प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

जैत्रसिंह (जयसिंह)

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सत्यापित: 01 September 2026
मुख्य बिंदु: 1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक तथ्य रणथंभौर (रणस्तंभपुर) के चाहमान (चौहान) राजवंश के 13वीं शताब्दी के शासकों में जैत्रसिंह (शिलालेखों एवं साहित्य में ‘जयसिंह’ अथवा ‘जैत्रसिंह देव’) का स्थान एक अत्यंत पराक्रमी, दीर्घकालिक एवं न्यायप्रिय शासक के रूप में दर्ज है। ये प्रसिद्ध चौहान वीर हम्मीरदेव चौहान के पिता थे। समय काल: 1253–1282 ईस्वी (लगभग […]
1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक तथ्य
रणथंभौर (रणस्तंभपुर) के चाहमान (चौहान) राजवंश के 13वीं शताब्दी के शासकों में जैत्रसिंह (शिलालेखों एवं साहित्य में ‘जयसिंह’ अथवा ‘जैत्रसिंह देव’) का स्थान एक अत्यंत पराक्रमी, दीर्घकालिक एवं न्यायप्रिय शासक के रूप में दर्ज है। ये प्रसिद्ध चौहान वीर हम्मीरदेव चौहान के पिता थे।
  • समय काल: 1253–1282 ईस्वी (लगभग 32 वर्षों का दीर्घकालिक एवं स्थिर शासनकाल)।
  • वंशावलीगत स्थिति:
    • हम्मीर महाकाव्य एवं बालकृष्ण रचित हम्मीर रासो के अनुसार, ये रणथंभौर के पुनरुद्धारक वाग्भट्ट (‘बाहुबली’) के पुत्र एवं उत्तराधिकारी थे।
    • महारानी: हीरादेवी (हम्मीरदेव की माता)।
    • इनके तीन प्रमुख पुत्र हुए:
      1. सूरथ्राण (सूरतसिंह)
      2. वीरम (वीरमदेव)
      3. हम्मीरदेव (हम्मीर) — सबसे योग्य एवं पराक्रमी पुत्र।
  • दिल्ली सल्तनत (नासिरुद्दीन महमूद एवं बलबन) से सफल संघर्ष:
    • जैत्रसिंह के समय दिल्ली सल्तनत ने रणथंभौर को अपने अधीन करने के लिए कई सैन्य अभियान भेजे।
    • सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद और उसके शक्तिशाली नायब गयासुद्दीन बलबन (1259 ईस्वी) द्वारा भेजी गई शाही सेनाओं को जैत्रसिंह ने रणथंभौर के दुर्गम मार्गों व घाटी नाकों पर बुरी तरह पराजित कर खदेड़ दिया।
  • मालवा, मांडलगढ़ व आसपास के क्षेत्रों पर आधिपत्य:
    • इन्होंने अपनी सीमाओं का विस्तार करते हुए मालवा के परमारों, मांडलगढ़ (मेवाड़ सीमांत) और चंबल घाटी के सरदारों से नियमित कर (खिराज) वसूल किया।
  • जीवित रहते योग्य पुत्र हम्मीरदेव का राज्याभिषेक (1282 ईस्वी):
    • अपने 32 वर्षों के सफल शासन के उपरांत, वृद्धावस्था में जैत्रसिंह ने ज्येष्ठता के बजाय योग्यता को प्राथमिकता दी और 1282 ई. में अपने सबसे वीर पुत्र हम्मीरदेव चौहान का राज्याभिषेक कर सत्ता उन्हें सौंप दी।
2. 32 खंभों की छतरी (न्याय की छतरी) — रणथंभौर दुर्ग
जैत्रसिंह के 32 वर्षों के शासनकाल और उनके न्यायप्रिय चरित्र की स्मृति में निर्मित यह स्मारक राजस्थान के स्थापत्य का एक अद्वितीय उदाहरण है:
  • निर्माता: पुत्र हम्मीरदेव चौहान द्वारा अपने पिता जैत्रसिंह के 32 वर्षों के शासनकाल की स्मृति में निर्मित।
  • अवस्थिति एवं स्थापत्य विशेषताएँ:
    • रणथंभौर दुर्ग (सवाई माधोपुर) के भीतर स्थित।
    • यह छतरी लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) से निर्मित 50 फीट ऊँची द्वि-तलीय इमारत है, जो 32 सुसज्जित पाषाण स्तंभों पर टिकी है।
    • छतरी के मुख्य गुंबद के ठीक नीचे एक शिवलिंग स्थापित है, जहाँ बैठकर हम्मीरदेव अपने आराध्य भगवान शिव की आराधना करते थे।
  • ‘न्याय की छतरी’ नामकरण:
    • जनश्रुति और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, राजा हम्मीरदेव इसी छतरी के नीचे बैठकर अपनी प्रजा की फरियाद सुनते थे और न्याय (फैसले) किया करते थे, जिसके कारण इसे राजस्थान के इतिहास में ‘न्याय की छतरी’ कहा जाता है।
विशेष तुलनात्मक नोट (राजस्थान में 32 खंभों की अन्य प्रमुख छतरी — परीक्षा भ्रम निवारण):
  • रणथंभौर दुर्ग (सवाई माधोपुर): जैत्रसिंह की छतरी (निर्माता: हम्मीरदेव चौहान, उपनाम: न्याय की छतरी)।
  • मांडलगढ़ (भीलवाड़ा): राणा सांगा की 32 खंभों की छतरी (निर्माता: जगनेर के अशोक परमार)।
  • बदनोर (भीलवाड़ा): जोधराज की 32 खंभों की छतरी।
3. प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत, रचनाएँ एवं रचनाकार
जैत्रसिंह के शासन, बलबन से संघर्ष और छतरी निर्माण के संदर्भ:
स्रोत / ग्रंथ रचनाकार / रचयिता भाषा / विधा मुख्य परीक्षा उपयोगी विवरण
हम्मीर महाकाव्य नयनचंद्र सूरि संस्कृत (महाकाव्य) सर्वप्रमुख स्रोत। वाग्भट्ट के बाद जैत्रसिंह का 32 वर्षीय शासन, बलबन के हमलों की विफलता, पुत्र हम्मीरदेव को राज्य सौंपना और धार्मिक निष्ठा का विशद वर्णन।
हम्मीर रासो जोधराज (तथा सारंगधर / महेश) पिंगल / डिंगल जैत्रसिंह के पराक्रम, हम्मीर के जन्म और राज्यारोहण का विस्तृत आख्यान।
हम्मीरायण भांडव व्यास प्राकृत / प्राचीन राजस्थानी रणथंभौर के चौहान वंशानुक्रम और जैत्रसिंह के शौर्य का ऐतिहासिक निरूपण।
तबकात-ए-नासिरी मिनहाज-उस-सिराज फारसी (इतिहास) बलबन और नासिरुद्दीन महमूद के काल में रणथंभौर के विरुद्ध असफल तुर्क अभियानों का उल्लेख।
अर्ली चौहान डायनेस्टीज डॉ. दशरथ शर्मा शोध ग्रंथ (इतिहास) राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा समर्थित; जैत्रसिंह (Jaitrasimha) के 1253–1282 ई. कालक्रम और 32 खंभों की छतरी का प्रामाणिक विश्लेषण।
4. परीक्षा उपयोगी स्मरणीय बिंदु एवं संभावित प्रश्न
त्वरित स्मरणीय बिंदु:
  • शासनकाल: 1253–1282 ईस्वी (32 वर्ष)।
  • पिता: वाग्भट्ट (‘बाहुबली’) | महारानी: हीरादेवी।
  • पुत्र: हम्मीरदेव चौहान, वीरमदेव, सूरतसिंह।
  • 32 खंभों की छतरी (न्याय की छतरी): रणथंभौर दुर्ग में, निर्माता: हम्मीरदेव चौहान (जैत्रसिंह के 32 वर्ष शासन की याद में)।
  • दिल्ली सुल्तान जिनका प्रतिरोध किया: नासिरुद्दीन महमूद एवं गयासुद्दीन बलबन।
  • वंशावली क्रम: गोविन्दराज ➔ वाल्हण ➔ प्रह्लादन ➔ वीरनारायण ➔ वाग्भट्ट ➔ जैत्रसिंह (1253–1282 ई.) ➔ हम्मीरदेव चौहान (1282–1301 ई.)।

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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