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बूंदी जिला: ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य

बूंदी, राजस्थान जिला दर्शन (District GK) पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 01 September 2026
मुख्य बिंदु: बूंदी जिले (हाड़ौती अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: वृंदावती (बूंदा मीणा के नाम पर ‘बूंदी’ पड़ा)। उपनाम: बावड़ियों का शहर (City of Stepwells), छोटी काशी (द्वितीया काशी), राजस्थान का काशी, महलों और भित्तिचित्रों का शहर। स्थापना: 1241 ई. […]
बूंदी जिले (हाड़ौती अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:

1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य

  • प्राचीन नाम: वृंदावती (बूंदा मीणा के नाम पर ‘बूंदी’ पड़ा)।
  • उपनाम: बावड़ियों का शहर (City of Stepwells), छोटी काशी (द्वितीया काशी), राजस्थान का काशी, महलों और भित्तिचित्रों का शहर।
  • स्थापना: 1241 ई. (1342 संवत) में राव देवा हाड़ा द्वारा बूंदा मीणा को पराजित कर हाड़ा राजवंश की नींव रखी गई।
  • भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
    • प्रमुख नदियाँ: मेज, मांगली (जिस पर भीमलत जलप्रपात स्थित है), घोड़ापछाड़, कुराल, चंबल (जिले की सीमा बनाती है)।
    • जलप्रपात: भीमलत जलप्रपात (मांगली नदी पर 60 मीटर ऊँचा प्राकृतिक जलप्रपात)।
    • झीलें व जलस्रोत: नवलखा (नवल सागर) झील, जैत सागर, कनक सागर (दुगारी – पक्षी अभयारण्य), फूल सागर, सुख सागर।
    • पहाड़ियाँ: आड़ावाला पर्वत (बूंदी को दो भागों में बांटने वाली अर्द्धचंद्राकार पर्वत श्रेणी)।

2. राजवंश एवं प्रमुख शासक

  • राजवंश: हाड़ा चौहान राजवंश (अग्निकुल से उत्पन्न चौहानों की हाड़ा शाखा)।
  • कुलदेवी: आशापुरा माता।
  • प्रमुख शासक व योगदान:
    • राव देवा (1241 ई.): बूंदी में हाड़ा राज्य के संस्थापक।
    • राव बरसिंह (1354 ई.): तारागढ़ दुर्ग का निर्माण कराया।
    • राव सुरजन हाड़ा (1554–1585 ई.): 1569 में अकबर से रणथंभौर की संधि कर मुग़ल अधीनता स्वीकार की; काशी (वाराणसी) में ‘सुरजन घाट’ बनवाया।
    • राव राजा शत्रुशाल (छत्रसाल): शाहजहाँ के काल में उत्तराधिकार युद्ध (सामूगढ़, 1658 ई.) में दारा शिकोह की ओर से लड़ते हुए वीरगति पाई।
    • राव अनिरुद्ध सिंह: इनकी रानी नाथावत जी ने 1699 ई. में ऐतिहासिक रानी जी की बावड़ी बनवाई।
    • राव राजा बुद्धसिंह: विद्वान शासक; नेहतरंग ग्रंथ के रचयिता; कछवाहा विवाद के कारण बूंदी राज्य को लेकर लंबा संघर्ष चला।
    • महाराव रामसिंह (1821–1889 ई.): इनके दरबार में राजस्थान के राज्य कवि सूर्यमल मिश्रण आश्रित थे।
    • महाराव बहादुर सिंह: राजस्थान एकीकरण के समय बूंदी के अंतिम शासक।

3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक शैलचित्र

  • गरदड़ा (Gardada) शैलचित्र:
    • छाजा नदी के किनारे स्थित।
    • भारत की पहली ‘बर्ड राइडर रॉक पेंटिंग’ (Bird Rider Rock Painting – पक्षी पर सवार मानव शैलचित्र) यहाँ से खोजी गई (खोजकर्ता: डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर)।
  • नैनवां एवं हिंडोली: प्रागैतिहासिक पाषाण कालीन उपकरण व औजार प्राप्त।

4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य

स्मारक / स्थल निर्माता प्रमुख विशेषता
तारागढ़ दुर्ग (बूंदी का किला) राव बरसिंह (1354 ई.) तारे (Star) के आकार में निर्मित गिरि दुर्ग; इसे ‘तिलिस्मी किला’ कहा जाता है। रुडयार्ड किपलिंग ने कहा: “यह किला मानव द्वारा नहीं, बल्कि भूतों-प्रेतों द्वारा बनाया गया लगता है।” इसमें ‘गर्भ गुंजन तोप’ रखी है।
चित्रशाला (रंग विलास) महाराव उम्मेद सिंह (18वीं सदी) तारागढ़ दुर्ग परिसर में स्थित; इसे ‘भित्तिचित्रों का स्वर्ग’ (Swarg of Wall Paintings) कहा जाता है। दीवारों पर कृष्ण लीला, रागमाला व नायिका भेद के मनमोहक चित्र हैं।
रानी जी की बावड़ी रानी नाथावत जी (1699 ई.) अनिरुद्ध सिंह की विधवा रानी द्वारा निर्मित; इसे ‘बावड़ियों का सिरमौर’ कहा जाता है (उत्कृष्ट तोरण द्वार व नक्काशीदार स्तंभ)।
84 खंभों की छतरी राव अनिरुद्ध सिंह (1683 ई.) धाभाई देवा की स्मृति में निर्मित 3 मंजिला भव्य छतरी; इसके 84 स्तंभों पर पशु-पक्षियों व कामसूत्र के आसनों की नक्काशी है।
सुख महल राव राजा विष्णु सिंह (1773 ई.) जैत सागर के किनारे स्थित महल; अंग्रेज लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने यहाँ रहकर अपना प्रसिद्ध उपन्यास ‘किम’ (Kim) लिखा था।
केसरबाग की छतरियाँ हाड़ा राजवंश बूंदी के 66 शासकों व रानियों की कलात्मक छतरियाँ।

5. ऐतिहासिक घटनाएँ एवं नक़ली तारागढ़ का बलिदान

  • नक़ली तारागढ़ का बलिदान (14वीं सदी):
    • मेवाड़ के राणा लाखा ने बूंदी के तारागढ़ को जीतने की प्रतिज्ञा ली, किंतु असफल रहने पर प्रतिज्ञा पूरी करने हेतु चित्तौड़ में मिट्टी का ‘नक़ली तारागढ़’ बनवाया गया।
    • इस नक़ली दुर्ग की रक्षा हेतु हाड़ा वीर कुंभा हाड़ा ने अपने प्राणों की बाजी लगा दी और लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।

6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ

  • बीजासन माता मंदिर (इंद्रगढ़):
    • पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ (इंद्रगढ़ माता); नवरात्रों में विशाल लक्खी मेला भरता है।
  • कमलेश्वर महादेव (इंद्रगढ़):
    • प्राचीन पाशुपत कालीन शिवालय; प्राकृतिक जलकुंड स्थित है।
  • हुंडेश्वर महादेव (केशोरायपाटन):
    • चंबल नदी के तट पर स्थित प्राचीन मंदिर।
  • केशवराय जी का मंदिर (केशोरायपाटन):
    • चंबल के तट पर स्थित भगवान विष्णु (केशव) का भव्य मंदिर; कार्तिक पूर्णिमा को चंबल में स्नान व विशाल मेला आयोजित होता है। यहाँ राज्य की पहली सहकारी चीनी मिल (1965) भी स्थापित हुई थी।

7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प

  • बूंदी चित्रकला शैली:
    • स्वर्णकाल: राव सुरजन सिंह व महाराव उम्मेद सिंह का काल।
    • प्रमुख विषय: पशु-पक्षियों का चित्रण (Bird & Animal Paintings) सर्वाधिक होने के कारण इसे ‘पशु-पक्षियों की चित्रशैली’ कहा जाता है।
    • प्रमुख रंग: हरा (Green), पीला व सुनहरा रंग; वर्षा में नाचते मोर, कदम्ब के वृक्ष, सरोवर और प्राकृतिक दृश्य।
    • प्रमुख चित्रकार: सुरजन, अहमद, साधुराम, रामलाल, श्रीकृष्ण।
  • कजली तीज महोत्सव (बूंदी की तीज):
    • राजस्थान में जयपुर की ‘छोटी तीज’ (श्रावण शुक्ल तृतीया) प्रसिद्ध है, जबकि बूंदी की ‘कजली तीज / सातुड़ी तीज’ (भाद्रपद कृष्ण तृतीया) का मेला व सवारी पूरे देश में विख्यात है।
  • धाकड़ समाज की संस्कृति व लोकगीत: हाड़ौती लोक संस्कृति की गहरी छाप।

8. प्रमुख साहित्यकार एवं विद्वान

  • महाकवि सूर्यमल मिश्रण (1815–1868 ई.):
    • जन्म: हरणा गाँव (बूंदी); महाराव रामसिंह के दरबारी कवि; ‘राजस्थान के राज्य कवि’।
    • प्रमुख ग्रंथ:
      • ‘वंश भास्कर’ (बूंदी के हाड़ा शासकों का पिंगल महाकाव्य – इसे उनके दत्तक पुत्र मुरारीदान ने पूर्ण किया)।
      • ‘वीर सतसई’ (1857 की क्रांति के समय राजाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाने हेतु 288 दोहों का वीर रस ग्रंथ; प्रसिद्ध दोहा: “इला न देणी आपणी, हालरिया हुलराय…”)।
      • बलवंत विलास, छंदोमयूख, सती रासो, धातु रूपावली।
  • राव राजा बुद्धसिंह: ग्रंथ: नेहतरंग (श्रृंगार रस का ग्रंथ)।

9. स्वतंत्रता संग्राम, किसान आंदोलन एवं प्रजामंडल

  • बरड़ (बूंदी) किसान आंदोलन (1922–1927 ई.):
    • जागीरदारों की 25 से अधिक लागतों (लाग-बाग), बेगार और अमानवीय अत्याचारों के विरुद्ध बरड़ क्षेत्र के किसानों का आंदोलन।
    • नेतृत्व: पं. नयनूराम शर्मा (राजस्थान सेवा संघ के माध्यम से)।
  • डाबी हत्याकांड (2 अप्रैल 1923):
    • डाबी गाँव में किसानों की सभा पर पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन ने अंधाधुंध गोलियां चलवाईं।
    • झंडा गीत गाते हुए नानक जी भील और देवीलाल गुर्जर शहीद हो गए।
    • नानक भील की स्मृति में माणिक्यलाल वर्मा ने ‘अर्ज़ी’ नामक मार्मिक लोकगीत लिखा।
  • बूंदी प्रजामंडल (1931 ई.):
    • संस्थापक: कांतिलाल चौथानी एवं नित्यानंद (1931 में स्थापित राजस्थान के प्रारंभिक प्रजामंडलों में से एक; 1944 में ऋषिदत्त मेहता द्वारा ‘बूंदी राज्य लोक परिषद’ का गठन)।
  • ऋषिदत्त मेहता: ब्यावर से ‘राजस्थान’ साप्ताहिक समाचार पत्र निकालकर बूंदी के अत्याचारों को उजागर किया।
  • राजस्थान एकीकरण (25 मार्च 1948): द्वितीय चरण (पूर्व राजस्थान संघ) में बूंदी रियासत का राजस्थान में विलय हुआ।

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