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राजस्थान का एकीकरण

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सत्यापित: 24 September 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान का एकीकरण एक बेहद रोचक, संघर्षपूर्ण और ऐतिहासिक प्रक्रिया थी, जो 18 मार्च 1948 से शुरू होकर 1 नवंबर 1956 को कुल 8 वर्ष, 7 महीने और 14 दिन में पूरी हुई। आज का हमारा प्यारा राजस्थान उस समय रियासतों, ठिकानों और चीफ कमिश्नर क्षेत्र में बंटा हुआ था। स्वतंत्रता के समय राजस्थान में […]
राजस्थान का एकीकरण एक बेहद रोचक, संघर्षपूर्ण और ऐतिहासिक प्रक्रिया थी, जो 18 मार्च 1948 से शुरू होकर 1 नवंबर 1956 को कुल 8 वर्ष, 7 महीने और 14 दिन में पूरी हुई। आज का हमारा प्यारा राजस्थान उस समय रियासतों, ठिकानों और चीफ कमिश्नर क्षेत्र में बंटा हुआ था।
स्वतंत्रता के समय राजस्थान में 19 रियासतें, 3 ठिकाने (कुशलगढ़, नीमराणा, लावा) और 1 केंद्रशासित प्रदेश (अजमेर-मेरवाड़ा) शामिल थे।

1. एकीकरण की पृष्ठभूमि और शुरुआती प्रयास

भारत की स्वतंत्रता के समय रियासतों के विलय के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में रियासत विभाग (States Department) की स्थापना 5 जुलाई 1947 को की गई थी। इसके सचिव वी.पी. मेनन बनाए गए। रियासतों के विलय के लिए एक शर्त रखी गई थी कि जिन रियासतों की वार्षिक आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है और जनसंख्या 10 लाख से अधिक है, वे अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रख सकती हैं। इस नियम के तहत राजस्थान में केवल चार बड़ी रियासतें (मेवाड़, मारवाड़, जयपुर और बीकानेर) ही स्वतंत्र रहने की पात्रता रखती थीं, लेकिन सरदार पटेल और वी.पी. मेनन की दूरदर्शिता से सभी का विलय संभव हो पाया।

2. सातों चरणों की विस्तृत क्रोनोलॉजी (Timeline)

प्रथम चरण: मत्स्य संघ (Matsya Sangh)

  • तारीख: 18 मार्च 1948
  • शामिल रियासतें: अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली (ABCD) + नीमराणा ठिकाना।
  • नामकरण: कन्हैयालाल माणिक्यलाल मुंशी (K.M. Munshi) के सुझाव पर इसका नाम ‘मत्स्य संघ’ रखा गया।
  • राजधानी: अलवर
  • राजप्रमुख: उदयभान सिंह (धौलपुर के महाराजा)
  • प्रधानमंत्री: शोभाराम कुमावत (अलवर से)
  • उद्घाटनकर्ता: एन.वी. गाडगिल (नरहरि विष्णु गाडगिल)
  • विशेष तथ्य: के.एम. मुंशी की सलाह पर धौलपुर और भरतपुर रियासतों का विलय उत्तर प्रदेश में न करके राजस्थान में किया गया।

द्वितीय चरण: पूर्व राजस्थान संघ / राजस्थान संघ (First Rajasthan Union)

  • तारीख: 25 मार्च 1948
  • शामिल रियासतें: कोटा, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, किशनगढ़, टोंक, शाहपुरा + कुशलगढ़ ठिकाना (कुल 9 रियासतें)।
  • राजधानी: कोटा
  • राजप्रमुख: भीम सिंह द्वितीय (कोटा के महाराव)
  • प्रधानमंत्री: गोकुल लाल असावा (शाहपुरा से)
  • उद्घाटनकर्ता: एन.वी. गाडगिल
  • विशेष तथ्य: बांसवाड़ा के महारावल वीर सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर करते समय कहा था कि “मैं अपने डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर रहा हूँ।”

तृतीय चरण: संयुक्त राजस्थान (United Rajasthan)

  • तारीख: 18 अप्रैल 1948
  • शामिल रियासतें: पूर्व राजस्थान संघ (द्वितीय चरण की 9 रियासतें) + मेवाड़ (उदयपुर) रियासत।
  • राजधानी: उदयपुर
  • राजप्रमुख: भूपाल सिंह (उदयपुर के महाराणा)
  • प्रधानमंत्री: माणिक्यलाल वर्मा
  • उद्घाटनकर्ता: पंडित जवाहरलाल नेहरू
  • विशेष तथ्य: उदयपुर के मिलने से इस संघ का नाम ‘संयुक्त राजस्थान’ पड़ा। इस चरण के उद्घाटन के अवसर पर पंडित नेहरू उदयपुर आए थे।

चतुर्थ चरण: वृहत् राजस्थान (Greater Rajasthan)

  • तारीख: 30 मार्च 1949 (यही दिन ‘राजस्थान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है)
  • शामिल रियासतें: संयुक्त राजस्थान + राजस्थान की चार बड़ी रियासतें (जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर) + लावा ठिकाना।
  • राजधानी: जयपुर (पी. सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर राजधानी जयपुर को बनाया गया)।
  • महाराजप्रमुख: भूपाल सिंह (उदयपुर के महाराणा को आजीवन ‘महाराजप्रमुख’ बनाया गया)।
  • राजप्रमुख: सवाई मानसिंह द्वितीय (जयपुर के महाराजा)।
  • प्रधानमंत्री: हीरालाल शास्त्री
  • उद्घाटनकर्ता: सरदार वल्लभभाई पटेल (जयपुर के अमरीश मैदान में)।
  • विशेष तथ्य: सत्यनारायण राव समिति की सिफारिशों के आधार पर विभागों का बंटवारा हुआ:
    • शिक्षा विभाग – बीकानेर
    • उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) – जोधपुर
    • खनिज एवं कस्टम विभाग – उदयपुर
    • कृषि विभाग – भरतपुर
    • वन एवं सहकारी विभाग – कोटा

पंचम चरण: संयुक्त वृहत् राजस्थान (United Greater Rajasthan)

  • तारीख: 15 मई 1949
  • शामिल क्षेत्र: चतुर्थ चरण (वृहत् राजस्थान) + मत्स्य संघ (प्रथम चरण के अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली)।
  • विशेष तथ्य: शंकरराव देव समिति की सिफारिश पर मत्स्य संघ को वृहत् राजस्थान में मिलाया गया, क्योंकि धौलपुर और भरतपुर के लोग सांस्कृतिक और भाषाई रूप से उत्तर प्रदेश के बजाय राजस्थान में रहना चाहते थे।

षष्ठ चरण: राजस्थान संघ (Rajasthan Union)

  • तारीख: 26 जनवरी 1950
  • शामिल क्षेत्र: संयुक्त वृहत् राजस्थान + सिरोही रियासत (आबू और देलवाड़ा को छोड़कर)।
  • विशेष तथ्य: संविधान लागू होने के दिन (26 जनवरी 1950) सिरोही का पूर्ण विलय राजस्थान में कर दिया गया। सरदार पटेल चाहते थे कि पूरा सिरोही गुजरात में जाए, लेकिन गोकुल भाई भट्ट और स्थानीय जनता के विरोध के कारण आबू-देलवाड़ा को छोड़कर शेष सिरोही राजस्थान में आ गया।

सप्तम एवं अंतिम चरण: आधुनिक राजस्थान (Current Rajasthan)

  • तारीख: 1 नवंबर 1956
  • शामिल क्षेत्र:
    1. सिरोही का आबू और देलवाड़ा क्षेत्र जो छठे चरण में छूट गया था।
    2. अजमेर-मेरवाड़ा का क्षेत्र (जो ब्रिटिश भारत के समय चीफ कमिश्नर प्रांत था और जिसके अपने अलग ‘धारासभा’ विधानसभा थी, जिसके मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय थे)।
    3. मंदसौर जिले (मध्य प्रदेश) की मानपुर तहसील का सुनेल टप्पा क्षेत्र राजस्थान को मिला।
    4. झालावाड़ जिले का सिरोंज क्षेत्र मध्य प्रदेश को सौंप दिया गया।
  • राजप्रमुख का पद समाप्त: इस दिन से ‘राजप्रमुख’ का पद समाप्त कर दिया गया और इसके स्थान पर राज्यपाल का पद सृजित किया गया। राजस्थान के प्रथम राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह बने।
  • मुख्यमंत्री: मोहनलाल सुखाड़िया।

3. एकीकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण समितियां और बातें

  • सत्यनारायण राव समिति: इस समिति ने राजधानियों और विभागों के आवंटन का निर्धारण किया था।
  • शंकरराव देव समिति: इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर मत्स्य संघ का विलय वृहत् राजस्थान में संभव हो पाया था।
  • लावा ठिकाना: यह पहले टोंक रियासत के अंतर्गत आता था, लेकिन एकीकरण के समय इसे जयपुर रियासत के साथ मिलाया गया।
इस प्रकार, विभिन्न रियासतों, राजाओं के त्याग, जनता के संघर्ष और सरदार वल्लभभाई पटेल की राजनीतिक कूटनीति के परिणामस्वरुप 1 नवंबर 1956 को हमारा वर्तमान आधुनिक राजस्थान अस्तित्व में आया।
क्या आप इनमें से किसी विशिष्ट चरण या रियासत (जैसे मेवाड़ या मारवाड़ के विलय के संघर्ष) के बारे में और अधिक विस्तार से जानना चाहते हैं?

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