मुख्य बिंदु: मेवाड़ प्रजामंडल राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलनों में सबसे अधिक संघर्षपूर्ण, साहसिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मेवाड़ (उदयपुर) रियासत में सामंती अत्याचारों और निरंकुश शासन के खिलाफ जनता को संगठित करने के लिए यह आंदोलन चलाया गया था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं: 1. स्थापना वर्ष (Establishment […]
मेवाड़ प्रजामंडल राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलनों में सबसे अधिक संघर्षपूर्ण, साहसिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मेवाड़ (उदयपुर) रियासत में सामंती अत्याचारों और निरंकुश शासन के खिलाफ जनता को संगठित करने के लिए यह आंदोलन चलाया गया था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं:
1. स्थापना वर्ष (Establishment Year)
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स्थापना वर्ष: 24 अप्रैल 1938 ई. को मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना की गई थी।
2. संस्थापक एवं प्रमुख नेता (Founder & Key Leaders)
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संस्थापक एवं मुख्य नेता: माणिक्यलाल वर्मा (इन्हें ‘मेवाड़ प्रजामंडल का संस्थापक और प्राण’ कहा जाता है)।
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प्रथम अध्यक्ष: बलवंत सिंह मेहता (मेवाड़ प्रजामंडल के पहले अध्यक्ष बने थे, जिनके निवास स्थान ‘भूपाल निवास’ में ही इसकी स्थापना की बैठक हुई थी)।
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अन्य प्रमुख नेता: मोहनलाल सुखाड़िया (जो बाद में राजस्थान के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे), बलवंत सिंह मेहता, रमेशचंद्र व्यास, और दयाशंकर श्रोत्रिय।
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प्रमुख महिला नेत्री: नारायणी देवी वर्मा (माणिक्यलाल वर्मा की पत्नी) और स्नेहलता वर्मा ने यहाँ की महिलाओं को जागृत करने और आंदोलनों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
3. मुख्य गतिविधियाँ एवं उपलब्धियाँ (Activities & Achievements)
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प्रतिबंध और सत्याग्रह: स्थापना के तुरंत बाद, मेवाड़ रियासत की सरकार ने मई 1938 में ही प्रजामंडल को अवैध घोषित कर दिया। इसके विरोध में माणिक्यलाल वर्मा और उनके साथियों ने राज्यव्यापी सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया।
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माणिक्यलाल वर्मा की गिरफ्तारी और नजरबंदी: प्रजामंडल पर प्रतिबंध के बाद माणिक्यलाल वर्मा को गिरफ्तार कर कुंभलगढ़ दुर्ग और बाद में मेवाड़ से बाहर नजरबंद कर दिया गया, लेकिन वर्मा जी ने भूमिगत रहकर आंदोलन का संचालन जारी रखा।
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‘पंचीदा’ गीत का योगदान: माणिक्यलाल वर्मा ने अपना प्रसिद्ध प्रेरणादायक गीत ‘पंचीदा’ रचकर मेवाड़ के किसानों और आम जनता में अन्याय के खिलाफ लड़ने का जो जोश भरा, वह इतिहास में अमर हो गया।
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महात्मा गांधी और जे.बी. कृपलानी का समर्थन: मेवाड़ प्रजामंडल के आंदोलन को अखिल भारतीय स्तर पर पहचान तब मिली जब जे.बी. कृपलानी और बजाज जी ने मेवाड़ सरकार के दमन की कड़ी आलोचना की।
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उत्तरदायी शासन की स्थापना: देश की आजादी के बाद, मेवाड़ में भी लोकप्रिय मंत्रिमंडल का गठन हुआ और हीरालाल शास्त्री सरकार के समय मेवाड़ का राजस्थान में विलय होने के बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हुई।
4. कमियाँ एवं सीमाएँ (Limitations & Challenges)
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कठोर दमन: मेवाड़ रियासत (और उसके प्रधानमंत्री राघवाचारी) का रुख शुरू में प्रजामंडल के प्रति बहुत आक्रामक और दमनकारी था। कार्यकर्ताओं को जेलों में भीषण यातनाएँ दी गईं और उनकी संपत्तियाँ जब्त कर ली गईं।
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जागीरदारी व्यवस्था का विरोध: मेवाड़ में जागीरदारी प्रथा बहुत मजबूत थी, इसलिए स्थानीय स्तर पर सामंतों ने प्रजामंडल के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध किया, जिससे किसानों और आम जनता को शुरुआती दौर में भारी संघर्ष झेलना पड़ा।
5. मुख्य विशेषता / विवरण (Key Features / Summary)
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बलवंत सिंह मेहता के निवास पर स्थापना: मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना बलवंत सिंह मेहता के घर पर हुई थी, और इसमें माणिक्यलाल वर्मा की सूझबूझ और त्याग ने मुख्य भूमिका निभाई।
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दमन के बावजूद अडिग रहना: तमाम प्रशासनिक पाबंदियों और दमनचक्र के बावजूद मेवाड़ प्रजामंडल ने कभी हार नहीं मानी और राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम में एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ा रहा।