मुख्य बिंदु: अजमेर जिले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: राजस्थान का हृदय, भारत का मक्का, मदीना-ए-हिंद, अरावली का अरमान, अंडों की टोकरी, सांप्रदायिक सौहार्द का संगम स्थल। स्थापना: 1113 ई. में चौहान शासक अजयराज चौहान द्वारा (प्राचीन नाम: अजयमेरु)। एकीकरण स्थिति: स्वतंत्रता […]
अजमेर जिले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
- उपनाम: राजस्थान का हृदय, भारत का मक्का, मदीना-ए-हिंद, अरावली का अरमान, अंडों की टोकरी, सांप्रदायिक सौहार्द का संगम स्थल।
- स्थापना: 1113 ई. में चौहान शासक अजयराज चौहान द्वारा (प्राचीन नाम: अजयमेरु)।
- एकीकरण स्थिति: स्वतंत्रता के बाद अजमेर-मेरवाड़ा केंद्र शासित प्रदेश (‘C’ श्रेणी का राज्य) था, जिसका राजस्थान में विलय 7वें चरण में 1 नवंबर 1956 को हुआ (हरिभाऊ उपाध्याय इसके एकमात्र मुख्यमंत्री थे और धारा सभा में 30 सदस्य थे)।
- भौगोलिक स्थिति व जलस्रोत:
- पहाड़ियाँ: नाग पहाड़ (अजमेर व पुष्कर के मध्य, सर्पिलाकार), बीठली पहाड़ी (जिस पर तारागढ़ दुर्ग बना है)।
- नदियाँ: लूनी नदी (उद्गम: नाग पहाड़, प्रारंभिक नाम: सागरमती), रूपनगढ़ नदी (सांभर झील में गिरती है)।
- झीलें:
- आनासागर झील: 1137 ई. में अर्णोराज (आनाजी) द्वारा तुर्कों के रक्त से सनी भूमि को साफ करने हेतु चंद्रा नदी के जल को रोककर निर्मित।
- पुष्कर झील: प्राकृतिक मीठे पानी की अर्द्धचंद्राकार झील; 52 घाट स्थित हैं (सबसे बड़ा घाट: गौ घाट; गांधी घाट जहाँ महात्मा गांधी की अस्थियां विसर्जित की गईं)।
- फायसागर झील: 1891-92 में अंग्रेज इंजीनियर मि. फाय के निर्देशन में अकाल राहत कार्य के तहत बांडी नदी के पानी को रोककर निर्मित।
2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
- राजवंश: शाकंभरी/सपादलक्ष के चौहान (चाहमान) वंश की प्रमुख शाखा।
- कुलदेवी: शाकंभरी माता (सांभर) एवं जीण माता।
- प्रमुख शासक व योगदान:
- अजयराज चौहान (1113 ई.): अजमेर नगर बसाया, तारागढ़ दुर्ग बनवाया और चांदी के सिक्के (‘श्री अजयदेव’ और रानी ‘सोमलदेवी’ के नाम से) चलाए।
- अर्णोराज (आनाजी): आनासागर झील का निर्माण कराया; पुष्कर में प्रसिद्ध वराह मंदिर का निर्माण कराया।
- विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव / कवि बांधव): चौहानों का स्वर्णकाल; प्रसिद्ध संस्कृत नाटक ‘हरकेलि’ की रचना की; अजमेर में एक संस्कृत पाठशाला (सरस्वती कंठाभरण) बनवाई, जिसे बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने ‘ढाई दिन का झोपड़ा’ में तब्दील कर दिया। बीसलपुर बांध/कस्बा बसाया।
- पृथ्वीराज चौहान तृतीय (राय पिथौरा / दलपंगुल, 1177–1192 ई.): तराइन के प्रथम युद्ध (1191 ई.) में मुहम्मद गौरी को पराजित किया; तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में पराजित हुए; इनके दरबारी कवि चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो) और जयानक (पृथ्वीराज विजय) थे।
3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं ऐतिहासिक स्थल
- पुष्कर क्षेत्र: पुरापाषाण काल के सूक्ष्म पाषाण उपकरण प्राप्त हुए हैं।
- तिलोरा एवं बूढ़ा पुष्कर: प्राचीन पुरातात्विक अवशेष और प्रागैतिहासिक बस्तियों के साक्ष्य।
4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| तारागढ़ दुर्ग (अजयमेरु दुर्ग) | अजयराज चौहान (1113 ई.) | बीठली पहाड़ी पर स्थित; इसे ‘गढ़ बीठली’, ‘राजस्थान का जिब्राल्टर’ (बिशप हेबर द्वारा) और ‘अरावली का अरमान’ कहा जाता है। मेवाड़ के राजकुमार पृथ्वीराज सिसोदिया (उड़ना राजकुमार) ने अपनी पत्नी ‘तारा’ के नाम पर इसका नाम तारागढ़ रखा। मीरां साहब की दरगाह और घोड़े की मजार यहीं स्थित है। |
| मैगजीन दुर्ग (अकबर का दौलतखाना) | मुग़ल सम्राट अकबर (1570 ई.) | राजस्थान का एकमात्र दुर्ग जो पूर्णतः मुस्लिम दुर्ग निर्माण पद्धति पर बना है। 10 जनवरी 1616 को इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के राजदूत सर टॉमस रो ने जहाँगीर से यहीं भेंट कर भारत में व्यापार की अनुमति प्राप्त की थी। 1857 की क्रांति में अंग्रेजों का शस्त्रागार (मैगजीन) था। |
| ढाई दिन का झोपड़ा | कुतुबुद्दीन ऐबक (1198 ई. में परिवर्तित) | विग्रहराज चतुर्थ की संस्कृत पाठशाला को तोड़कर बनाई गई राजस्थान की पहली मस्जिद; 16 खंभों का महल; यहाँ पंजाब शाह सूफी संत का ढाई दिन का उर्स लगता है। जॉन मार्शल ने इसके स्थापत्य की प्रशंसा की। |
| दौलत बाग (सुभाष उद्यान) | मुग़ल सम्राट जहाँगीर | आनासागर झील के किनारे निर्मित; यहीं नूरजहाँ की माँ अस्मत बेगम ने गुलाब के इत्र का आविष्कार किया था। |
| बारादरी | मुग़ल सम्राट शाहजहाँ | आनासागर की पाल पर संगमरमर के 5 आकर्षक मंडप (बारादरी)। |
| सोनी जी की नसियां (लाल मंदिर) | सेठ मूलचंद व टीकमचंद सोनी (1865 ई.) | प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) को समर्पित; इसके आंतरिक भाग को ‘स्वर्ण नगरी’ कहा जाता है जिसमें अयोध्या का समवशरण दर्शाया गया है। |
5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध एवं घटनाएँ
- तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): पृथ्वीराज चौहान तृतीय ने मुहम्मद गौरी को बुरी तरह पराजित किया।
- तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.): मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान तृतीय को पराजित कर भारत में मुस्लिम सत्ता की नींव रखी।
- दौराई का युद्ध (1659 ई., अजमेर): औरंगजेब और दारा शिकोह के बीच मुग़ल उत्तराधिकार का अंतिम व निर्णायक युद्ध; औरंगजेब विजयी रहा।
- ईस्ट इंडिया कंपनी का कूटनीतिक केंद्र: 1832 में लॉर्ड विलियम बेंटिक ने अजमेर में ‘राजपूताना रेजिडेंसी’ की स्थापना की (प्रथम A.G.G. – मिस्टर लोकेट; मुख्यालय बाद में माउंट आबू स्थानांतरित)।
6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं सूफी परंपरा
- ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह:
- भारत में चिश्ती सिलसिले के संस्थापक; 1192 ई. में मुहम्मद गौरी के समय संजर (ईरान) से अजमेर आए।
- उपाधि: ‘गरीब नवाज’ और ‘सुल्तान-उल-हिंद’।
- दरगाह का निर्माण: इल्तुतमिश द्वारा शुरू, गियासुद्दीन खिलजी द्वारा पक्का गुंबद निर्मित।
- उर्स: प्रतिवर्ष रजब माह की 1 से 6 तारीख तक भरता है (भीलवाड़ा का गौरी परिवार झंडा फहराकर उर्स की शुरुआत करता है)।
- अकबर द्वारा भेंट की गई ‘बड़ी देग’ और जहाँगीर द्वारा भेंट की गई ‘छोटी देग’ (विशाल कड़ाहे) यहीं स्थित हैं।
- जगतपिता ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर):
- विश्व का सबसे प्रसिद्ध और विधिवत पूजा जाने वाला ब्रह्मा मंदिर; वर्तमान स्वरूप गोकुलचंद पारेख ने दिया।
- यहाँ कार्तिक पूर्णिमा को विशाल रंग-बिरंगा पुष्कर मेला (ऊंटों का प्रसिद्ध व्यापार मेला व दीपदान उत्सव) भरता है।
- पास में ही सावित्री माता मंदिर (रत्नागिरी पहाड़ी पर, जहाँ राज्य का तीसरा रोपवे संचालित है) और रंगनाथ जी का मंदिर (द्रविड़ शैली) स्थित हैं।
- लोकदेवता तेजाजी महाराज (सुरसुरा व भावंता):
- अजमेर का प्रमुख लोकदेवता केंद्र; सुरसुरा में नाग के डसने से वीरगति प्राप्त हुई; भावंता (सेंदरिया) में सर्पदंश हुआ था।
- निंबार्क संप्रदाय (सलेमाबाद / किशनगढ़, अजमेर):
- रूपनगढ़ नदी के तट पर स्थित निंबार्क संप्रदाय की भारत की प्रधान पीठ (संस्थापक: परशुराम देवाचार्य)। यहाँ राधा-कृष्ण की युगल रूप में पूजा होती है।
7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प
- किशनगढ़ चित्रकला शैली:
- स्वर्णकाल: राजा सावंत सिंह (नागरीदास) का शासनकाल।
- बणी-ठणी: प्रसिद्ध चित्रकार निहालचंद द्वारा चित्रित; एरिक डिक्सन ने इसे ‘भारत की मोनालिसा’ कहा (1973 में इस पर 20 पैसे का डाक टिकट जारी हुआ)।
- विशेषताएँ: नुकीली नाक, खंजन पक्षी जैसी आँखें, कमल दल से युक्त सरोवर, पारदर्शी ओढ़नी।
- लोक नृत्य व नाट्य:
- चरी नृत्य: किशनगढ़ क्षेत्र में गुर्जर महिलाओं द्वारा सिर पर जलती हुई कपास के बीजों (काकड़ों) वाली चरी रखकर किया जाने वाला नृत्य (प्रसिद्ध नृत्यांगना: फलकू बाई)।
- कुचामनी व अजमेरी ख्याल परंपरा: स्थानीय लोकनाट्य।
- तिलोनिया (बेयरफुट कॉलेज): बंकर रॉय द्वारा स्थापित सामाजिक कार्य एवं अनुसंधान केंद्र (ग्रामीण आत्मनिर्भरता व सौर ऊर्जा हेतु प्रसिद्ध)।
8. प्रमुख साहित्यकार, विद्वान एवं संस्थान
- चंदबरदाई: ग्रंथ: पृथ्वीराज रासो (डिंगल/पिंगल)।
- जयानक भट्ट: ग्रंथ: पृथ्वीराज विजय (संस्कृत)।
- महर्षि दयानंद सरस्वती: 1883 में आर्य समाज के संस्थापक का निर्वाण अजमेर में हुआ; अजमेर में ‘परोपकारिणी सभा’ की स्थापना की। इनकी स्मृति में ‘महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU)’ संचालित है।
- प्रमुख ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान:
- मेयो कॉलेज (1875 ई.): लॉर्ड मेयो के समय देशी राजाओं व सामंतों के बच्चों की शिक्षा हेतु स्थापित (प्रथम प्राचार्य: ओलिवर सेंट जॉन; प्रथम छात्र: अलवर के मंगल सिंह)।
- राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) एवं RPSC (राजस्थान लोक सेवा आयोग, घूघरा घाटी) का मुख्यालय।
9. स्वतंत्रता संग्राम एवं प्रमुख जननायक
- हरिभाऊ उपाध्याय: ‘दा साहब’ के उपनाम से प्रसिद्ध; अजमेर के एकमात्र मुख्यमंत्री; हटूंडी (अजमेर) में ‘गांधी आश्रम’ व ‘महिला शिक्षा सदन’ की स्थापना की; पत्रिका: त्यागभूमि, उदुम्बर।
- राव गोपाल सिंह खरवा: राजस्थान में सशस्त्र क्रांति के जनक; विजय सिंह पथिक के साथ मिलकर 1915 की सशस्त्र क्रांति की योजना बनाई; टॉडगढ़ जेल में नजरबंद रखे गए।
- अर्जुन लाल सेठी का कर्मस्थल: जीवन का अंतिम समय अजमेर की दरगाह में ‘करीम खां’ के नाम से बिताया और बच्चों को अरबी-फारसी पढ़ाई; यहीं इनका निधन हुआ।
- स्वामी कुमारानंद: अजमेर में साम्यवादी (कम्युनिस्ट) आंदोलन के प्रमुख नेता।