर; सतलुज नदी (हुसैनीवाला, फिरोजपुर) से निकाली गई।
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निर्माण: 1922–1927 ई. में महाराजा गंगासिंह द्वारा (उद्घाटन: 26 अक्टूबर 1927 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा)।
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वास्तुकार/अभियंता: कंवर सेन।
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इंदिरा गांधी नहर (IGNP): अनूपगढ़ व सूरतगढ़ शाखाओं द्वारा संपूर्ण क्षेत्र सिंचित।
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2. राजवंश एवं प्रमुख इतिहास
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बीकानेर रियासत का अभिन्न अंग: मध्यकाल में यह क्षेत्र बीकानेर के राठौड़ राजवंश के अधीन था।
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महाराजा गंगासिंह (‘आधुनिक भारत का भगीरथ’):
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1899-1900 के भीषण ‘छप्पनिया अकाल’ के बाद मरुभूमि को हरा-भरा करने का संकल्प लिया।
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गंगनहर लाकर बंजर रेतीले टीलों को उपजाऊ कृषि भूमि में बदला, जिसके कारण इन्हें ‘आधुनिक भारत का भगीरथ’ कहा जाता है।
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3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल
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अनूपगढ़ व तरखानवाला डेरा: सरस्वती व दृषद्वती नदी घाटियों में स्थित प्राक्-हड़प्पा एवं हड़प्पा कालीन स्थल।
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चक 86 (Chak 86): सिंधु घाटी सभ्यता के विशिष्ट चित्रित धूसर मृद्भाण्ड (PGW) व तांबे के उपकरण प्राप्त।
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सूरतगढ़ (प्राचीन सोढ़ावटी): गुप्तकालीन व कुषाण कालीन ईंटों के अवशेष और टेराकोटा मूर्तियां।
4. प्रमुख दुर्ग, धार्मिक स्थल एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता / स्थल | प्रमुख विशेषता |
| सूरतगढ़ का किला (सोढ़ावटी गढ़) | महाराजा सूरत सिंह (1804 ई.) | ईंटों व मिट्टी से निर्मित सामरिक दुर्ग; उत्तर-पश्चिमी सीमा की सुरक्षा चौकी। |
| अनूपगढ़ दुर्ग | महाराजा अनूप सिंह (1678 ई.) | घग्घर नदी के किनारे स्थित सीमावर्ती किला; वर्तमान में भारत-पाक सीमा के समीप ऐतिहासिक स्मारक। |
| गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ (डाबला, रायसिंहनगर) | संत फतेह सिंह (1954 ई.) | 1740 ई. में जत्थेदार बुड्ढा सिंह, सुक्खा सिंह और मेहताब सिंह ने अमृतसर के हरमंदिर साहिब को अपवित्र करने वाले क्रूर मस्सा रंगड़ का सिर काटकर यहीं लाकर समर्पित किया था। इसे ‘राजस्थान का स्वर्ण मंदिर’ माना जाता है। |
| लैला-मजनू की मजार (अनूपगढ़ सीमा) | बिंजौर गाँव | अमर प्रेम के प्रतीक लैला-मजनू की मजार; प्रतिवर्ष जून माह में प्रेमियों का विशाल मेला भरता है। |
| डाडा पमाराम का डेरा (विजयनगर) | संत डाडा पमाराम जी | फाल्गुन माह में विशाल मेला; सर्वधर्म सद्भाव का केंद्र। |
| हिंदूमलकोट सीमा चौकी (Hindumalkot Border): | बीकानेर दीवान हिंदूमल के नाम पर | भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय रेडक्लिफ रेखा पर स्थित प्रसिद्ध सीमा चौकी व ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन। |
5. कृषि, उद्योग एवं ऊर्जा
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किन्नू व माल्टा उत्पादन: उच्च कोटि के रसीले ‘किन्नू’ (Kinnow) के उत्पादन हेतु पूरे देश में प्रसिद्ध (एशिया का सबसे बड़ा किन्नू उत्पादक क्षेत्र)।
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सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन (ठुकराना, सूरतगढ़):
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राजस्थान का प्रथम सुपर थर्मल पावर प्लांट और सर्वाधिक विद्युत उत्पादन क्षमता वाले केंद्रों में से एक।
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इसे ‘राजस्थान का आधुनिक विकास तीर्थ’ कहा जाता है।
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सूरतगढ़ केंद्रीय कृषि फार्म (Central State Farm, 1956):
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पूर्व सोवियत संघ (रूस) के आर्थिक व तकनीकी सहयोग से स्थापित एशिया का सबसे बड़ा यांत्रिक कृषि फार्म (लगभग 12,407 हेक्टेयर क्षेत्र)।
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जैतसर केंद्रीय कृषि फार्म (1964): कनाडा के सहयोग से स्थापित दूसरा विशाल यांत्रिक फार्म।
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द गंगानगर शुगर मिल्स (कमीणपुरा):
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चुकंदर से चीनी बनाने का भारत व राजस्थान का प्रथम संयंत्र (1968 ई.)।
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6. कला, संस्कृति, हस्तशिल्प एवं लोक जीवन
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पंजाबी व बागड़ी संस्कृति का समन्वय:
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भाषा, खान-पान, गिद्धा व भांगड़ा नृत्य तथा वेशभूषा में राजस्थानी और पंजाबी संस्कृति का अनूठा मेल।
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सिख धर्म का प्रभाव: राज्य में सर्वाधिक सिख आबादी व गुरुद्वारों वाला जिला।
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हस्तशिल्प: लकड़ी की कलात्मक खेती के औजार, कशीदाकारी जूतियाँ व कपास आधारित हथकरघा वस्त्र।
7. स्वतंत्रता संग्राम, किसान आंदोलन एवं अमर शहीद
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रायसिंहनगर कांड (30 जून – 1 जुलाई 1946):
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बीकानेर प्रजामंडल व प्रजा परिषद के सम्मेलन में तिरंगा झंडा लेकर आगे बढ़ रहे जुलूस पर रियासती पुलिस ने गोलियां चलाईं।
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हाथों में तिरंगा थामे वीर बीरबल सिंह ढालिया शहीद हो गए।
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17 जुलाई 1946 को पूरे बीकानेर राज्य में ‘बीरबल दिवस’ मनाया गया। (इंदिरा गांधी नहर की एक शाखा का नाम ‘बीरबल शाखा’ रखा गया है)।
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गंगनहर किसान आंदोलन (1930-1940 ई.):
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‘आबियाना’ (नहर जल कर) और भूमि की ऊंची कीमतों के विरोध में किसानों का संगठित आंदोलन (नेतृत्व: मघाराम वैद्य, चौधरी हरिश्चंद्र)।
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राजस्थान एकीकरण (30 मार्च 1949):
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चतुर्थ चरण (वृहत् राजस्थान) में बीकानेर रियासत के साथ श्रीगंगानगर का राजस्थान में पूर्ण विलय हुआ।
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