मुख्य बिंदु: भीनमाल (भीनमाल / श्रीमाल) सभ्यता: संपूर्ण एवं विस्तृत विवरण मानक स्रोतों (आरबीएसई, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी और आरपीएससी पाठ्यक्रम) के अनुसार भीनमाल राजस्थान के प्राचीन, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्रों में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह प्रारंभिक ऐतिहासिक काल और गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य के शुरुआती वैभव का प्रमुख केंद्र रहा है। भीनमाल से जुड़ी छोटी-से-छोटी, भौगोलिक, […]
भीनमाल (भीनमाल / श्रीमाल) सभ्यता: संपूर्ण एवं विस्तृत विवरण
मानक स्रोतों (आरबीएसई, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी और आरपीएससी पाठ्यक्रम) के अनुसार भीनमाल राजस्थान के प्राचीन, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्रों में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह प्रारंभिक ऐतिहासिक काल और गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य के शुरुआती वैभव का प्रमुख केंद्र रहा है।
भीनमाल से जुड़ी छोटी-से-छोटी, भौगोलिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक डिटेल्स नीचे बिंदुवार दी जा रही हैं:
1. सामान्य परिचय एवं भौगोलिक स्थिति
-
जिला: सांचौर (राजस्थान) — (प्रशासनिक पुनर्गठन से पहले यह जालौर जिले के अंतर्गत आता था)।
-
प्राचीन नाम: भीनमाल के प्राचीन नाम ‘श्रीमाल’, ‘भिल्लमाल’ या ‘पिलोमोलो’ मिलते हैं।
-
इतिहास ग्रंथों के अनुसार यह प्राचीन ‘गुर्जर देश’ (गुर्जरत्रा) की राजधानी था।
2. खोज एवं उत्खनन (Discovery & Excavation)
-
उत्खनन: इस ऐतिहासिक पुरास्थल पर वर्ष 1953-54 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् आर.सी. अग्रवाल (रतन चंद्र अग्रवाल) के निर्देशन में व्यापक उत्खनन कार्य कराया गया था।
3. भीनमाल सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ (बिंदुवार संपूर्ण विवरण)
A. चीनी यात्री ह्वेनसांग का आगमन (‘पिलोमोलो’)
-
7वीं शताब्दी (लगभग 641 ई.) में भारत आने वाले प्रसिद्ध चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang / युवानच्वांग) ने अपनी यात्रा के दौरान भीनमाल की यात्रा की थी।
-
ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृत्तांत में भीनमाल को ‘पिलोमोलो’ (Pilomolo) नाम से संबोधित किया है और इसे एक समृद्ध व्यापारिक नगर तथा गुर्जर राज्य की राजधानी बताया है।
B. विदेशी व्यापार के प्रमाण: “रोमन एम्फोरा” (Roman Amphora)
-
भीनमाल के उत्खनन से प्राप्त सबसे महत्वपूर्ण पुरावशेषों में रोमन एम्फोरा (सुरापात्र / मदिरा रखने का लंबा सुराहीनुमा बर्तन) और एक यूनानी दुहत्थी सुराही शामिल है।
-
यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि प्राचीन भीनमाल का व्यापारिक संबंध सीधे रोम और यूनान (पश्चिमी देशों) के साथ था।
C. महान विद्वानों और साहित्यकारों की जन्मस्थली/कर्मभूमि
भीनमाल को प्राचीन भारत का एक महान बौद्धिक और साहित्यिक केंद्र माना जाता है:
-
महाकवि माघ: संस्कृत साहित्य के महान महाकाव्य ‘शिशुपाल वध’ के रचयिता महाकवि माघ की यह कर्मस्थली व निवास स्थान रहा है।
-
ब्रह्मगुप्त: महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री ब्रह्मगुप्त (जिन्होंने ‘ब्रह्मस्फुट सिद्धांत’ की रचना की और शून्य के गणितीय नियमों को प्रतिपादित किया) का जन्म यहीं हुआ था।
-
ब्रह्मगुप्त और बाणभट्ट: सम्राट हर्षवर्धन के समकालीन और यहाँ की बौद्धिक परंपरा का प्रभाव दूर-दूर तक फैला हुआ था।
D. वास्तुकला और मध्यकालीन भवन
-
उत्खनन में यहाँ से पक्की ईंटों से निर्मित सुव्यवस्थित भवनों, दीवारों और गुप्त-प्रतिहार कालीन मूर्तियों के अवशेष मिले हैं।
-
यहाँ का प्राचीन जगतस्वामी सूर्य मंदिर (गुर्जर-प्रतिहार शैली) और जैन मंदिर इस क्षेत्र की उत्कृष्ट वास्तुकला के परिचायक हैं।
आरपीएससी (RPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भीनमाल से मुख्य रूप से सांचौर/जालौर जिला, आर.सी. अग्रवाल (1953-54), चीनी यात्री ह्वेनसांग का दौरा, रोमन एम्फोरा (सुरापात्र), और महाकवि माघ व ब्रह्मगुप्त की जन्मस्थली/कर्मभूमि से जुड़े प्रश्न सबसे अधिक बार पूछे जाते हैं।