मुख्य बिंदु: क्षमा चाहता हूँ, पिछली बार गलती से भाषा दूसरी हो गई थी। आइए, इस बुलेटिन (राजस्थान सुजस, 24 सितंबर 2026) के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं (RAS, REET, RPSC, आदि) की दृष्टि से सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को हिंदी में विस्तार से और बिंदु-वार (Point-to-Point) समझते हैं: 1. सेवा संकल्प यात्रा एवं प्रमुख अभियान अवधि: यह सेवा […]
क्षमा चाहता हूँ, पिछली बार गलती से भाषा दूसरी हो गई थी। आइए, इस बुलेटिन (राजस्थान सुजस, 24 सितंबर 2026) के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं (RAS, REET, RPSC, आदि) की दृष्टि से सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को हिंदी में विस्तार से और बिंदु-वार (Point-to-Point) समझते हैं:
1. सेवा संकल्प यात्रा एवं प्रमुख अभियान
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अवधि: यह सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर, 2026 तक चलाया जा रहा है।
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उद्देश्य: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गत 25 वर्षों के सेवा कार्यों और संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है। यह यात्रा वडनगर से वाराणसी तक आयोजित की जा रही है।
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हरियालो राजस्थान अभियान: इसके तहत राज्य में 5 वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 28 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।
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प्रमुख जल परियोजनाएं: राजस्थान में पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए चार बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं—रामजल सेतु लिंक परियोजना (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये लागत, जिसमें 41 हजार करोड़ रुपये के कार्य प्रगति पर हैं), यमुना जल समझौता (35 हजार करोड़ रुपये की परियोजना), नर्मदा समझौता और किशाऊ बहुद्देश्यीय बांध परियोजना।
2. राज उन्नति की 9वीं बैठक से संबंधित प्रमुख निर्णय
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विद्यालयों का आधुनिकीकरण: शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए राज्य के 41 जिलों के 65,308 राजकीय विद्यालयों का सघन तकनीकी सर्वे किया गया है। इस पर करीब 12,500 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक निवेश किया जा रहा है। सर्वे के अनुसार 3,587 जर्जर स्कूल भवन और 71,078 कक्षा-कक्षों में सुधार की आवश्यकता चिन्हित की गई है।
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पन्नाधाय बाल गोपाल योजना: विद्यार्थियों के पोषण स्तर में सुधार के लिए इस योजना के तहत करीब 46 लाख विद्यार्थियों को नियमित रूप से दूध उपलब्ध कराया जा रहा है, जिस पर लगभग 800 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
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आरआईटी (RIT) की स्थापना: उच्च तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भरतपुर, बीकानेर और अजमेर के इंजीनियरिंग कॉलेजों को अपग्रेड कर ‘राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (RIT) के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पर करीब 300 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।
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अटल ज्ञान केंद्र एवं अटल प्रगति पथ: ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्र बनाए जा रहे हैं। वहीं, 5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण कस्बों में ‘अटल प्रगति पथ’ का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
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नए ट्रोमा सेंटर: चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कोलाना (बांदीकुई), दलोत (प्रतापगढ़), देसूरी (पाली), साण्डेराव (पाली), आरयूएचएस (जयपुर) और दूदू में ट्रोमा सेंटर के विकास/निर्माण कार्य निर्धारित किए गए हैं।
3. विकसित भारत जन सेवा अभियान (आंगन मिलन सेवा)
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आयोजन: महिला एवं बाल विकास विभाग (ICDS) के अंतर्गत 25 से 27 सितंबर, 2026 तक प्रदेश के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर ‘आंगन मिलन सेवा’ का आयोजन किया जा रहा है।
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इसके तहत गर्भावस्था से लेकर 6 वर्ष तक के बच्चों के पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
4. अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट
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संविदा सफाई कर्मचारी भर्ती: राज्य के 183 नगरीय निकायों में विज्ञापित 24,752 संविदा सफाई कर्मचारी पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 13 अक्टूबर, 2026 कर दी गई है।
5. भरतपुर: कला, संस्कृति एवं इतिहास
बुलेटिन में दिए गए भरतपुर जिले के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों के बिंदु:
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बंद बारैठा वन्यजीव अभ्यारण्य: यह भरतपुर के शासकों का पुराना वन्यजीव रिजर्व है, जो वर्तमान में वन विभाग के अधीन है। इसकी ककुंद नदी पर बांध का निर्माण महाराजा जसवंत सिंह द्वारा 1866 ई. में शुरू किया गया था और महाराजा राम सिंह द्वारा 1897 ई. में पूरा किया गया। यह अभ्यारण्य दुर्लभ ब्लैक बिटर्न सहित 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों के कारण पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग माना जाता है।
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लोहागढ़ दुर्ग: इसे राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह अपनी अद्वितीय और अजेय मिट्टी/कच्चे किले की मजबूती के लिए जाना जाता है, जिसने अंग्रेजों के कई आक्रमणों का सफलतापूर्वक सामना किया। दुर्ग के चारों ओर शत्रु से रक्षा के लिए पानी की खाई बनी हुई है। यहाँ कोठी खास, महल खास, मोती महल, किशोरी महल प्रमुख इमारतें हैं। महाराजा सूरजमल ने मुगलों और अंग्रेजों पर विजय के उपलक्ष्य में जवाहर बुर्ज और फतेह बुर्ज का निर्माण करवाया था।
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लक्ष्मण मंदिर: भगवान राम के भाई लक्ष्मण को समर्पित यह मंदिर अपनी विशिष्ट राजस्थानी वास्तुकला और सुंदर गुलाबी पत्थर की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। दरवाजे, छतों, खंभों और दीवारों पर फूलों और पक्षियों की बहुत बारीक नक्काशी की गई है।