मुख्य बिंदु: कूदण हत्याकांड शेखावाटी (सीकर) किसान आंदोलन का सबसे प्रमुख और निर्णायक मोड़ था। यह राजस्थान के उन विरले किसान आंदोलनों में शामिल है जिसकी गूंज भारत की सीमाओं को पार कर लंदन स्थित ब्रिटिश संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ (House of Commons) में सुनाई दी थी। 1. पृष्ठभूमि व संदर्भ संबंधित आंदोलन: सीकर […]
कूदण हत्याकांड शेखावाटी (सीकर) किसान आंदोलन का सबसे प्रमुख और निर्णायक मोड़ था। यह राजस्थान के उन विरले किसान आंदोलनों में शामिल है जिसकी गूंज भारत की सीमाओं को पार कर लंदन स्थित ब्रिटिश संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ (House of Commons) में सुनाई दी थी।
1. पृष्ठभूमि व संदर्भ
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संबंधित आंदोलन: सीकर / शेखावाटी किसान आंदोलन (1922 – 1947 ई.)।
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ठिकाना व रियासत: सीकर ठिकाना, जयपुर रियासत।
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तत्कालीन शासक: सीकर के रावराजा कल्याण सिंह।
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आंदोलनकारी समुदाय: मुख्य रूप से जाट किसान।
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तनाव का मूल कारण:
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1934 के कटराथल महिला सम्मेलन और जाट प्रजापति महायज्ञ के बाद क्षेत्र के किसानों में आत्मसम्मान और चेतना चरम पर थी।
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किसानों ने रावराजा कल्याण सिंह द्वारा बढ़ाए गए अवैध उपकरों (लाग-बाग) और भू-राजस्व (लगान) को देने से पूरी तरह मना कर दिया था (कर-बंदी आंदोलन)।
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2. कूदण हत्याकांड का घटनाक्रम (25 अप्रैल 1935 ई.)
(क) पुलिस बल का आगमन व ‘धापी दादी’ की ललकार:
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सटीक तिथि: 25 अप्रैल 1935 ई. (ध्यान दें: 25 अप्रैल 1934 को कटराथल सम्मेलन हुआ था, उसके ठीक 1 वर्ष बाद उसी तिथि पर कूदण कांड हुआ)।
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स्थान: कूदण गाँव (सीकर)।
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ब्रिटिश पुलिस अधिकारी: सीकर ठिकाने के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कैप्टन वेब (Captain E.C. Webb) भारी सशस्त्र पुलिस बल के साथ जबरन लगान वसूलने कूदण गाँव पहुँचा।
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धापी दादी की भूमिका: जब पुलिस दल ग्रामीणों को डरा-धमका रहा था, तब गाँव की एक साहसी वयोवृद्ध महिला धापी दादी ने सीना तानकर किसानों को ललकारा और खुलेआम घोषणा की: “चाहे प्राण चले जाएं, पर एक पाई भी लगान नहीं देना है।” धापी दादी की इस पुकार पर पूरा गाँव लामबंद हो गया।
(ख) कैप्टन वेब की बर्बर गोलीबारी:
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किसानों के अडिग विरोध को देखकर कैप्टन वेब आपा खो बैठा।
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उसने बिना किसी वैधानिक पूर्व चेतावनी के निहत्थे ग्रामीणों पर गोलियाँ चलाने का आदेश दे दिया।
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पुलिस ने गाँव के घरों में घुसकर बर्बर लाठीचार्ज किया, महिलाओं व बच्चों को पीटा और सामान लूटा।
(ग) अमर शहीद एवं हताहत:
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इस निर्मम गोलीबारी में मौके पर ही 4 निर्भीक किसान शहीद हुए:
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चेतराम
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टीकूराम
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तुलछाराम
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आशाराम
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लगभग 175 से अधिक ग्रामीण घायल हुए और दर्जनों किसानों को संगीनों के साए में गिरफ्तार कर सीकर जेल में ठूँस दिया गया।
3. राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया (ब्रिटिश संसद में गूँज)
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ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) में प्रश्न:
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ब्रिटिश लेबर पार्टी के प्रसिद्ध सांसद सर पैथिक लॉरेंस (Sir Pethick-Lawrence) ने कूदण गोलीबारी और सीकर के किसानों पर हो रहे बर्बर सामंती अत्याचारों का मुद्दा सीधे ब्रिटिश संसद के ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में उठाया।
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उन्होंने ब्रिटिश सरकार से जवाब मांगा कि रियासती प्रशासन निहत्थे भारतीय काश्तकारों पर इस प्रकार की बर्बरता क्यों कर रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय समाचार-पत्र:
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लंदन से प्रकाशित होने वाले प्रसिद्ध समाचार-पत्र ‘डेली हेराल्ड’ (Daily Herald) ने कूदण हत्याकांड पर तीखे संपादकीय छापे, जिससे ब्रिटिश सरकार की वैश्विक स्तर पर भारी किरकिरी हुई।
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राष्ट्रीय नेताओं का दखल:
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सर छोटूराम (पंजाब के प्रसिद्ध किसान मसीहा) और चौधरी चरण सिंह ने सीकर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया और किसानों को संगठित किया।
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जमनालाल बजाज और हीरालाल शास्त्री (जयपुर प्रजामंडल) ने भी रियासत पर कड़ा दबाव बनाया।
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4. आंदोलन का परिणाम व समझौता
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ब्रिटिश संसद में मामला उठने और जयपुर रियासत की बदनामी के कारण वायसराय और जयपुर सरकार ने हस्तक्षेप किया।
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राज्य ने कैप्टन वेब की मनमानी पर रोक लगाई और 1935 के अंत में एक अंतरिम समझौता हुआ:
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बढ़ी हुई लगान दरों में भारी कटौती की गई।
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अधिकांश अनावश्यक लाग-बागें समाप्त की गईं।
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गिरफ्तार किसानों को रिहा किया गया और उन्हें भूमि के प्राथमिक अधिकार दिए गए।
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5. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Table)
| प्रमुख बिंदु | परीक्षा उपयोगी तथ्य |
| सटीक तिथि | 25 अप्रैल 1935 ई. |
| स्थान | कूदण गाँव (सीकर) |
| संबंधित आंदोलन | सीकर / शेखावाटी किसान आंदोलन |
| गोलीबारी करने वाला पुलिस अधिकारी | कैप्टन वेब (Captain Webb) |
| किसानों को प्रेरित करने वाली वीरांगना | धापी दादी (लगान न देने का आह्वान किया) |
| कूदण के 4 अमर शहीद | चेतराम, टीकूराम, तुलछाराम, आशाराम |
| ब्रिटिश संसद में मुद्दा उठाने वाले सांसद | सर पैथिक लॉरेंस (‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में) |
| चर्चित विदेशी समाचार पत्र | ‘डेली हेराल्ड’ (लंदन) |
| राष्ट्रीय किसान नेता जिन्होंने सहयोग दिया | सर छोटूराम और ठाकुर देशराज |