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नगरी (मध्यमिका) सभ्यता

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सत्यापित: 24 September 2026
मुख्य बिंदु: नगरी सभ्यता / मध्यमिका (चित्तौड़गढ़): संपूर्ण एवं विस्तृत विवरण मानक स्रोतों (आरबीएसई, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी और आरपीएससी पाठ्यक्रम) के अनुसार नगरी (प्राचीन नाम: मध्यमिका / मज्झिमिका) राजस्थान की ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक सभ्यताओं में एक अत्यंत गौरवशाली स्थान रखती है। यह मुख्य रूप से मौर्योत्तर काल, जनपद काल और प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से जुड़ी […]

नगरी सभ्यता / मध्यमिका (चित्तौड़गढ़): संपूर्ण एवं विस्तृत विवरण

मानक स्रोतों (आरबीएसई, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी और आरपीएससी पाठ्यक्रम) के अनुसार नगरी (प्राचीन नाम: मध्यमिका / मज्झिमिका) राजस्थान की ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक सभ्यताओं में एक अत्यंत गौरवशाली स्थान रखती है। यह मुख्य रूप से मौर्योत्तर काल, जनपद काल और प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से जुड़ी हुई है।
नगरी से जुड़ी छोटी-से-छोटी, भौगोलिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक डिटेल्स नीचे बिंदुवार दी जा रही हैं:

1. सामान्य परिचय एवं भौगोलिक स्थिति

  • जिला: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) — यह चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय से उत्तर दिशा में लगभग 11-12 किलोमीटर दूर स्थित है।
  • नदी: यह प्राचीन नगर बेड़च नदी के तट पर विकसित हुआ था।
  • प्राचीन नाम: प्राचीन संस्कृत और पाली साहित्यों में इसे ‘मध्यमिका’ या ‘मज्झिमिका’ कहा गया है। पाणिनी की ‘अष्टाध्यायी’ और पतंजलि के ‘महाभाष्य’ में भी मध्यमिका का उल्लेख मिलता है (पतंजलि के महाभाष्य में “अरुणद् यवनो मध्यमिकाम्” का उल्लेख है, जिससे यूनानी आक्रमण का संकेत मिलता है)।

2. खोज एवं उत्खनन (Discovery & Excavation)

  • आरंभिक खोज: इस ऐतिहासिक स्थल के महत्व को सबसे पहले दुनिया के सामने लाने का श्रेय प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. डी.आर. भंडारकर (Devadatta Ramakrishna Bhandarkar) को जाता है, जिन्होंने वर्ष 1904 में यहाँ का सर्वेक्षण किया था।
  • उत्खनन: बाद में वर्ष 1915-16 में डॉ. डी.आर. भंडारकर के निर्देशन में यहाँ बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक उत्खनन कराया गया। इसके बाद के वर्षों में के.वी. सुंदरराजन और अन्य पुरातत्वविदों द्वारा भी यहाँ कार्य किया गया।

3. नगरी सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ (बिंदुवार संपूर्ण विवरण)

A. सिवि जनपद (Sibi Janapada) की राजधानी

  • प्राचीन काल में मेवाड़ का यह क्षेत्र ‘सिवि जनपद’ के अंतर्गत आता था, और मध्यमिका (नगरी) इस गणराज्य की राजधानी थी।
  • उत्खनन के दौरान यहाँ से तांबे के हज़ारों सिक्के मिले हैं, जिन पर ब्राह्मी लिपि में “मज्झिमिकाया सिवि जनपदस” (सिवि जनपद की मध्यमिका का सिक्का) अंकित है। इससे इस बात की पुष्टि होती है कि यह एक स्वतंत्र और शक्तिशाली गणराज्य का केंद्र था।

B. भारत में “वैष्णव / भागवत धर्म” का प्राचीनतम साक्ष्य (घोषुंडी शिलालेख)

  • नगरी का सबसे बड़ा ऐतिहासिक महत्व यह है कि इसके समीप से ही प्रसिद्ध ‘घोषुंडी शिलालेख’ (Ghosundi Inscription) प्राप्त हुआ है।
  • विवरण: यह शिलालेख संस्कृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है।
  • महत्व: इस शिलालेख से भारत में वैष्णव या भागवत धर्म (संकर्षण अर्थार्त बलराम और वासुदेव अर्थार्त कृष्ण की पूजा) के प्रचलन का सबसे पहला पुरातात्विक साक्ष्य मिलता है। इसमें संकर्षण और वासुदेव के लिए पूजा-गृह (नारायण बाटिका) की घेराबंदी का उल्लेख है।

C. यूनानी आक्रमण का प्रमाण

  • महर्षि पतंजलि के महाभाष्य के अनुसार यूनानी शासक डिमीट्रियस (Demetrius) या मिनेंडर ने मध्यमिका (नगरी) पर आक्रमण किया था। नगरी के पुरातात्विक स्तरों से इस आक्रमण के संघर्ष और उसके बाद के पुनर्निर्माण के संकेत मिलते हैं।

D. वास्तुकला और धार्मिक संरचनाएँ (शिव मंदिर व हाथी बाड़ा)

  • हाथी बाड़ा (Hathi Baada): नगरी में एक विशाल प्राचीन घेरा है जिसे ‘हाथी बाड़ा’ कहा जाता है। यह मूल रूप से मौर्य या शुंग काल का एक गोल आकार का प्राचीन मंदिर (संभवतः भागवत धर्म से संबंधित संकर्षण-वासुदेव का मंदिर) था, जिसे बाद में बदल दिया गया।
  • यहाँ से गुप्त काल, मौर्य काल और शुंग-कुषाण काल की पक्की ईंटें, सुंदर मृदभांड, कुएँ, और भवनों के अवशेष मिले हैं।
  • यहाँ से भगवान शिव से जुड़ी मूर्तियाँ और शिव लिंग भी प्राप्त हुए हैं, जो शैव धर्म के प्रभाव को दर्शाते हैं।

E. कलाकृतियाँ और दैनिक जीवन की वस्तुएँ

  • नगरी से टेराकोटा (पकी हुई मिट्टी) की सुंदर कलाकृतियाँ, मोहरें, विभिन्न प्रकार के आभूषण, कीमती पत्थरों के मनके और लोहे-तांबे के औजार मिले हैं, जो यह बताते हैं कि यह एक समृद्ध और व्यावसायिक नगर था।
आरपीएससी (RPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से नगरी से मुख्य रूप से चित्तौड़गढ़ जिला, बेड़च नदी, प्राचीन नाम मध्यमिका, सिवि जनपद के सिक्के, डॉ. डी.आर. भंडारकर (1904), और भागवत धर्म से संबंधितोषुंडी शिलालेख से जुड़े प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं।

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