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कालीबाई भील उड़ान योजना

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सत्यापित: 17 September 2026
मुख्य बिंदु: कालीबाई भील उड़ान योजना (जिसे आमतौर पर उड़ान योजना भी कहा जाता है) राजस्थान सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग (महिला अधिकारिता निदेशालय) द्वारा संचालित एक प्रमुख जन-कल्याणकारी योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की बालिकाओं और महिलाओं में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और उन्हें निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराना है ताकि वे […]
कालीबाई भील उड़ान योजना (जिसे आमतौर पर उड़ान योजना भी कहा जाता है) राजस्थान सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग (महिला अधिकारिता निदेशालय) द्वारा संचालित एक प्रमुख जन-कल्याणकारी योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की बालिकाओं और महिलाओं में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और उन्हें निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराना है ताकि वे माहवारी (Menstrual Hygiene) से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात कर सकें और बेहतर स्वास्थ्य व स्वच्छता बनाए रख सकें।
इस योजना के संबंध में संपूर्ण और विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:

1. योजना का परिचय एवं मुख्य तिथियां

2. योजना के मुख्य उद्देश्य

  • किशोरियों और महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन के उपयोग के प्रति प्रोत्साहित करना तथा उनकी गरिमा, सुरक्षा और माहवारी से जुड़े विषयों पर जागरूक करना।
  • विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में (जहाँ सामाजिक संकोच या घूंघट प्रथा के कारण महिलाएं अपनी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं कर पातीं) माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (MHM) के प्रति अनुकूल वातावरण तैयार करना।
  • राजस्थान में बालिकाओं और महिलाओं के लिए सुरक्षित और निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सेनेटरी नैपकिन उत्पादन के लिए प्रशिक्षण, ऋण और वितरण से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।

3. पात्रता एवं योग्यता (Eligibility)

  • पात्र नागरिक: राजस्थान की समस्त बालिकाएं एवं महिलाएं।
  • आयु सीमा: सामान्यतः 10 से 45 वर्ष की आयु वर्ग की किशोरियां और महिलाएं।

4. सेनेटरी नैपकिन की मांग, आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था

योजना के तहत विभिन्न माध्यमों और संस्थानों के जरिए चरणबद्ध तरीके से सेनेटरी नैपकिन वितरित किए जाते हैं:
  1. राजकीय एवं निजी विद्यालय: माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) और निजी विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाओं को ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना’ (MNDY) के अंतर्गत विद्यालयों के माध्यम से सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाते हैं। शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों द्वारा मांग एकत्रित कर स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाती है।
  2. कॉलेज एवं विश्वविद्यालय: उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले राजकीय व निजी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नोडल केंद्रों के माध्यम से मांग भेजकर बालिकाओं को नैपकिन वितरित किए जाते हैं।
  3. जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग के विद्यालय/छात्रावास: संबंधित जिला परियोजना अधिकारियों के माध्यम से मांग प्रेषित कर यहाँ भी वितरण सुनिश्चित किया जाता है।
  4. आंगनवाड़ी केंद्र: जो बालिकाएं या महिलाएं किसी शिक्षण संस्थान से नहीं जुड़ी हैं, वे अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र से आशा सहयोगिनी / महिला पर्यवेक्षक के माध्यम से निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन प्राप्त कर सकती हैं।
  5. केंद्रीकृत आपूर्ति (RMSCL): राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) द्वारा गुणवत्तापूर्ण ‘Beltless Sanitary Napkins With Wings’ की खरीद और विभिन्न वितरण केंद्रों (आंगनवाड़ी, स्कूल आदि) तक आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।

5. स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की सहभागिता एवं उत्पादन

  • योजना के तहत स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार देने के लिए राजीविका (Rajeevika) और महिला अधिकारिता विभाग के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों या कलस्टर लेविल फेडरेशन (CLF) को सेनेटरी नैपकिन निर्माण इकाई (Unit) स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
  • समूहों को मशीनरी लगाने, प्रशिक्षण और ‘इंदिरा महिला उद्यम प्रोत्साहन योजना’ या अन्य माध्यमों से ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
  • इन समूहों द्वारा उत्पादित नैपकिन पर ‘अमृता’ ब्रांड लोगो का उपयोग किया जाता है, जिन्हें निर्धारित गुणवत्ता (जैसे- सोखने की क्षमता, आकार आदि) के मानकों पर तैयार किया जाता है।

6. प्रशिक्षण, क्षमतावर्धन और प्रचार-प्रसार

  • प्रशिक्षण: जमीनी स्तर पर कार्य करने वाली साथिनों, आशा सहयोगिनियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला पर्यवेक्षकों और मास्टर ट्रेनर्स के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
  • जागरूकता अभियान:
    • हर ग्राम पंचायत स्तर पर ‘चुप्पी तोड़ो दिवस’ (CTD) का आयोजन किया जाता है ताकि माहवारी से जुड़े संकोच को दूर किया जा सके।
    • नुक्कड़ नाटक, रेडियो जिंगल, पैफलेट्स, सोशल मीडिया और आईईसी (IEC) सामग्रियों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है।
    • विद्यालयों में छात्राओं और जिले स्तर पर किशोरियों को ब्रांड एम्बेसडर बनाकर जागरूकता फैलाई जाती है।

7. निगरानी, पर्यवेक्षण और मॉनिटरिंग (SOP & Committees)

  • योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और कालाबाजारी/गबन की रोकथाम के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और समय-समय पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
  • राज्य स्तरीय समिति: प्रमुख शासन सचिव (महिला एवं बाल विकास विभाग) की अध्यक्षता में राज्य स्तर पर निगरानी समिति गठित है।
  • जिला स्तरीय समिति: जिला कलक्टर के समग्र निर्देशन तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO जिला परिषद) व उप/सहायक निदेशक (महिला अधिकारिता) के संयोजन में जिला व ब्लॉक स्तर पर नियमित औचक निरीक्षण, भौतिक सत्यापन और फीडबैक लेने की व्यवस्था की गई है।
  • ई-औषधि पोर्टल: वितरण व्यवस्था और स्टॉक की रियल-टाइम ट्रैकिंग ई-औषधि पोर्टल तथा शाला दर्पण/पीसीटीएस पोर्टल्स के जरिए की जाती है।

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