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तेजसिंह

श्रेणी: प्रमुख व्यक्तित्व, राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति, राजस्थान का मध्यकालीन इतिहास एवं राजवंश | लक्षित परीक्षाएं: RPSC (RAS, SI), RSMSSB (CET, पटवार, VDO, LDC)
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सामान्य परिचय
  • शासक: रावल तेजसिंह (Tejasimha)
  • राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (रावल शाखा)
  • पिता: रावल जैत्रसिंह
  • माता: रानी जयत्तलदेवी (कुछ स्रोतों में जैतलदेवी)
  • पुत्र एवं उत्तराधिकारी: रावल समरसिंह
  • शासनकाल: 13वीं शताब्दी का मध्य (1253 ई. से 1273 ई.)
  • राजधानी: चित्तौड़गढ़ दुर्ग
  • उपाधियाँ / विरुद:
    • परमभट्टारक
    • महाराजाधिराज
    • परमेश्वर
    • उमापतिवरलब्धप्रौढ़प्रताप (भगवान शिव/पार्वती के वरदान से पराक्रमी)
प्रमुख सैन्य अभियान एवं विदेशी आक्रमण
  • गियासुद्दीन बलबन का आक्रमण विफल (1253-54 ई. के आसपास):
    • दिल्ली सल्तनत के सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में उसके प्रमुख वजीर/नायब उलुग खाँ (गियासुद्दीन बलबन) ने मेवाड़ और चित्तौड़गढ़ पर अधिकार करने के लिए भारी सैन्य अभियान चलाया।
    • रावल तेजसिंह ने चित्तौड़ के सुदृढ़ रक्षा तंत्र और अरावली की रणनीतिक स्थिति का उपयोग कर बलबन की तुर्क सेना को बुरी तरह पराजित कर खदेड़ दिया।
  • गुजरात के चालुक्यों (बघेलों) से संघर्ष:
    • गुजरात के वाघेला/चालुक्य शासक वीसलदेव (बीसलदेव) के साथ सीमा पर संघर्ष हुआ।
    • शिलालेखों के अनुसार तेजसिंह ने चालुक्यों के दबाव को निष्प्रभावी कर मेवाड़ की पश्चिमी सीमाओं को अक्षुण्ण बनाए रखा।
कला, चित्रकला और साहित्य (विशेष ऐतिहासिक महत्व)
  • राजस्थान की चित्रकला का प्रथम चित्रित ग्रंथ:
    • ग्रंथ का नाम: श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि (Shravaka Pratikramana Sutra Churni)
    • रचना वर्ष: 1260 ई. (वि.सं. 1317)
    • स्थान: आहड़ (अघाटपुर)
    • चित्रकार: कमलचन्द्र (ताम्रपत्र/ताड़पत्र पर चित्रित)
    • महत्व: यह मेवाड़ शैली (और राजस्थान की चित्रकला) का पहला उपलब्ध चित्रित व दिनांकित पांडुलिपि ग्रंथ है।
  • स्थापत्य व मंदिर निर्माण:
    • तेजसिंह की पटरानी जयत्तलदेवी (जैतलदेवी) ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग में प्रसिद्ध श्याम पार्श्वनाथ मंदिर (जैन मंदिर) का निर्माण करवाया था।
    • अभिलेखों में इस मंदिर के निर्माण और तेजसिंह द्वारा दिए गए धार्मिक दानों का उल्लेख मिलता है।
प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत व अभिलेख
  • चीरवा का शिलालेख (1273 ई. / वि.सं. 1330):
    • तेजसिंह के शासनकाल के अंतिम समय का सबसे प्रामाणिक स्रोत।
    • इसमें तेजसिंह की उपाधियों, बलबन के आक्रमण को विफल करने और नागदा के स्थानीय अधिकारियों (तलारक्ष मदन के पुत्रों जैसे पदमसिंह, समरसिंह आदि) के कार्यों का विस्तृत विवरण मिलता है।
  • घाघसा का अभिलेख (1265 ई.): मेवाड़ के आर्थिक व प्रशासनिक स्वरूप को दर्शाता है।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
  • ‘श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि’ (1260 ई.) के समय मेवाड़ के शासक: रावल तेजसिंह।
  • श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि के चित्रकार: कमलचन्द्र (आहड़ में चित्रित)।
  • दिल्ली के भावी सुल्तान बलबन के आक्रमण को विफल करने वाले गुहिल शासक: रावल तेजसिंह।
  • चित्तौड़गढ़ में श्याम पार्श्वनाथ मंदिर की निर्माता: रानी जयत्तलदेवी (तेजसिंह की पत्नी)।
  • उपाधि: परमभट्टारक-महाराजाधिराज-परमेश्वर, उमापतिवरलब्धप्रौढ़प्रताप।
  • चीरवा शिलालेख (1273 ई.): तेजसिंह के काल की घटनाओं का मुख्य अभिलेख।
  • वंशानुक्रम: जैत्रसिंह $\rightarrow$ तेजसिंह $\rightarrow$ रावल समरसिंह $\rightarrow$ रावल रतनसिंह (रावल शाखा के अंतिम शासक)।

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