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फत्ताजी का मेला

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सत्यापित: 07 September 2026
मुख्य बिंदु: वीर फत्ताजी का मेला : सांथू गाँव (जालौर) 1. कब और कहाँ तिथि: प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को। समय: अगस्त–सितंबर। स्थान: सांथू गाँव (Santhu Village), ज़िला जालौर, राजस्थान। सांस्कृतिक क्षेत्र: यह मारवाड़/गोडवाड़ अंचल का प्रमुख लोकदेवता मेला है। 2. ऐतिहासिक व लोक पृष्ठभूमि जन्म एवं वंश: लोकदेवता वीर फत्ताजी का […]

वीर फत्ताजी का मेला : सांथू गाँव (जालौर)

1. कब और कहाँ

  • तिथि: प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को।
  • समय: अगस्त–सितंबर।
  • स्थान: सांथू गाँव (Santhu Village), ज़िला जालौर, राजस्थान।
  • सांस्कृतिक क्षेत्र: यह मारवाड़/गोडवाड़ अंचल का प्रमुख लोकदेवता मेला है।

2. ऐतिहासिक व लोक पृष्ठभूमि

  • जन्म एवं वंश:
    • लोकदेवता वीर फत्ताजी का जन्म जालौर ज़िले के सांथू गाँव में एक क्षत्रिय (गज्जराणी राजपूत) परिवार में हुआ था।
  • गांव व गोवंश की रक्षार्थ बलिदान:
    • मध्यकाल में जब मुस्लिम आक्रांताओं/लुटेरों के एक बड़े दल ने सांथू गाँव पर अचानक धावा बोल दिया, तब गाँव की महिलाओं, निर्दोष ग्रामीणों और स्थानीय गोवंश की रक्षा के लिए वीर फत्ताजी शस्त्र उठाकर रणभूमि में कूद पड़े।
    • उन्होंने अकेले ही लुटेरों की विशाल टुकड़ी से भीषण संग्राम किया।
    • युद्धभूमि में अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन करते हुए वे गाँव की सीमा पर लड़ते-लड़ते वीरगति (शहादत) को प्राप्त हुए।
  • लोकदेवता के रूप में प्रतिष्ठा:
    • आत्मोत्सर्ग और मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने के कारण सांथू तथा आस-पास के संपूर्ण ग्रामीण अंचल में इन्हें रक्षक लोकदेवता (झूंझार/भोमियाजी स्वरूप) के रूप में पूजा जाने लगा।

3. प्रमुख परंपराएँ एवं मेले का स्वरूप

  • सांथू का विशाल धाम: सांथू गाँव में वीर फत्ताजी का भव्य मंदिर (थान) बना हुआ है, जहाँ इनकी अश्वारूढ़ अथवा शस्त्रधारी योद्धा के रूप में प्रतिमा स्थापित है।
  • भाद्रपद शुक्ल नवमी का मेला: इस पावन तिथि पर जालौर, सिरोही, बाड़मेर और पाली ज़िलों से हज़ारों श्रद्धालु धोक लगाने पहुँचते हैं।
  • ध्वजा रोहण व रस्में: मेले के दिन मंदिर के शिखर पर पंचरंगी ध्वजा फहराई जाती है। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, संकट-निवारण और मवेशियों की रोग-मुक्ति के लिए मन्नत मांगते हैं।
  • रात्रि जागरण (जम्मा): नवमी की पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर में स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक भजनों व वीरगाथाओं का गायन होता है, जिसमें फत्ताजी के पराक्रम का वर्णन किया जाता है।

4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)

बिंदु विवरण
सीधा प्रतियोगी प्रश्न (RPSC / RSMSSB) “लोकदेवता वीर फत्ताजी का मुख्य मंदिर एवं मेला कहाँ स्थित है?” — सांथू गाँव (जालौर)।
मेले की तिथि (Calendar Question) भाद्रपद शुक्ल नवमी (गोगा नवमी के ठीक 15 दिन बाद; गोगा नवमी भाद्रपद कृष्ण नवमी को होती है)।
बलिदान का उद्देश्य सांथू गाँव की सीमा पर लुटेरों से गाँव व गोवंश की रक्षा करते हुए वीरगति।
जालौर अंचल के अन्य प्रमुख लोकदेवता
• तल्लीनाथ जी (गांगदेव राठौड़): पांचोटा गाँव (जालौर) — जालौर के प्रमुख प्रकृति-प्रेमी लोकदेवता (ओरण संरक्षक)।
• वीर फत्ताजी: सांथू गाँव (जालौर)।
समान प्रकृति के अन्य गौरक्षक लोकदेवता (सुमेलित करने वाले प्रश्न)
• वीर बिग्गाजी: रीड़ी/बिग्गा (बीकानेर) — जाखड़ समाज के कुलदेवता।
• पनराज जी: पनराजसर (जैसलमेर)।
• बाबा झूंझारजी: इमलोहा (सीकर)।
• वीर फत्ताजी: सांथू (जालौर)।

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