मुख्य बिंदु: बूंदी प्रजामंडल राजस्थान के प्रमुख प्रजामंडल आंदोलनों में से एक था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से नीचे दी गई हैं: 1. स्थापना वर्ष (Establishment Year) स्थापना वर्ष: 1931 ई. में बूंदी प्रजामंडल की स्थापना की गई थी। यह राजस्थान के शुरुआती प्रजामंडलों में से एक था। 2. संस्थापक एवं प्रमुख नेता (Founder […]
बूंदी प्रजामंडल राजस्थान के प्रमुख प्रजामंडल आंदोलनों में से एक था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से नीचे दी गई हैं:
1. स्थापना वर्ष (Establishment Year)
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स्थापना वर्ष: 1931 ई. में बूंदी प्रजामंडल की स्थापना की गई थी। यह राजस्थान के शुरुआती प्रजामंडलों में से एक था।
2. संस्थापक एवं प्रमुख नेता (Founder & Key Leaders)
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संस्थापक: कान्तिलाल जैन (कान्तिलाल चौथानी)
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प्रमुख सहयोगी/नेता: ऋषिदत्त मेहता, गोपीलाल यादव और पंडित नैनूराम शर्मा (जिन्हें हाड़ौती क्षेत्र का मुख्य मार्गदर्शक माना जाता था)।
3. मुख्य गतिविधियाँ एवं उपलब्धियाँ (Activities & Achievements)
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नागरिक अधिकारों की मांग: बूंदी रियासत में जनता पर हो रहे अत्याचारों, बेगार प्रथा (बिना वेतन के काम करवाना), और अत्यधिक लगान के खिलाफ आवाज उठाने के लिए इस प्रजामंडल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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समाचार पत्रों का योगदान: ऋषिदत्त मेहता ने ‘राजस्थान केसरी’ और बाद में ‘प्रताप’ व ‘लोकवाणी’ जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से बूंदी रियासत की दमनकारी नीतियों और प्रजामंडल आंदोलन की आवाज़ को आम जनता तक पहुँचाया।
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उत्तरदायी शासन की मांग: अन्य रियासतों की तरह बूंदी में भी राजा के अंतर्गत रहते हुए जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा शासन चलाने (उत्तरदायी शासन) की मांग की गई।
4. कमियाँ एवं सीमाएँ (Limitations)
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संगठन का सीमित दायरा: शुरुआती समय में राजा और जागीरदारों के कड़े विरोध तथा दमन के कारण यह आंदोलन बहुत अधिक व्यापक या उग्र रूप नहीं ले पाया। इसे गुप्त रूप से या बहुत संभलकर चलाना पड़ा था।
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नेतृत्व और संसाधनों की कमी: अन्य बड़े प्रजामंडलों (जैसे जयपुर या मारवाड़) की तुलना में बूंदी प्रजामंडल के पास वित्तीय संसाधनों और बड़े पैमाने पर जन-समर्थन जुटाने वाले नेतृत्व की कुछ समय तक कमी खली।
5. मुख्य विशेषता / विवरण (Key Features / Summary)
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हाड़ौती क्षेत्र में शुरुआत: कोटा, बूंदी और झालावाड़ (हाड़ौती क्षेत्र) में राजनीतिक चेतना जागृत करने वाले शुरुआती संगठनों में बूंदी प्रजामंडल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
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सामंतशाही का विरोध: बूंदी रियासत में सामंतशाही और प्रशासन के कठोर नियमों के खिलाफ संघर्ष करने का श्रेय इसी प्रजामंडल को जाता है।