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राजस्थान उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ (जोधपुर) और जयपुर पीठ का गठन व क्षेत्राधिकार

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सत्यापित: 28 September 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है। प्रशासनिक सुगमता और त्वरित न्याय वितरण प्रणाली के लिए इसे दो भागों में विभाजित किया गया है: प्रधान पीठ (Principal Seat), जोधपुर और स्थाई पीठ (Permanent Bench), जयपुर। 1. गठन एवं पृष्ठभूमि प्रधान पीठ (जोधपुर): 29 अगस्त 1949 को राजस्थान उच्च न्यायालय का औपचारिक उद्घाटन जोधपुर […]
राजस्थान उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है। प्रशासनिक सुगमता और त्वरित न्याय वितरण प्रणाली के लिए इसे दो भागों में विभाजित किया गया है: प्रधान पीठ (Principal Seat), जोधपुर और स्थाई पीठ (Permanent Bench), जयपुर।

1. गठन एवं पृष्ठभूमि

  • प्रधान पीठ (जोधपुर): 29 अगस्त 1949 को राजस्थान उच्च न्यायालय का औपचारिक उद्घाटन जोधपुर में ही किया गया था। सत्यनारायण राव समिति (1957-58) की सिफारिशों के आधार पर जोधपुर को उच्च न्यायालय की मुख्य/प्रधान पीठ के रूप में स्थायी दर्जा दिया गया।
  • जयपुर पीठ (Jaipur Bench): शुरुआत में 1949 से 1958 तक जयपुर में एक पीठ कार्यरत थी, जिसे सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर 1958 में समाप्त कर दिया गया था। बाद में, जन सुविधा और प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 51(2) के तहत 31 जनवरी 1977 को जयपुर पीठ की स्थायी रूप से पुनर्गठन/पुनः स्थापना की गई।

2. भौगोलिक एवं क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार (Territorial Jurisdiction)

राजस्थान के कुल जिलों के न्यायिक मामलों को दोनों पीठों के बीच क्षेत्रवार विभाजित किया गया है:
विवरण प्रधान पीठ (जोधपुर) स्थायी पीठ (जयपुर)
स्थिति मुख्य पीठ (Principal Seat) स्थायी पीठ (Permanent Bench)
शामिल संभाग/क्षेत्र मारवाड़, मेवाड़, बीकानेर, वागड़ एवं सीमावर्ती क्षेत्र ढूँढाड़, हाड़ौती, मत्स्य एवं शेखावाटी क्षेत्र
जिलों का क्षेत्राधिकार पश्चिमी एवं दक्षिणी राजस्थान के 19 जिले पूर्वी एवं उत्तरी-पूर्वी राजस्थान के 17 जिले

जोधपुर प्रधान पीठ के अंतर्गत आने वाले जिले:

जोधपुर, जोधपुर ग्रामीण, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अनूपगढ़, पाली, सिरोही, जालौर, सांचौर, उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलंबर और भीलवाड़ा।

जयपुर पीठ के अंतर्गत आने वाले जिले:

जयपुर, जयपुर ग्रामीण, दूदू, कोटपूतली-बहरोड़, दौसा, खैरथल-तिजारा, अलवर, भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, अजमेर, ब्यावर, केकड़ी, टोंक, नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर, नीम का थाना, झुंझुनूं, कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़।

3. प्रकार्यात्मक क्षेत्राधिकार (Functional Jurisdiction)

संविधान के अनुच्छेद 226 (ऋट/याचिका क्षेत्राधिकार) एवं अनुच्छेद 227 (अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण क्षमता) के तहत दोनों पीठों के अधिकार समान हैं:
  1. मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction):
    • मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट याचिकाएं (Habeas Corpus, Mandamus, Certiorari, Prohibition, Quo-Warranto)।
    • कंपनी मामले, निर्वाचन याचिकाएं (Election Petitions) तथा जनहित याचिकाएं (PIL)।
  2. अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction):
    • जिला एवं सत्र न्यायालयों (District & Sessions Courts) के फैसलों के खिलाफ दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) प्रथम एवं द्वितीय अपील सुनना।
  3. रोस्टर और स्थानांतरण शक्ति (Chief Justice’s Powers):
    • राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) का मुख्य कार्यालय प्रधान पीठ (जोधपुर) में होता है, लेकिन वे समय-समय पर जयपुर पीठ में भी बैठते हैं।
    • मुख्य न्यायाधीश के पास किसी भी मामले को प्रशासनिक आधार पर जोधपुर से जयपुर या जयपुर से जोधपुर स्थानांतरित करने का विशेष अधिकार होता है।

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