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नीमूचाणा हत्याकांड (अलवर)

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सत्यापित: 03 September 2026
मुख्य बिंदु: नीमूचाणा हत्याकांड राजस्थान के आधुनिक इतिहास में सामंती व औपनिवेशिक क्रूरता का सबसे वीभत्स नरसंहार माना जाता है। यह अलवर रियासत के राजपूत किसानों द्वारा लगान वृद्धि और पारंपरिक अधिकारों की बहाली के लिए किए गए संघर्ष का परिणाम था। 1. पृष्ठभूमि व आंदोलन के कारण रियासत व तत्कालीन शासक: अलवर रियासत, महाराजा सवाई जयसिंह। […]
नीमूचाणा हत्याकांड राजस्थान के आधुनिक इतिहास में सामंती व औपनिवेशिक क्रूरता का सबसे वीभत्स नरसंहार माना जाता है। यह अलवर रियासत के राजपूत किसानों द्वारा लगान वृद्धि और पारंपरिक अधिकारों की बहाली के लिए किए गए संघर्ष का परिणाम था।

1. पृष्ठभूमि व आंदोलन के कारण

  • रियासत व तत्कालीन शासक: अलवर रियासत, महाराजा सवाई जयसिंह।
  • प्रमुख भागीदार समुदाय: मुख्य रूप से राजपूत किसान (इस आंदोलन की मुख्य विशिष्टता यही थी कि इसमें शासक वर्ग की अपनी ही जाति के काश्तकार बगावत पर उतरे थे)।
  • आंदोलन के प्रमुख कारण:
    1. नया भूमि बंदोबस्त (1923-24 ई.): राज्य में लागू किए गए नए भूमि बंदोबस्त के तहत नकद लगान (भू-राजस्व) की दरों में 40% तक की भारी वृद्धि कर दी गई।
    2. पारंपरिक रियायतों की समाप्ति: पूर्व व्यवस्था में राजपूत काश्तकारों से सामान्य किसानों की तुलना में कम लगान लिया जाता था। नए नियमों में उनकी यह छूट समाप्त कर उन पर भी सामान्य किसानों जितना भारी कर थोप दिया गया।
    3. अवैध उपकर व चराई कर: चरागाहों पर नया कर तथा अनेक लाग-बागों की कठोर वसूली।
    4. ‘पुकार’ पुस्तिका: किसानों ने अपनी समस्याओं को उजागर करने के लिए ‘पुकार’ नाम से एक मांग-पत्र/पुस्तिका प्रकाशित कर रियासत भर में वितरित करवाई थी।

2. हत्याकांड का घटनाक्रम (14 मई 1925 ई.)

  • सटीक तिथि: 14 मई 1925 ई.
  • स्थान: नीमूचाणा गाँव (बानसूर तहसील, अलवर जिला)।
  • प्रमुख किसान नेता: माधव सिंह, गोविंद सिंह, गंगा सिंह और अमर सिंह।
  • किसान सभा का आयोजन:
    • 14 मई 1925 को नीमूचाणा गाँव में लगभग 2,500 किसान (महिलाएँ और बच्चे भी शामिल) राज्य सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे।
  • जनरल छज्जू सिंह की बर्बर कार्रवाई:
    • अलवर रियासती सेना का कमांडर जनरल छज्जू सिंह भारी सशस्त्र पुलिस बल, मशीनगनों और तोपों के साथ पहुँचा।
    • उसने नीमूचाणा गाँव और सभा स्थल को चारों तरफ से घेर लिया।
    • बिना किसी पूर्व चेतावनी या तितर-बितर होने का समय दिए, निहत्थी सभा पर आधुनिक मशीनगनों से अंधाधुंध गोलियां बरसा दी गईं।
    • सैनिकों ने गाँव के घरों और खलिहानों में आग लगा दी, जिससे कई बुजुर्ग, बच्चे और पशु जिंदा जल गए।
  • हताहत:
    • सरकारी रिपोर्ट में केवल 13-14 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई, परंतु गैर-सरकारी आंकड़ों के अनुसार 156 से अधिक किसान शहीद हुए और सैकड़ों घायल हुए।

3. राष्ट्रीय प्रतिक्रिया एवं ऐतिहासिक उपनाम (परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले बिंदु)

इस नृशंस हत्याकांड की गूँज पूरे देश में फैली और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी तीखी भर्त्सना की गई:
  1. महात्मा गांधी की टिप्पणी:
    • गांधीजी ने अपने अंग्रेजी समाचार-पत्र ‘यंग इंडिया’ (Young India) में इस हत्याकांड की कठोर निंदा करते हुए इसे:
      • “जालियांवाला बाग हत्याकांड से भी अधिक क्रूर/वीभत्स” बताया।
      • इसे “दोहरी डायरशाही” (Dyrism Double Distilled) की संज्ञा दी।
  2. ‘रियासत’ समाचार-पत्र (दिल्ली):
    • दिल्ली से प्रकाशित उर्दू समाचार पत्र ‘रियासत’ (संपादक: दीवान सिंह मफ्तून) ने 31 मई 1925 के अंक में नीमूचाणा कांड की सीधी तुलना जालियांवाला बाग से की और इसे “राजस्थान का जालियांवाला बाग” लिखा।
  3. राजस्थान का जनरल डायर:
    • निहत्थों पर क्रूरतापूर्वक मशीनगनें चलवाने के कारण जनरल छज्जू सिंह को राजस्थान के इतिहास में “राजस्थान का जनरल डायर” कहा जाता है।
  4. महिला वीरांगना (सीता देवी):
    • इस आंदोलन में किसान वीरांगना सीता देवी (थानागाजी/नीमूचाणा क्षेत्र) ने महिलाओं का नेतृत्व किया और लाठियों-बंदूकों के सामने अदम्य साहस का परिचय दिया।

4. आंदोलन का परिणाम

  • राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी बदनामी और फजीहत झेलने के बाद महाराजा सवाई जयसिंह बैकफुट पर आ गए।
  • 18 नवंबर 1925 को राज्य सरकार ने आदेश जारी किया:
    • पुराने भूमि बंदोबस्त के अनुसार लगान की दरों को फिर से बहाल किया गया।
    • राजपूत किसानों को उनकी पारंपरिक रियायतें पुनः प्रदान की गईं।
    • इस प्रकार अत्यधिक रक्तपात और शहादत के बाद किसानों की मांगें मान ली गईं।

5. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Table)

प्रमुख बिंदु परीक्षा उपयोगी तथ्य
सटीक तिथि 14 मई 1925 ई.
स्थान नीमूचाणा गाँव (बानसूर तहसील, अलवर)
तत्कालीन शासक महाराजा सवाई जयसिंह
प्रमुख किसान नेता माधव सिंह और गोविंद सिंह
प्रमुख महिला सत्याग्रही सीता देवी
किसानों द्वारा निकाला गया पर्चा ‘पुकार’
गोलीबारी का मुख्य सैन्य कमांडर जनरल छज्जू सिंह (“राजस्थान का जनरल डायर”)
गांधीजी द्वारा दी गई संज्ञा ‘दोहरी डायरशाही’ (Dyrism Double Distilled) (‘यंग इंडिया’ में)
‘राजस्थान का जालियांवाला बाग’ कहने वाला पत्र ‘रियासत’ (दिल्ली)
समझौता तिथि 18 नवंबर 1925 (पुरानी लगान दरें पुनः लागू)

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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