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कालीबंगा सभ्यता

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सत्यापित: 24 September 2026
मुख्य बिंदु: कालीबंगा सभ्यता (Hanumangarh): इतिहास, खोज, नगर नियोजन एवं महत्वपूर्ण तथ्य | Kalibanga Civilization Notes 1. सामान्य परिचय एवं भौगोलिक स्थिति (General Introduction & Geography) जिला: हनुमानगढ़, राजस्थान (नोट: गठन से पहले यह क्षेत्र श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आता था)। नदी: यह प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता घग्गर नदी (वैदिक काल की सरस्वती नदी) के बाएं तट […]

कालीबंगा सभ्यता (Hanumangarh): इतिहास, खोज, नगर नियोजन एवं महत्वपूर्ण तथ्य | Kalibanga Civilization Notes

1. सामान्य परिचय एवं भौगोलिक स्थिति (General Introduction & Geography)

  • जिला: हनुमानगढ़, राजस्थान (नोट: गठन से पहले यह क्षेत्र श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आता था)।
  • नदी: यह प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता घग्गर नदी (वैदिक काल की सरस्वती नदी) के बाएं तट पर विकसित हुई थी।
  • शाब्दिक अर्थ: सिंधी भाषा में ‘कालीबंगा’ का अर्थ ‘काले रंग की चूड़ियाँ’ होता है। इस स्थल से बड़ी मात्रा में काले रंग की टूटी हुई प्राचीन चूड़ियाँ प्राप्त हुई हैं।

2. खोज एवं उत्खनन (Discovery & Excavation)

  • प्रथम खोज: वर्ष 1952 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् अमला नंद घोष (A. Ghosh) द्वारा इस पुरातात्विक स्थल की खोज की गई थी।
  • व्यापक उत्खनन: वर्ष 1961 से 1969 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के निर्देशन में बी.बी. लाल (ब्रजवासी लाल) और बी.के. थापर (बालकृष्ण थापर) द्वारा वृहद स्तर पर उत्खनन कार्य कराया गया। इसमें एम.डी. खरे, जे.पी. जोशी और सुरभि कुमार बाबू ने भी अपना सहयोग दिया था।

3. काल निर्धारण (Chronology & Time Period)

  • कार्बन-14 (C-14) डेटिंग पद्धति के अनुसार कालीबंगा का मुख्य काल 2300 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व (हड़प्पा सभ्यता का परिपक्व काल) माना जाता है।
  • यहाँ उत्खनन के दौरान दो प्रमुख संस्कृतियाँ/स्तर देखने को मिले हैं:
    1. प्राक्क-हड़प्पा काल (Pre-Harappan Phase): हड़प्पा सभ्यता से भी प्राचीन संस्कृति के अवशेष।
    2. विकसित हड़प्पा काल (Mature Harappan Phase): मुख्य सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन अवशेष।

4. कालीबंगा सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ (Key Features & Archaeological Evidence)

A. विश्व में सर्वप्रथम “जुते हुए खेत के साक्ष्य”

  • कालीबंगा की सबसे अनूठी विशेषता यहाँ से प्राप्त विश्व के प्राचीनतम जुते हुए खेत के अवशेष हैं।
  • खेत की जुताई ग्रिड पद्धति (Grid System) पर समकोण (90°) पर की गई थी। इससे यह प्रमाणित होता है कि यहाँ एक ही खेत में एक साथ दो फसलें (गेहूँ और जौ) उगाई जाती थीं।

B. नगर नियोजन और ‘दीनहीनों की बस्ती’

  • यह एक अत्यंत सुव्यवस्थित शहरी सभ्यता थी, जहाँ की सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। नगर मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित था:
    • पश्चिमी टीला: दुर्ग या गढ़ क्षेत्र (शासक वर्ग के लिए)।
    • पूर्वी टीला: सामान्य आवास क्षेत्र। दोनों टीलों के चारों ओर सुरक्षात्मक प्राचीर (किलेबंदी) बनी हुई थी।
  • कच्ची ईंटों का प्रयोग: यहाँ अधिकांश मकान धूप में सुझाई गई कच्ची ईंटों से बनाए गए थे (पत्थर का अभाव होने के कारण ईंटों को मिट्टी से जोड़ा जाता था)। केवल नालियों, स्नानघरों और कुओं में ही पक्की ईंटों का उपयोग हुआ।
  • इतिहासकार दशरथ शर्मा ने इसी कारण कालीबंगा को “दीनहीनों की बस्ती” (Poor Man’s Settlement) की संज्ञा दी है।
  • फर्श और दीवारों में ज्यामितीय डिजाइनों वाली अलंकृत (Decorated) ईंटों का सुंदर प्रयोग मिलता है।

C. जल निकास प्रणाली और अनोखी ‘लकड़ी की नाली’

  • घरों का गंदा पानी बाहर निकालने के लिए उन्नत व्यक्तिगत और सार्वजनिक नालियों की व्यवस्था थी।
  • सिंधु घाटी सभ्यता के अन्य स्थलों से भिन्न, कालीबंगा से लकड़ी की बनी खोखली नालियाँ (Wooden Drains) और ईंट निर्मित नालियाँ मिली हैं।
  • घरों का कचरा और गंदा पानी डालने के लिए विशेष मृद्भांड (मिट्टी के बर्तन) उपयोग में लाए जाते थे।

D. विश्व के प्राचीनतम ‘भूकंप के साक्ष्य’

  • उत्खनन के दौरान यहाँ की दीवारों और ईंटों में गहरी दरारें पाई गईं, जिससे यह सिद्ध हुआ कि प्रागैतिहासिक काल में यहाँ एक शक्तिशाली भूकंप आया था। यह विश्व में भूकंप का सबसे पहला प्रामाणिक पुरातात्विक साक्ष्य माना जाता है।

E. शल्य चिकित्सा (Surgery) के प्रमाण

  • यहाँ से एक छोटे बच्चे की खोपड़ी (कपाल) मिली है जिस पर 6 शल्य चिकित्सा (Trepanation / Surgery) के छिद्र बने हुए हैं, जो प्राचीन चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद/शल्य क्रिया के उच्च स्तर को दर्शाते हैं।

F. शवाधान (Burial) पद्धतियाँ

  • कालीबंगा में मृतकों के अंतिम संस्कार की तीन प्रमुख विधियाँ प्रचलित थीं:
    1. पूर्ण समाधीकरण: शव को जमीन में सीधा लिटाकर दफनाना।
    2. आंशिक समाधीकरण: पशु-पक्षियों के खाने के बाद बचे अवशेषों को दफनाना।
    3. दाह-संस्कार: शव को जलाकर उसकी राख या बची सामग्री को कलश में रखकर दफनाना।

G. अन्य महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष

  • अग्निकुंड / यज्ञ वेदियाँ: यहाँ से सात आयताकार अग्निकुंड (Fire Altars) मिले हैं, जो धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञ और बलि प्रथा का प्रबल संकेत देते हैं। यहाँ धूप में पकाई गई ईंटों का भी उपयोग देखा गया है।
  • लिपि एवं मुहरें: यहाँ से प्राप्त मुहरों और मृद्भांडों पर सैंधव लिपि के प्रमाण मिले हैं, जो सामान्यतः दाईं से बाईं ओर लिखी जाती थी (जिसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है)। इसके अतिरिक्त मेसोपोटामिया शैली की बेलनाकार मुहरें व्यापारिक संबंधों को दर्शाती हैं।
  • आर्थिक समृद्धि: तांबे और काँसे से बने विभिन्न कृषि उपकरण, तौल-माप के बाट तथा टेराकोटा की मूर्तियाँ यहाँ की आर्थिक संपन्नता को प्रमाणित करती हैं।
  • पतन के मुख्य कारण: इस उन्नत सभ्यता का पतन संभवतः तीव्र सूखा, भयंकर बाढ़, महामारी या घग्गर (सरस्वती) नदी के मार्ग में परिवर्तन के परिणामस्वरूप हुआ।

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