मुख्य बिंदु: शिव चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) 1. कब और कहाँ तिथि: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि। समय: अगस्त–सितंबर। प्रमुख क्षेत्र: राजस्थान (विशेषकर मेवाड़, ढूंढाड़ और मारवाड़ के शैव अंचल), मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कुछ पारंपरिक पंचांग क्षेत्र। (नोट: यह दिन सर्वविदित रूप से ‘गणेश चतुर्थी’ के नाम से प्रसिद्ध है, किंतु […]
शिव चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी)
1. कब और कहाँ
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तिथि: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि।
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समय: अगस्त–सितंबर।
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प्रमुख क्षेत्र: राजस्थान (विशेषकर मेवाड़, ढूंढाड़ और मारवाड़ के शैव अंचल), मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कुछ पारंपरिक पंचांग क्षेत्र।
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(नोट: यह दिन सर्वविदित रूप से ‘गणेश चतुर्थी’ के नाम से प्रसिद्ध है, किंतु शैव परंपरा और स्थानीय पंचांगों में इसे ‘शिव चतुर्थी’ के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।)
2. धार्मिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि
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शिव परिवार का तात्विक संबंध: पौराणिक मान्यता के अनुसार, गणेश जी भगवान शिव और माता पार्वती के अंशावतार हैं। गणेश जी के प्राकट्य और उनके ‘प्रथम पूज्य’ बनने के पीछे स्वयं महादेव का संकल्प और शक्ति थी। इसलिए कई तांत्रिक और आगम परंपराओं में गणेश पूजन के साथ-साथ भगवान शिव के इस स्वरूप की आराधना को ‘शिव चतुर्थी’ कहा जाता है।
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अविनाशी वरदान की कथा: जब महादेव ने बालक गणेश पर गज-मुख (हाथी का शीश) स्थापित कर उन्हें नवजीवन दिया, तो उन्होंने आशीर्वाद दिया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर जो भक्त शिव-पार्वती सहित गणेश की पूजा करेगा, उसके जीवन के तीनों ताप (दैहिक, दैविक, भौतिक) नष्ट होंगे। इसी कारण इसे शिव-उपासना से जोड़कर ‘शिव चतुर्थी’ भी कहा गया।
3. प्रमुख परंपराएँ एवं पूजा विधान
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पार्थिव शिवलिंग व गणेश पूजन: इस दिन भक्त मिट्टी से बने शिवलिंग और गणेश प्रतिमा की संयुक्त पूजा करते हैं।
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बिल्वपत्र व दूर्वा का संगम: महादेव को 108 बिल्वपत्र और भगवान गणेश को 21 दूर्वा दल अर्पित किए जाते हैं।
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रुद्राभिषेक: मंदिरों में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) और गन्ने के रस से भगवान शिव का विशेष रुद्राभिषेक किया जाता है, ताकि विघ्नों का समूल नाश हो सके।
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अभिषेक और मंत्र जप: ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का संयुक्त जप किया जाता है।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
| बिंदु | विवरण |
| तिथि संबंध | भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी के समानांतर ही शैव परंपरा में इसे ‘शिव चतुर्थी’ भी कहा जाता है)। |
| पंचांग भ्रम (Calendar Disambiguation) |
• मासिक शिवरात्रि: प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है।
• महाशिवरात्रि: फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी/चतुर्दशी को मनाई जाती है।
• शिव चतुर्थी: भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश प्राकट्य से जुड़ी शैव तिथि)।
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| राजस्थान के संदर्भ में शैव पीठ |
राजस्थान में शैव संप्रदाय के प्रमुख केंद्र:
• एकलिंगजी मंदिर (कैलाशपुरी, उदयपुर): मेवाड़ के महाराणाओं के इष्टदेव/वास्तविक शासक।
• अचलेश्वर महादेव (माउंट आबू, सिरोही): जहाँ शिव के पैर के अंगूठे (अंगुष्ठ) की पूजा होती है।
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