मुख्य बिंदु: सवाई माधोपुर जिले (रणथंभौर अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: बाघों का घर (Land of Tigers), हम्मीर देव की आन-बान-शान की भूमि, अमरूद नगरी (Guava City)। स्थापना: 19 जनवरी 1763 को जयपुर के कछवाहा शासक सवाई माधोसिंह प्रथम द्वारा बसाया […]
सवाई माधोपुर जिले (रणथंभौर अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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उपनाम: बाघों का घर (Land of Tigers), हम्मीर देव की आन-बान-शान की भूमि, अमरूद नगरी (Guava City)।
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स्थापना: 19 जनवरी 1763 को जयपुर के कछवाहा शासक सवाई माधोसिंह प्रथम द्वारा बसाया गया।
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भौगोलिक स्थिति व संगम:
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अरावली और विंध्याचल पर्वतमालाओं का मिलन स्थल (ग्रेट बाउंड्री फॉल्ट – GBF)।
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रामेश्वरम घाट (पदरा गाँव): बनास, चंबल और सीप नदियों का प्रसिद्ध त्रिवेणी संगम (इसे ‘मीणों का प्रयागराज’ कहा जाता है)।
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प्रमुख नदियाँ व जलस्रोत:
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नदियाँ: चंबल, बनास, मोरेल, गंभीर, सीप।
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झीलें/तालाब (रणथंभौर क्षेत्र): पद्म तालाब, राजबाग झील, मलिक तालाब, मानसरोवर झील, सूरवाल झील, मोरेल बांध।
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कृषि उत्पाद: लाल व सफेद अमरूद की पैदावार हेतु पूरे देश में प्रसिद्ध (अमरूद उत्कृष्टता केंद्र – देवड़ावास)।
2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
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रणथंभौर के चौहान (1194–1301 ई.):
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गोविंदराज चौहान (1194 ई.): तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद पृथ्वीराज चौहान तृतीय के पुत्र, जिन्होंने रणथंभौर में चौहान वंश की स्वतंत्र नींव रखी।
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वीरनारायण चौहान: इल्तुतमिश के आक्रमण का सामना किया।
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वाग्भट्ट चौहान: बलबन और रजिया सुल्तान की सेनाओं को विफल किया।
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जैत्रसिंह (जयसिंह): 32 वर्षों तक शासन किया (इनकी स्मृति में हम्मीर ने 32 खंभों की छतरी बनवाई)।
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राव हम्मीर देव चौहान (1282–1301 ई.): ‘हठी हम्मीर’ के नाम से विख्यात; कुल 17 में से 16 युद्धों के विजेता; शरणागत की रक्षा हेतु अलाउद्दीन खिलजी से लोहा लिया।
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हम्मीर हठ की प्रसिद्ध लोकोक्ति:“सिंह गमन सत्पुरुष वचन, कदली फलत इक बार। तिरिया तेल हम्मीर हठ, चढ़े न दूजी बार॥”
3. रणथंभौर का ऐतिहासिक साका (11 जुलाई 1301) — ‘राजस्थान का प्रथम साका’
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आक्रमणकारी: दिल्ली का सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी (सेनापति: उलुग खां, नुसरत खां – जो मारा गया)।
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कारण: खिलजी के विद्रोही मुग़ल सेनापति मीर मुहम्मद शाह व केहब्रू को हम्मीर द्वारा शरण देना।
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विश्वासघात: हम्मीर के सेनापति रणमल व रतिपाल खिलजी से मिल गए।
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साका व जल जौहर:
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हम्मीर देव चौहान लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए (केसरिया हुआ)।
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हम्मीर की रानी रंगादेवी और पुत्री पद्मला (देवलदे) ने पद्म तालाब में कूदकर जल जौहर किया (राजस्थान के इतिहास का प्रथम साका एवं एकमात्र प्रमाणित जल जौहर)।
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अमीर खुसरो का कथन: दुर्ग विजय के बाद खिलजी के दरबारी कवि अमीर खुसरो ने लिखा: “आज कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया।”
4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| रणथंभौर दुर्ग (रणस्तंभपुर) | रणथान देव / चौहान शासक (8वीं-10वीं सदी) | थंभ और रण की 7 पहाड़ियों से घिरा गिरि व वन (एरण) दुर्ग। अबुल फजल का प्रसिद्ध कथन: “अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, परंतु यह बख्तरबंद है।” यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल (2013)। |
| त्रिनेत्र गणेश मंदिर | हम्मीर देव चौहान काल | रणथंभौर दुर्ग में स्थित; भारत का एकमात्र मंदिर जहाँ भगवान गणेश जी के तीन नेत्र हैं और वे संपूर्ण परिवार (रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ) के साथ विराजमान हैं। विवाह का पहला निमंत्रण पत्र यहीं भेजा जाता है। |
| 32 खंभों की छतरी | हम्मीर देव चौहान | अपने पिता जैत्रसिंह के 32 वर्षों के शासनकाल की स्मृति में निर्मित; इसे ‘न्याय की छतरी’ भी कहा जाता है (जहाँ बैठकर हम्मीर न्याय करते थे)। |
| जोगी महल | जयपुर राजपरिवार | पदम तालाब के किनारे स्थित ऐतिहासिक विश्राम गृह; इसके निकट भारत का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़ है। |
| सुपारी महल | हम्मीर काल | राजस्थान का एकमात्र ऐसा भवन जहाँ मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर (Church) तीनों का समन्वय देखने को मिलता है। |
| पीर सदरुद्दीन की दरगाह | मध्यकालीन सूफी स्थल | रणथंभौर दुर्ग परिसर में स्थित प्रसिद्ध दरगाह। |
| खंडार का किला | सामरिक दुर्ग | ‘तारागढ़’ की तर्ज पर निर्मित; इसे ‘बाघों का दुर्ग’ भी कहते हैं। इसमें प्रसिद्ध ‘शारदा तोप’ रखी है। |
5. रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व
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स्थापना व स्थिति:
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1955 में वन्यजीव अभयारण्य।
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1973-74: ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत राजस्थान का पहला टाइगर रिजर्व घोषित।
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1 नवंबर 1980: राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान (National Park) बना।
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विशेषता:
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विश्व विख्यात बाघिन ‘मछली’ (T-16 / Lady of the Lakes / Crocodile Killer) की ऐतिहासिक कर्मस्थली (विश्व में सर्वाधिक फोटो खींची जाने वाली बाघिन)।
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‘लैंड ऑफ द टाइगर्स’ — दिन के उजाले में खुले में बाघ देखने का भारत का सर्वश्रेष्ठ स्थल।
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6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ
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घुश्मेश्वर महादेव (शिवाड़):
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द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से 12वाँ ज्योतिर्लिंग माना जाता है; महाशिवरात्रि पर विशाल लक्खी मेला भरता है।
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चौथ माता मंदिर (चौथ का बरवाड़ा):
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अरावली पर्वत की चोटी पर स्थित कंजर व मीणा समुदाय की कुलदेवी।
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मेला: प्रतिवर्ष माघ कृष्ण चतुर्थी (तिल चौथ/संकट चौथ) को विशाल लक्खी मेला भरता है।
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कमलेश्वर महादेव (इंद्रगढ़ सीमा): विंध्याचल की पहाड़ियों में स्थित प्राचीन शिवालय।
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धुंधेश्वर महादेव: प्राकृतिक कंदराओं और जलकुंडों से युक्त सुरम्य तीर्थ।
7. कला, संस्कृति, हस्तशिल्प एवं लोक विधाएं
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खस का इत्र (Khas Perfume): सवाई माधोपुर और भरतपुर में पाई जाने वाली प्राकृतिक सुगंधित ‘खस’ घास से इत्र तैयार किया जाता है।
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कन्हैया दंगल व पद गायन: डांग व ढूंढाड़ सीमावर्ती अंचल का प्रसिद्ध लोकनाट्य व गायन।
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खस व बांस के उत्पाद: पंखे, पर्दे, आसन और टोकनियों का निर्माण।
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मीणा जनजाति की संस्कृति: सवाई माधोपुर क्षेत्र मीणा समुदाय की बहुलता और उनकी ‘मोरनी मांडणा’ भित्ति मांडना कला हेतु विख्यात है।
8. प्रमुख साहित्यकार एवं ऐतिहासिक ग्रंथ
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नयनचंद्र सूरी: जैन विद्वान; प्रसिद्ध महाकाव्य ‘हम्मीर महाकाव्य’ के रचयिता।
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जोधराज / सारंगधर: ग्रंथ: ‘हम्मीर रासो’।
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चंद्रशेखर: ग्रंथ: ‘हम्मीर हठ’ एवं ‘सुरजन चरित’।
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जयसिंह सूरी: ग्रंथ: ‘हम्मीर मदमर्दन’।
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अमीर खुसरो: ग्रंथ: खजाइन-उल-फुतुह (तारीख-ए-अलाई – जिसमें 1301 के युद्ध का सजीव विवरण है)।
9. स्वतंत्रता संग्राम एवं प्रजामंडल आंदोलन
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जयपुर प्रजामंडल का प्रभाव: सवाई माधोपुर जयपुर रियासत का निजामत क्षेत्र था; अतः हीरालाल शास्त्री और कपूरचंद पाटनी के आंदोलनों का सीधा केंद्र रहा।
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मीणा क्षेत्रीय सभा (1933): बामनवास व सवाई माधोपुर क्षेत्र में ‘जरायम पेशा कानून’ (Criminal Tribes Act) के विरोध में जनजागरण।
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राजस्थान एकीकरण (30 मार्च 1949): चतुर्थ चरण (वृहत् राजस्थान) में जयपुर रियासत के साथ सवाई माधोपुर का राजस्थान में पूर्ण विलय हुआ।