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लाडो प्रोत्साहन योजना

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सत्यापित: 17 September 2026
मुख्य बिंदु: लाडो प्रोत्साहन योजना राजस्थान सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग (महिला अधिकारिता निदेशालय) द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में बालिकाओं के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना, उनके स्वास्थ्य और शैक्षणिक स्तर में सुधार करना तथा लिंग भेद को समाप्त करना है। इस […]
लाडो प्रोत्साहन योजना राजस्थान सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग (महिला अधिकारिता निदेशालय) द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में बालिकाओं के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना, उनके स्वास्थ्य और शैक्षणिक स्तर में सुधार करना तथा लिंग भेद को समाप्त करना है।
इस योजना के बारे में संपूर्ण और विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:

1. योजना का परिचय एवं मुख्य तिथियां

  • प्रारंभ तिथि: 01 अगस्त 2024 (सम्पूर्ण प्रदेश में लागू)
  • घोषणा का आधार: लेखानुदान घोषणा (2024-25) बिन्दु (34) तथा विधानसभा में मुख्यमंत्री महोदय द्वारा 12.03.2025 को की गई घोषणा।
  • संशोधन: शुरुआत में बालिका के जन्म पर 1 लाख रुपये का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर अब ₹1.50 लाख (1.50 लाख रुपये) कर दिया गया है।
  • योजना की अवधि: 252 माह
  • वित्त पोषण: राज्य सरकार द्वारा
  • योजना का प्रकार: व्यक्तिगत

2. योजना के मुख्य उद्देश्य

  • राज्य में बालिका के जन्म के प्रति सकारात्मक वातावरण और सोच तैयार करना।
  • बालिकाओं के पालन-पोषण, शिक्षण और स्वास्थ्य में होने वाले लिंग-भेद को रोकना।
  • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में कमी लाना तथा घटते शिशु लिंगानुपात में सुधार करना।
  • विद्यालयों में बालिकाओं का नामांकन और ठहराव (Retention) सुनिश्चित करना।
  • बालिकाओं की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करना और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं में कमी लाना।

3. पात्रता एवं योग्यता (Eligibility)

  • प्रसूता राजस्थान की मूल निवासी होनी चाहिए।
  • माता-पिता के पास आधार कार्ड एवं जन-आधार कार्ड अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
  • बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना (JSY) के लिए अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में होना चाहिए।
  • लाडो प्रोत्साहन योजना में तीसरी और आगे की किश्तों के लाभ के लिए संतान की संख्या की कोई सीमा का बंधन नहीं है। पूर्व में प्रथम दो किश्तों का लाभ ले चुकी सभी बालिकाएं इस योजना के तहत पात्र होंगी।

4. देय वित्तीय सहायता एवं किश्तों का विवरण

योजना के तहत कुल ₹1,50,000 (1.5 लाख रुपये) की राशि 077 किश्तों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर की जाती है:
क्र.सं. किश्त विवरण / चरण देय राशि (रु.)
1 पात्र चिकित्सा संस्थानों में बालिका के जन्म पर (संकल्प पत्र के साथ) ₹2,500
2 बालिका के 9 से 12 माह तक के समस्त टीकाकरण पूर्ण होने और पीसीटीएस पोर्टल पर ऑटो अपडेशन होने पर ₹2,500
3 राजकीय या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में कक्षा 1 में प्रवेश लेने पर ₹4,000
4 राजकीय या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर ₹5,000
5 राजकीय या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में कक्षा 10 में प्रवेश लेने पर ₹11,000
6 राजकीय या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में कक्षा 12 में प्रवेश लेने पर ₹25,000
7 सरकार से मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने एवं 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर ₹1,00,000
कुल योग ₹1,50,000
  • खाता वितरण नियम: बालिका के व्यस्क होने तक पहली से छठी किश्त तक की राशि माता-पिता / अभिभावक / पालनहार के बैंक खाते में भेजी जाती है, जबकि सातवीं और अंतिम किश्त सीधे बालिका के बैंक खाते में भेजी जाती है।
  • राजश्री योजना का समायोजन: पुरानी राजश्री योजना को इस योजना में समाहित कर दिया गया है, और राजश्री योजना की आगामी किश्तों का लाभ पात्रतानुसार इसी योजना के तहत देय होगा।

5. आवेदन प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेज

  • आवेदन: योजना के लिए आवेदन निःशुल्क है। प्रथम दो किश्तों के लिए लाभार्थी को अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती; यह चिकित्सा विभाग के पोर्टल के माध्यम से ऑटो-मोड पर प्रोसेस होता है।
  • अनिवार्य दस्तावेज:
    • बैंक पासबुक की प्रति
    • जन-आधार कार्ड / भामाशाह कार्ड की प्रति
    • आधार कार्ड

6. क्रियान्वयन एवं ट्रैकिंग प्रक्रिया (Departments Involved)

  • यूनिक आईडी / पीसीटीएस आईडी: जन्म के समय ही चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा प्रत्येक बालिका को ट्रैक करने के लिए एक यूनिक आईडी / पीसीटीएस आईडी जारी की जाती है।
  • विभागीय उत्तरदायित्व:
    • प्रथम दो किश्तें: चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा (ओजस/पीसीटीएस पोर्टल के माध्यम से)।
    • तीसरी से छठी किश्त: शिक्षा विभाग द्वारा (शाला दर्पण पोर्टल, APAAR ID, जन-आधार आदि के जरिए ऑनलाइन ट्रैक कर)।
    • सातवीं किश्त: उच्च शिक्षा विभाग द्वारा (स्नातक उत्तीर्ण करने और 21 वर्ष की आयु होने पर)।
    • बजट हस्तांतरण: महिला अधिकारिता निदेशालय द्वारा संबंधित विभागों को बजट आवंटित किया जाता है।

7. पर्यवेक्षण और मॉनिटरिंग

  • प्रशासनिक विभाग: निदेशालय महिला अधिकारिता, महिला एवं बाल विकास विभाग।
  • जिला स्तरीय समीक्षा: संबंधित जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हर 3 महीने में एक बार ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना की जिला टास्क फोर्स द्वारा इसकी समीक्षा की जाती है।
  • पोर्टल: DoIT द्वारा एक विशेष पोर्टल बनाया गया है जिसमें PCTS, ओजस और शाला दर्पण के डाटा को एकीकृत (Integrate) किया गया है ताकि रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सके।

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