मुख्य बिंदु: उदयपुर जिले (मेवाड़ अंचल) के सभी प्रमुख ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहलुओं का व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन व अन्य नाम: सीवी जनपद, मेदपाट, प्राग्वाट, झीलों की नगरी (City of Lakes), पूर्व का वेनिस (Venice of the East), ह्वाइट सिटी (श्वेत नगरी), फाउंटेन व माउंटेन का […]
उदयपुर जिले (मेवाड़ अंचल) के सभी प्रमुख ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहलुओं का व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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प्राचीन व अन्य नाम: सीवी जनपद, मेदपाट, प्राग्वाट, झीलों की नगरी (City of Lakes), पूर्व का वेनिस (Venice of the East), ह्वाइट सिटी (श्वेत नगरी), फाउंटेन व माउंटेन का शहर।
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स्थापना: 1559 ई. में महाराणा उदयसिंह द्वारा (अक्षय तृतीया के दिन)।
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भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
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प्रमुख नदियाँ: आयड़/बेड़च (गोगुंदा की पहाड़ियों से), सोम (बीछामेड़ा से), साबरमती, मानसी-वाकल।
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प्रमुख झीलें: पिछोला झील (राणा लाखा के समय एक बंजारे द्वारा निर्मित), फतहसागर झील (ड्यूक ऑफ कनॉट द्वारा नींव, ‘कनॉट बांध’), उदयसागर (उदयसिंह द्वारा निर्मित), स्वरूप सागर, जयसमंद (ऐतिहासिक रूप से उदयपुर, वर्तमान में सलूंबर जिला)।
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पहाड़ियाँ व पठार: गिरवा (उदयपुर के चारों ओर तश्तरीनुमा पहाड़ियाँ), देशहरो (रागा व जरगा पहाड़ियों का हरा-भरा क्षेत्र), गोगुंदा व भोराट का पठार।
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2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
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राजवंश: गुहिल/सिसोदिया वंश (सूर्यवंशी, स्वयं को ‘हिंदुआ सूरज’ कहते थे)। विश्व का सबसे लंबे समय तक एक ही क्षेत्र पर शासन करने वाला राजवंश।
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कुलदेवी: बाण माता।
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आराध्य देव: एकलिंग जी (कैलाशपुरी)।
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प्रमुख शासक व योगदान:
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बप्पा रावल (कालभोज): 734 ई. में मान मोरी को हराकर चित्तौड़ पर अधिकार; गुहिल वंश के वास्तविक संस्थापक; सोने के सिक्के चलाए।
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महाराणा कुंभा: राजस्थान की स्थापत्य कला के जनक (84 में से 32 दुर्गों का निर्माण)।
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महाराणा सांगा: ‘सैनिक भग्नावशेष’ (हिंदूपत); खातौली, बाड़ी और खानवा (1527) के युद्ध लड़े।
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महाराणा उदयसिंह: उदयपुर नगर की स्थापना और अकबर के आक्रमण (1567-68) के समय गोगुंदा/कुंभलगढ़ में आश्रय।
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महाराणा प्रताप (1540-1597): मेवाड़ के महान योद्धा; हल्दीघाटी (1576) और दिवेर (1582) के युद्धों के नायक; संकटकालीन राजधानी चावंड को बनाया।
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महाराणा राजसिंह (1652-1680): औरंगजेब की नीतियों का विरोध, श्रीनाथजी व द्वारकाधीश मूर्तियों की स्थापना, राजसमंद झील का निर्माण।
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महाराणा फतहसिंह: ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ (केसरी सिंह बारहठ द्वारा रचित 13 सोरठे) पढ़कर 1903 के दिल्ली दरबार में शामिल नहीं हुए।
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3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ
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आहड़ (आयड़) सभ्यता:
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बेड़च (आयड़) नदी के किनारे स्थित ताम्र युगीन सभ्यता।
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प्राचीन नाम: ताम्रवती नगरी, धूलकोट (स्थानीय नाम), आघाटपुर।
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यहाँ से 6 चूल्हे (सामूहिक भोजन व्यवस्था), टेराकोटा की वृषभ मूर्ति (बनासियन बुल), और तांबा गलाने की भट्ठियाँ मिली हैं।
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बालाथल सभ्यता: वल्लभनगर (उदयपुर) में स्थित; 11 कमरों वाला विशाल भवन और बुने हुए वस्त्र के अवशेष प्राप्त हुए।
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ईसवाल सभ्यता: उदयपुर में स्थित प्राचीन औद्योगिक बस्ती (लोहा गलाने के प्रमाण)।
4. प्रमुख महल, दुर्ग एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| सिटी पैलेस (राजमहल) | उदयसिंह व परवर्ती शासक | पिछोला झील के किनारे स्थित राजस्थान का सबसे विशाल महल परिसर। फर्ग्यूसन ने इन्हें “राजस्थान के विंडसर महल” कहा है। |
| जग मंदिर पैलेस | कर्णसिंह (शुरुआत), जगतसिंह प्रथम (पूर्ण) | पिछोला झील में स्थित; खुर्रम (शाहजहां) ने विद्रोह के समय यहाँ शरण ली थी। 1857 की क्रांति में अंग्रेजों ने भी यहाँ शरण ली। |
| जग निवास (लेक पैलेस) | महाराणा जगतसिंह द्वितीय (1746) | पिछोला झील में संगमरमर से निर्मित जलमहल; वर्तमान में एक लक्ज़री हेरिटेज होटल। |
| सज्जनगढ़ पैलेस (मानसून पैलेस) | महाराणा सज्जन सिंह | बांसदरा पहाड़ी पर स्थित; इसे ‘मेवाड़ का मुकुटमणि’ कहा जाता है; यह गुलाबों की खेती के लिए प्रसिद्ध है। |
| बागोर की हवेली | अमरचंद बड़वा (मेवाड़ के प्रधानमंत्री) | पिछोला किनारे स्थित; विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी यहीं रखी है; पश्चिमी सांस्कृतिक केंद्र का मुख्यालय। |
| सहेलियों की बाड़ी | महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय | फतहसागर झील के किनारे रानियों व दासियों के लिए निर्मित उद्यान। |
5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध एवं घटनाएँ
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हल्दीघाटी का युद्ध (18 जून 1576): महाराणा प्रताप व मुग़ल सेनापति मानसिंह के मध्य (यद्यपि यह वर्तमान राजसमंद में है, किंतु मेवाड़/उदयपुर के इतिहास का हृदय है)।
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दिवेर का युद्ध (1582 ई.): महाराणा प्रताप की मुगलों पर निर्णायक विजय (कर्नल टॉड ने इसे ‘मेवाड़ का मैराथन’ कहा)।
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उंटाला का युद्ध (1599 ई.): जहांगीर की सेना और अमरसिंह प्रथम के बीच; इसी युद्ध में मेवाड़ के हरावल दस्ते (अग्रिम पंक्ति) में रहने के अधिकार हेतु चुण्डावतों और शक्तावतों में शौर्यपूर्ण प्रतिस्पर्धा हुई।
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मेवाड़-मुग़ल संधि (1615 ई.): महाराणा अमरसिंह प्रथम और मुग़ल सम्राट जहाँगीर के बीच।
6. मंदिर, लोकदेवता एवं संत-सूफी परंपरा
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प्रमुख मंदिर:
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जगदीश मंदिर (सपनों का मंदिर): महाराणा जगत सिंह प्रथम द्वारा 1651 में निर्मित; पंचायतन शैली; यह विष्णु भगवान (जगन्नाथ) को समर्पित है। इसके वास्तुकार भाणा व मुकुंद थे।
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एकलिंग जी मंदिर (कैलाशपुरी): बप्पा रावल द्वारा निर्मित; पाशुपत/लकुलीश संप्रदाय की प्रमुख पीठ।
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सास-बहू (सहस्रबाहु) मंदिर, नागदा: 10वीं शताब्दी में निर्मित कच्छपघात शैली का भव्य मंदिर।
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अंबिका माता मंदिर, जगत: मेवाड़ का खजुराहो कहलाता है; महामारू शैली में निर्मित देवी शक्तिपीठ।
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संत एवं सूफी:
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मस्तान बाबा की दरगाह / कालू मीर की दरगाह: उदयपुर के प्रसिद्ध सूफी स्थल।
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मीराबाई (मेवाड़ की पुत्रवधू): यद्यपि मेड़ता में जन्मी, किंतु मेवाड़ के राणा सांगा के पुत्र भोजराज से विवाह। चित्तौड़/मेवाड़ अंचल में कृष्ण भक्ति की महान संत।
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7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प
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मेवाड़ चित्रकला शैली:
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राजस्थान की मूल/प्राचीनतम चित्रशैली (प्रारंभ: राणा कुंभा, स्वर्णकाल: जगत सिंह प्रथम)।
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‘चितैरों री ओवरी’ (तस्वीरां रो कारखानो): जगत सिंह प्रथम द्वारा स्थापित कला विद्यालय।
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प्रमुख चित्रकार: साहिबदीन (रसिकप्रिया, गीतगोविंद), मनोहर, कृपाराम, नसीरुद्दीन (चावंड शैली में रागमाला)।
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विशेषताएँ: लाल-पीले रंग, गरुड़ नासिका, मीनाकृत आँखें, कदम्ब वृक्ष व हाथी का चित्रण।
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लोक कला व हस्तशिल्प:
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कठपुतली कला: उदयपुर की काष्ठ कला विश्व प्रसिद्ध है; नट जाति द्वारा किया जाता है।
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भारतीय लोक कला मंडल: 1952 में पद्मश्री देवीलाल सामर द्वारा स्थापित (कठपुतली कला को वैश्विक पहचान दिलाई)।
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टेराकोटा: मोलेला गाँव (वर्तमान राजसमंद) की मृण्मूर्तियाँ मेवाड़ की खास पहचान हैं।
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गवरी/राई लोकनाट्य: भील जनजाति का 40 दिन चलने वाला धार्मिक लोकनाट्य (राजस्थान का सबसे प्राचीन लोकनाट्य – मेरुनाट्य)।
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8. प्रमुख साहित्यकार, विद्वान एवं संस्थान
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कविराजा श्यामलदास: महाराणा सज्जन सिंह के दरबारी; प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ ‘वीर विनोद’ की रचना की।
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कर्नल जेम्स टॉड (राजस्थान के इतिहास के पितामह): 1818 में मेवाड़ के पॉलिटिकल एजेंट (P.A.) बनकर उदयपुर आए। इनकी पुस्तक: ‘Annals and Antiquities of Rajasthan’.
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माणिक्यलाल वर्मा: प्रख्यात लेखक व जननायक; मेवाड़ के किसानों की दशा पर ‘पंछीड़ा’ गीत और ‘मेवाड़ का वर्तमान शासन’ पुस्तक लिखी।
9. स्वतंत्रता संग्राम, जनजाति व प्रजामंडल आंदोलन
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मेवाड़ (उदयपुर) प्रजामंडल (24 अप्रैल 1938):
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संस्थापक: माणिक्यलाल वर्मा।
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प्रथम अध्यक्ष: बलवंत सिंह मेहता (संविधान सभा में हस्ताक्षर करने वाले राजस्थान के प्रथम व्यक्ति)।
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अधिवेशन: 1941 में उदयपुर में हुआ, जिसका उद्घाटन जे.बी. कृपलानी ने किया और विजयलक्ष्मी पंडित शामिल हुईं।
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जनजाति/किसान आंदोलन:
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भगत आंदोलन: गोविंद गुरु द्वारा भीलों में जनचेतना हेतु (सम्प सभा की स्थापना)।
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एकी (भोमट भील) आंदोलन (1921): आदिवासियों के मसीहा मोतीलाल तेजावत (बावजी) द्वारा मातृकुण्डिया (राशमी) से शुरू, जिसका मुख्य प्रभाव उदयपुर के झाड़ोल, फलासिया और कोटड़ा क्षेत्र में रहा। इन्होंने महाराणा को 21 सूत्रीय मांग पत्र ‘मेवाड़ पुकार’ सौंपा।
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भूरीलाल बया: मेवाड़ प्रजामंडल के नेता, जिन्हें सराड़ा किले (मेवाड़ का काला पानी) में बंदी बनाया गया था।