प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

बागोर सभ्यता

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सत्यापित: 24 September 2026
मुख्य बिंदु: बागोर (भीलवाड़ा): राजस्थान की प्रसिद्ध मध्य पाषाण कालीन सभ्यता प्रामाणिक स्रोतों (जैसे RBSE, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी और RPSC पाठ्यक्रम) के अनुसार बागोर राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित पुरातात्विक सभ्यताओं में से एक है। यह स्थल मुख्य रूप से मध्य पाषाण काल (Mesolithic Age) और उसके बाद के संक्रमण काल का सबसे प्रमुख केंद्र […]

बागोर (भीलवाड़ा): राजस्थान की प्रसिद्ध मध्य पाषाण कालीन सभ्यता

प्रामाणिक स्रोतों (जैसे RBSE, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी और RPSC पाठ्यक्रम) के अनुसार बागोर राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित पुरातात्विक सभ्यताओं में से एक है। यह स्थल मुख्य रूप से मध्य पाषाण काल (Mesolithic Age) और उसके बाद के संक्रमण काल का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है।
बागोर से जुड़ी छोटी-से-छोटी और हर महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी डिटेल नीचे दी जा रही है:

1. सामान्य परिचय एवं भौगोलिक स्थिति

  • जिला: भीलवाड़ा (राजस्थान)
  • नदी: यह सभ्यता कोठारी नदी के तट पर एक विशाल बालू के टीले (Sand Dune) पर विकसित हुई थी, जिसे स्थानीय रूप से ‘महासतियों का टीला’ भी कहा जाता है।
  • खोज एवं उत्खनन:
    • इसकी खोज 1967-68 में डॉ. वी.एन. मिश्र (V.N. Misra) और पुणे के डक्कन कॉलेज के सहयोग से की गई थी।
    • इसका उत्खनन कार्य वी.एन. मिश्र और जर्मन विद्वान डॉ. एल.एस. लेस्हिनी (Dr. L.S. Leshnik) के निर्देशन में किया गया था।

2. काल निर्धारण (Time Period)

  • पुरातात्विक उत्खनन और कार्बन-14 डेटिंग पद्धतियों के आधार पर बागोर की संस्कृति का काल लगभग 5000 ईसा पूर्व से लेकर द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व तक माना जाता है।
  • यहाँ पाषाण काल से लेकर ताम्रपाषाण औरलौह युग तक के सांस्कृतिक स्तर (Stratigraphy) क्रमिक रूप से देखने को मिलते हैं।

3. बागोर सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ (बिंदुवार संपूर्ण विवरण)

A. भारत में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य (सबसे महत्वपूर्ण तथ्य)

  • बागोर को “भारत में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य” देने वाले सबसे प्रमुख स्थल के रूप में जाना जाता है।
  • यहाँ के निवासियों ने सबसे पहले भेड़, बकरी, गाय, बैल, सूअर और कुत्ते जैसे पशुओं को पालतू बनाना शुरू किया था।

B. माइक्रोलिथ्स (सूक्ष्म पाषाण उपकरण) की प्रचुरता

  • बागोर को “माइक्रोलिथ्स (सूक्ष्म पाषाण उपकरणों) का महाद्वीप” या प्रमुख केंद्र कहा जाता है।
  • यहाँ से हज़ारों की संख्या में बहुत छोटे और तीखे पाषाण उपकरण मिले हैं, जो जैस्टर, क्वार्ट्ज, चर्ट और केल्सेडनी पत्थरों से बनाए गए थे। इन उपकरणों में ब्लेड, त्रिकोण, समलंब (Trapeze) और ल्यूनेट शामिल हैं।

C. आवास व्यवस्था और जीवनशैली

  • यहाँ के लोग शुरुआती दौर में खुली बस्तियों या घास-फूस की झोपड़ियों में रहते थे।
  • बाद के चरणों में उन्होंने पक्के पत्थरों के फर्श और दीवारें बनाना भी सीख लिया था।
  • उनका मुख्य पेशा शिकार करना, कंदमूल इकट्ठा करना और पशुपालन था।

D. शवाधान प्रथा (Burial System)

  • बागोर से मानव कंकाल को दफनाने (समानेकरण) के साक्ष्य मिले हैं।
  • शवों के सिर को उत्तर दिशा की ओर तथा पैरों को दक्षिण दिशा की ओर रखकर दफनाया जाता था।
  • शवों के साथ उनके दैनिक उपयोग की वस्तुएँ (जैसे तांबे के आभूषण, हथियार और बर्तन) भी दफनाई जाती थीं, जो उनके परलोक के विश्वास को दर्शाती हैं।

E. ताम्र युगीन संस्कृति का प्रभाव (Phase II)

  • बागोर के अंतिम चरणों में यहाँ के लोगों ने तांबे का उपयोग करना शुरू कर दिया था। यहाँ से तांबे की सुइयाँ, तीर के फलक और अंगूठियाँ मिली हैं, जो यह साबित करती हैं कि यह स्थल मध्य पाषाण काल से तांबा संस्कृति की ओर विकसित हुआ था।

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