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सवाई माधोपुर जिला: ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य

राजस्थान जिला दर्शन (District GK), सवाई माधोपुर पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 01 September 2026
मुख्य बिंदु: सवाई माधोपुर जिले (रणथंभौर अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: बाघों का घर (Land of Tigers), हम्मीर देव की आन-बान-शान की भूमि, अमरूद नगरी (Guava City)। स्थापना: 19 जनवरी 1763 को जयपुर के कछवाहा शासक सवाई माधोसिंह प्रथम द्वारा बसाया […]
सवाई माधोपुर जिले (रणथंभौर अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:

1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य

  • उपनाम: बाघों का घर (Land of Tigers), हम्मीर देव की आन-बान-शान की भूमि, अमरूद नगरी (Guava City)।
  • स्थापना: 19 जनवरी 1763 को जयपुर के कछवाहा शासक सवाई माधोसिंह प्रथम द्वारा बसाया गया।
  • भौगोलिक स्थिति व संगम:
    • अरावली और विंध्याचल पर्वतमालाओं का मिलन स्थल (ग्रेट बाउंड्री फॉल्ट – GBF)।
    • रामेश्वरम घाट (पदरा गाँव): बनास, चंबल और सीप नदियों का प्रसिद्ध त्रिवेणी संगम (इसे ‘मीणों का प्रयागराज’ कहा जाता है)।
  • प्रमुख नदियाँ व जलस्रोत:
    • नदियाँ: चंबल, बनास, मोरेल, गंभीर, सीप।
    • झीलें/तालाब (रणथंभौर क्षेत्र): पद्म तालाब, राजबाग झील, मलिक तालाब, मानसरोवर झील, सूरवाल झील, मोरेल बांध।
  • कृषि उत्पाद: लाल व सफेद अमरूद की पैदावार हेतु पूरे देश में प्रसिद्ध (अमरूद उत्कृष्टता केंद्र – देवड़ावास)।

2. राजवंश एवं प्रमुख शासक

  • रणथंभौर के चौहान (1194–1301 ई.):
    • गोविंदराज चौहान (1194 ई.): तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद पृथ्वीराज चौहान तृतीय के पुत्र, जिन्होंने रणथंभौर में चौहान वंश की स्वतंत्र नींव रखी।
    • वीरनारायण चौहान: इल्तुतमिश के आक्रमण का सामना किया।
    • वाग्भट्ट चौहान: बलबन और रजिया सुल्तान की सेनाओं को विफल किया।
    • जैत्रसिंह (जयसिंह): 32 वर्षों तक शासन किया (इनकी स्मृति में हम्मीर ने 32 खंभों की छतरी बनवाई)।
    • राव हम्मीर देव चौहान (1282–1301 ई.): ‘हठी हम्मीर’ के नाम से विख्यात; कुल 17 में से 16 युद्धों के विजेता; शरणागत की रक्षा हेतु अलाउद्दीन खिलजी से लोहा लिया।
  • हम्मीर हठ की प्रसिद्ध लोकोक्ति:
    “सिंह गमन सत्पुरुष वचन, कदली फलत इक बार। तिरिया तेल हम्मीर हठ, चढ़े न दूजी बार॥”

3. रणथंभौर का ऐतिहासिक साका (11 जुलाई 1301) — ‘राजस्थान का प्रथम साका’

  • आक्रमणकारी: दिल्ली का सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी (सेनापति: उलुग खां, नुसरत खां – जो मारा गया)।
  • कारण: खिलजी के विद्रोही मुग़ल सेनापति मीर मुहम्मद शाह व केहब्रू को हम्मीर द्वारा शरण देना।
  • विश्वासघात: हम्मीर के सेनापति रणमल व रतिपाल खिलजी से मिल गए।
  • साका व जल जौहर:
    • हम्मीर देव चौहान लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए (केसरिया हुआ)।
    • हम्मीर की रानी रंगादेवी और पुत्री पद्मला (देवलदे) ने पद्म तालाब में कूदकर जल जौहर किया (राजस्थान के इतिहास का प्रथम साका एवं एकमात्र प्रमाणित जल जौहर)।
  • अमीर खुसरो का कथन: दुर्ग विजय के बाद खिलजी के दरबारी कवि अमीर खुसरो ने लिखा: “आज कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया।”

4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य

स्मारक / स्थल निर्माता प्रमुख विशेषता
रणथंभौर दुर्ग (रणस्तंभपुर) रणथान देव / चौहान शासक (8वीं-10वीं सदी) थंभ और रण की 7 पहाड़ियों से घिरा गिरि व वन (एरण) दुर्ग। अबुल फजल का प्रसिद्ध कथन: “अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, परंतु यह बख्तरबंद है।” यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल (2013)।
त्रिनेत्र गणेश मंदिर हम्मीर देव चौहान काल रणथंभौर दुर्ग में स्थित; भारत का एकमात्र मंदिर जहाँ भगवान गणेश जी के तीन नेत्र हैं और वे संपूर्ण परिवार (रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ) के साथ विराजमान हैं। विवाह का पहला निमंत्रण पत्र यहीं भेजा जाता है।
32 खंभों की छतरी हम्मीर देव चौहान अपने पिता जैत्रसिंह के 32 वर्षों के शासनकाल की स्मृति में निर्मित; इसे ‘न्याय की छतरी’ भी कहा जाता है (जहाँ बैठकर हम्मीर न्याय करते थे)।
जोगी महल जयपुर राजपरिवार पदम तालाब के किनारे स्थित ऐतिहासिक विश्राम गृह; इसके निकट भारत का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़ है।
सुपारी महल हम्मीर काल राजस्थान का एकमात्र ऐसा भवन जहाँ मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर (Church) तीनों का समन्वय देखने को मिलता है।
पीर सदरुद्दीन की दरगाह मध्यकालीन सूफी स्थल रणथंभौर दुर्ग परिसर में स्थित प्रसिद्ध दरगाह।
खंडार का किला सामरिक दुर्ग ‘तारागढ़’ की तर्ज पर निर्मित; इसे ‘बाघों का दुर्ग’ भी कहते हैं। इसमें प्रसिद्ध ‘शारदा तोप’ रखी है।

5. रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व

  • स्थापना व स्थिति:
    • 1955 में वन्यजीव अभयारण्य।
    • 1973-74: ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत राजस्थान का पहला टाइगर रिजर्व घोषित।
    • 1 नवंबर 1980: राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान (National Park) बना।
  • विशेषता:
    • विश्व विख्यात बाघिन ‘मछली’ (T-16 / Lady of the Lakes / Crocodile Killer) की ऐतिहासिक कर्मस्थली (विश्व में सर्वाधिक फोटो खींची जाने वाली बाघिन)।
    • ‘लैंड ऑफ द टाइगर्स’ — दिन के उजाले में खुले में बाघ देखने का भारत का सर्वश्रेष्ठ स्थल।

6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ

  • घुश्मेश्वर महादेव (शिवाड़):
    • द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से 12वाँ ज्योतिर्लिंग माना जाता है; महाशिवरात्रि पर विशाल लक्खी मेला भरता है।
  • चौथ माता मंदिर (चौथ का बरवाड़ा):
    • अरावली पर्वत की चोटी पर स्थित कंजर व मीणा समुदाय की कुलदेवी।
    • मेला: प्रतिवर्ष माघ कृष्ण चतुर्थी (तिल चौथ/संकट चौथ) को विशाल लक्खी मेला भरता है।
  • कमलेश्वर महादेव (इंद्रगढ़ सीमा): विंध्याचल की पहाड़ियों में स्थित प्राचीन शिवालय।
  • धुंधेश्वर महादेव: प्राकृतिक कंदराओं और जलकुंडों से युक्त सुरम्य तीर्थ।

7. कला, संस्कृति, हस्तशिल्प एवं लोक विधाएं

  • खस का इत्र (Khas Perfume): सवाई माधोपुर और भरतपुर में पाई जाने वाली प्राकृतिक सुगंधित ‘खस’ घास से इत्र तैयार किया जाता है।
  • कन्हैया दंगल व पद गायन: डांग व ढूंढाड़ सीमावर्ती अंचल का प्रसिद्ध लोकनाट्य व गायन।
  • खस व बांस के उत्पाद: पंखे, पर्दे, आसन और टोकनियों का निर्माण।
  • मीणा जनजाति की संस्कृति: सवाई माधोपुर क्षेत्र मीणा समुदाय की बहुलता और उनकी ‘मोरनी मांडणा’ भित्ति मांडना कला हेतु विख्यात है।

8. प्रमुख साहित्यकार एवं ऐतिहासिक ग्रंथ

  • नयनचंद्र सूरी: जैन विद्वान; प्रसिद्ध महाकाव्य ‘हम्मीर महाकाव्य’ के रचयिता।
  • जोधराज / सारंगधर: ग्रंथ: ‘हम्मीर रासो’।
  • चंद्रशेखर: ग्रंथ: ‘हम्मीर हठ’ एवं ‘सुरजन चरित’।
  • जयसिंह सूरी: ग्रंथ: ‘हम्मीर मदमर्दन’।
  • अमीर खुसरो: ग्रंथ: खजाइन-उल-फुतुह (तारीख-ए-अलाई – जिसमें 1301 के युद्ध का सजीव विवरण है)।

9. स्वतंत्रता संग्राम एवं प्रजामंडल आंदोलन

  • जयपुर प्रजामंडल का प्रभाव: सवाई माधोपुर जयपुर रियासत का निजामत क्षेत्र था; अतः हीरालाल शास्त्री और कपूरचंद पाटनी के आंदोलनों का सीधा केंद्र रहा।
  • मीणा क्षेत्रीय सभा (1933): बामनवास व सवाई माधोपुर क्षेत्र में ‘जरायम पेशा कानून’ (Criminal Tribes Act) के विरोध में जनजागरण।
  • राजस्थान एकीकरण (30 मार्च 1949): चतुर्थ चरण (वृहत् राजस्थान) में जयपुर रियासत के साथ सवाई माधोपुर का राजस्थान में पूर्ण विलय हुआ।

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