मुख्य बिंदु: भरतपुर जिले (ब्रज व मेवात अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: राजस्थान का पूर्वी सिंहद्वार, लोहागढ़, ब्रजभूमि का प्रवेश द्वार, पक्षियों का स्वर्ग (केवलादेव)। स्थापना: 1733 ई. में सिनसिनवार जाट सरदार महाराजा सूरजमल द्वारा। भौगोलिक स्थिति व नदियाँ: प्रमुख नदियाँ: […]
भरतपुर जिले (ब्रज व मेवात अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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उपनाम: राजस्थान का पूर्वी सिंहद्वार, लोहागढ़, ब्रजभूमि का प्रवेश द्वार, पक्षियों का स्वर्ग (केवलादेव)।
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स्थापना: 1733 ई. में सिनसिनवार जाट सरदार महाराजा सूरजमल द्वारा।
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भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
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प्रमुख नदियाँ: बाणगंगा (अर्जुन की गंगा), रूपारेल (वराह नदी – उदयनाथ की पहाड़ियों से), गंभीर।
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जल परियोजनाएं व नहरें:
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सुजान गंगा नहर: लोहागढ़ दुर्ग के चारों ओर बनी गहरी खाई (खंदक) में बाणगंगा व रूपारेल नदियों का पानी लाने हेतु निर्मित।
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मोती झील बांध: रूपारेल नदी के जल को रोककर निर्मित; इसे ‘भरतपुर की लाइफलाइन’ कहा जाता है (यहाँ से नील-हरित शैवाल N2 युक्त खाद प्राप्त होती है)।
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अजान बांध: बाणगंगा व गंभीरी के संगम पर निर्मित, जिससे केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को जलापूर्ति होती है।
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2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
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राजवंश: सिनसिनवार जाट राजवंश (स्वयं को भगवान राम के अनुज ‘लक्ष्मण’ का वंशज मानते हैं)।
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कुलदेवी: राजराजेश्वरी माता।
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कुलदेवता: लक्ष्मण जी (भरतपुर में भारत का एकमात्र प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर स्थित है)।
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प्रमुख शासक व उपलब्धियाँ:
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गोकुल जाट (गोकुला): औरंगजेब की नीतियों के विरुद्ध 1669 ई. में पहला संगठित जाट विद्रोह (तिलपत का युद्ध) किया।
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राजाराम जाट: सिकंदरा में अकबर के मकबरे को लूटकर अकबर की अस्थियों को हिंदू रीति-रिवाज से जलाया।
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बदनसिंह: सवाई जयसिंह द्वारा ‘ब्रजराज’ की उपाधि व डीग की जागीर प्राप्त की; डीग के जलमहलों व किले का प्रारंभिक निर्माण कराया।
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महाराजा सूरजमल (1756–1763 ई.): जाट शक्ति का चरमोत्कर्ष; इन्हें ‘जाटों का प्लेटो’ (अफलातून) कहा जाता है। 1733 में भरतपुर नगर बसाया और अजेय लोहागढ़ दुर्ग बनवाया। पानीपत के तृतीय युद्ध (1761) में मराठों की पराजय के बाद शरणार्थियों को आश्रय दिया।
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महाराजा जवाहर सिंह (1764–1768 ई.): 1765 में मुग़ल लाल किले पर आक्रमण कर वहाँ से ऐतिहासिक अष्टधातु दरवाजा उखाड़कर लाए और लोहागढ़ दुर्ग के उत्तरी द्वार पर लगवाया।
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महाराजा रणजीत सिंह: 1805 ई. में मराठा सेनापति जसवंतराव होल्कर को शरण दी; अंग्रेज जनरल लॉर्ड लेक के 5 बार के हमलों को विफल किया।
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3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल
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नोह (Noh) सभ्यता:
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रूपारेल नदी के तट पर स्थित।
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यहाँ से प्राक-हड़प्पा से लेकर गुप्त काल तक की पाँच संस्कृतियों के अवशेष मिले हैं।
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प्रसिद्ध अवशेष: ‘जाख बाबा’ (यक्ष प्रतिमा), पक्षी चित्रित ईंटें, और चित्रित धूसर मृद्भाण्ड (PGW)।
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बयाना (प्राचीन नाम: श्रीपंथ / वाणपुर):
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गुप्त काल में नील की खेती और गुप्तकालीन सोने के सिक्कों (बयाना निधि – चंद्रगुप्त, समुद्रगुप्त कालीन) का सबसे बड़ा भंडार।
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भीम लाट (विष्णु वर्धन विजय स्तंभ): समुद्रगुप्त के सामंत विष्णुवर्धन द्वारा 371 ई. में निर्मित राजस्थान का पहला विजय स्तंभ।
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ऊषा मंदिर / ऊषा मस्जिद: राजा बाणासुर की पुत्री ऊषा की स्मृति में निर्मित मंदिर, जिसे इल्तुतमिश व मुबारक खिलजी ने मस्जिद में बदल दिया था।
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4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| लोहागढ़ दुर्ग (मिट्टी का किला) | महाराजा सूरजमल (1733 ई.) | पारिख एवं पारिध श्रेणी का अजेय दुर्ग; दोहरी प्राचीर (भीतर पत्थर, बाहर मिट्टी का परकोटा)। तोप के गोले मिट्टी में धंसकर ठंडे हो जाते थे। 1805 में अंग्रेज जनरल लॉर्ड लेक इसे जीतने में असफल रहा। इसमें जवाहर बुर्ज (राजतिलक स्थल) और फतेह बुर्ज स्थित हैं। |
| बयाना दुर्ग (विजय मंदिर गढ़/बादशाह किला) | विजयपाल यादव (1040 ई.) | दमदमा पहाड़ी पर स्थित; राजस्थान का सबसे पुराना किला माना जाता है; इसमें भीम लाट, ऊषा मंदिर, लोधी मीनार व अकबरी छतरी स्थित हैं। |
| डीग के जलमहल व किला | बदनसिंह (प्रारंभ), सूरजमल (पूर्ण) | फव्वारों व महलों की नगरी; सावन-भादों महल, गोपाल भवन (सबसे बड़ा महल), सूरज भवन, नंद भवन। (नोट: डीग अब स्वतंत्र जिला बन चुका है, परंतु ऐतिहासिक रूप से भरतपुर रियासत का अंग रहा है)। |
| गंगा मंदिर (भरतपुर) | महाराजा बलवंत सिंह (1845 ई.) | राजपूत, मुग़ल और दक्षिण भारतीय (द्रविड़) स्थापत्य शैली का अनूठा संगम। |
| लक्ष्मण मंदिर | महाराजा बलदेव सिंह | भरतपुर शहर के मध्य स्थित भारत का एकमात्र प्रमुख लक्ष्मण मंदिर। |
5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध एवं घटनाएँ
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बयाना का युद्ध (16 फरवरी 1527): महाराणा सांगा ने मुग़ल सम्राट बाबर की अग्रिम सेना (सेनापति: मेहंदी ख्वाजा) को बुरी तरह पराजित किया।
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खानवा का युद्ध (17 मार्च 1527):
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रूपवास तहसील (भरतपुर) के गंभीर नदी तट पर।
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बाबर और महाराणा सांगा के बीच निर्णायक युद्ध।
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बाबर ने जिहाद का नारा दिया, ‘तमगा कर’ समाप्त किया और ‘तुलगुमा युद्ध पद्धति’ व तोपखाने का प्रयोग कर विजय प्राप्त की। सांगा ‘पाती पेरवण’ परंपरा के तहत सभी राजपूत राजाओं को एकजुट कर लड़े थे।
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लॉर्ड लेक का भरतपुर घेरा (1805 ई.): ब्रिटिश सेनापति लॉर्ड लेक ने लोहागढ़ पर 5 बार तोपों से आक्रमण किया, किंतु हर बार असफल रहा और घेरा उठाना पड़ा।
6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ
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केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान:
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भगवान शिव (केवलेश्वर महादेव) के मंदिर के कारण यह नाम पड़ा।
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यूनेस्को (UNESCO) विश्व प्राकृतिक धरोहर (1985) और रामसर आर्द्रभूमि स्थल (1981)।
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विश्व विख्यात पक्षी विज्ञानी डॉ. सलीम अली की कर्मस्थली; साइबेरियन क्रेन (सारस) का शीतकालीन प्रवास स्थल।
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संत लालदास जी:
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मेवात क्षेत्र के महान समाज सुधारक सूफी संत; लालदासी संप्रदाय के प्रवर्तक (समाधि: शेरपुर, अलवर; जन्म: धोलीधूब)। निर्गुण भक्ति व हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक।
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चरणदास जी: जन्म डेहरा (अलवर) में हुआ, किंतु ब्रज/मेवात अंचल में इनकी 42 नियमों वाली भक्ति धारा का व्यापक प्रभाव रहा।
7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प
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नौटंकी लोकनाट्य:
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हाथरस (उत्तर प्रदेश) शैली पर आधारित राजस्थान का सबसे लोकप्रिय लोकनाट्य।
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प्रवर्तक: भूरीलाल जी (डीग/भरतपुर); प्रसिद्ध कलाकार: गिरिराज प्रसाद, नथाराम।
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इसमें 9 प्रकार के वाद्ययंत्रों (नगाड़ा, शहनाई, ढोलक, सारंगी आदि) का प्रयोग होता है।
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बमरसिया (बम नृत्य):
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फाल्गुन माह में नई फसल (गेहूं-चना) पकने की खुशी में पुरुषों द्वारा बड़े नगाड़े (बम) की थाप पर ‘रसिया’ गीतों के साथ किया जाने वाला ऊर्जावान नृत्य।
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हुरंगा उत्सव: होली के अवसर पर ब्रज शैली का प्रसिद्ध लट्ठमार व कोड़ामार उत्सव।
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हस्तशिल्प व उद्योग:
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खस का इत्र: भरतपुर व सवाई माधोपुर में पाई जाने वाली सुगंधित ‘खस’ घास से इत्र तैयार किया जाता है।
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सरसों तेल उद्योग: ‘इंजन छाप’ सरसों तेल भरतपुर का प्रसिद्ध ब्रांड है।
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सेवर (Sewar): राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र (DRMR – 20 अक्टूबर 1993 को स्थापित)।
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8. प्रमुख साहित्यकार, विद्वान एवं संस्थान
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कवि सोमनाथ: महाराजा सूरजमल के दरबारी कवि; ग्रंथ: सुजान विलास, माधव विनोद, पंचाध्यायी।
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कवि सूदन: महाराजा सूरजमल के राजकवि; प्रसिद्ध डिंगल/ब्रज ग्रंथ ‘सुजान चरित’ (सूरजमल के युद्धों व शौर्य का जीवंत वर्णन)।
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जगनिक के समकालीन परंपरा: आल्हा-ऊदल व ब्रज गीतों की समृद्ध परंपरा।
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केंद्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय (DRMR), सेवर (भरतपुर)।
9. स्वतंत्रता संग्राम, किसान आंदोलन एवं प्रजामंडल
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भरतपुर प्रजामंडल (1938 ई.):
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स्थापना: 1938 में रेवाड़ी (हरियाणा) में की गई (रियासत से बाहर स्थापित)।
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संस्थापक: किशनलाल जोशी, गोपीलाल यादव (अध्यक्ष), मास्टर आदित्येंद्र, ठाकुर जुगल किशोर चतुर्वेदी।
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ठाकुर जुगल किशोर चतुर्वेदी: इन्हें ‘राजस्थान का जवाहरलाल नेहरू’ कहा जाता है।
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भरतपुर किसान आंदोलन (1931 ई.):
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लगान वृद्धि के विरोध में भोजी लंबरदार के नेतृत्व में किसानों ने संगठित विरोध किया।
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मत्स्य संघ में विलय (18 मार्च 1948):
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राजस्थान एकीकरण के प्रथम चरण में अलवर, भरतपुर, धौलपुर व करौली को मिलाकर ‘मत्स्य संघ’ बना; इसकी राजधानी भरतपुर को बनाया गया (उद्घाटन लोहागढ़ दुर्ग में एन.वी. गाडगिल द्वारा हुआ)।
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