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राजस्थान में पूर्व पाषाण काल (Lower Paleolithic) एवं पुरातात्विक नदी घाटियाँ

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सत्यापित: 24 September 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान में पूर्व पाषाण काल (निम्न पुरापाषाण काल) मानव इतिहास का वह शुरुआती चरण है जब आदिमानव ने पत्थरों को तराशकर औजार बनाना सीखा था। इस काल के लोग पूरी तरह शिकारी और खाद्य संग्राहक (Hunter-Gatherers) थे। इस विषय से जुड़ी छोटी-से-छोटी और हर एक महत्वपूर्ण डिटेल नीचे विस्तार से दी जा रही है: 1. […]
राजस्थान में पूर्व पाषाण काल (निम्न पुरापाषाण काल) मानव इतिहास का वह शुरुआती चरण है जब आदिमानव ने पत्थरों को तराशकर औजार बनाना सीखा था। इस काल के लोग पूरी तरह शिकारी और खाद्य संग्राहक (Hunter-Gatherers) थे।
इस विषय से जुड़ी छोटी-से-छोटी और हर एक महत्वपूर्ण डिटेल नीचे विस्तार से दी जा रही है:

1. काल अवधि एवं भौगोलिक पृष्ठभूमि (Time Period & Geography)

  • काल: पूर्व पाषाण काल (Lower Paleolithic Age) अनुमानित रूप से आज से लगभग 5,00,000 वर्ष पूर्व से 50,000 वर्ष पूर्व तक माना जाता है।
  • भूगोल: इस काल के मानव मुख्यतः पानी की उपलब्धता और शिकार की आसानी के कारण नदियों की घाटियों के आसपास बसते थे। राजस्थान में अरावली के दोनों ओर और प्रमुख नदी घाटियों में इस संस्कृति का व्यापक विस्तार था।

2. प्रमुख नदी घाटियाँ और खोजे गए स्थल (River Valleys & Sites)

राजस्थान में पूर्व पाषाण कालीन अवशेष मुख्य रूप से निम्नलिखित पाँच प्रमुख नदी घाटियों और उनके आसपास के क्षेत्रों से प्रचुर मात्रा में मिले हैं:

A. बनास नदी घाटी (Banas River Valley)

  • बनास और उसकी सहायक नदियाँ (जैसे बेड़च, कोठारी) इस संस्कृति के बड़े केंद्र थीं।
  • यहाँ से शुरुआती मानव बस्तियों के संकेत और बड़े आकार के पाषाण उपकरण मिले हैं।

B. गंभीरी नदी घाटी (Gambhiri River Valley)

  • चित्तौड़गढ़ के पास गंभीरी नदी घाटी पूर्व पाषाण काल के अनुसंधान का एक बेहद समृद्ध क्षेत्र रहा है।
  • यहाँ से बड़ी संख्या में हाथों से पकड़े जाने वाले भारी औजार मिले हैं। प्रसिद्ध पुरातत्वविदों ने चित्तौड़गढ़ और उसके आसपास के क्षेत्रों में इस घाटी का गहन सर्वेक्षण किया था।

C. बेड़च नदी घाटी (Bedach River Valley)

  • उदयपुर और चित्तौड़गढ़ के बीच बहने वाली बेड़च नदी के किनारे पाषाण युगीन संस्कृतियों के कई स्तर मिले हैं।
  • यहाँ नदी के प्राचीन कछार (Terraces) से कोर और फ्लेक तकनीक से बने उपकरण प्राप्त हुए हैं।

D. लूनी नदी घाटी (Luni River Valley)

  • पश्चिमी राजस्थान (मारवाड़ क्षेत्र) में लूनी नदी और उसकी सहायक नदियाँ (जैसे जवाई, बांडी) पूर्व पाषाण काल की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थीं।
  • डिडवाना (नागौर) और पाली-बाड़मेर के लूनी बेसिन से इस काल के कई महत्वपूर्ण उपकरण मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि शुष्क क्षेत्रों में भी प्रागैतिहासिक मानव सक्रिय था।

E. चंबल नदी घाटी (Chambal River Valley)

  • दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में कोटा, चित्तौड़गढ़ और सवाई माधोपुर के बीच चंबल और उसकी सहायक नदियों (जैसे च, बनास, पार्वती) की घाटियाँ गहरी हैं।
  • यहाँ की खड्ड भूमि (Badlands) और कछारी मिट्टी की परतों से पूर्व पाषाण कालीन हस्तकुल्हाड़ियाँ बड़े पैमाने पर मिली हैं।

3. इस काल के प्रमुख पाषाण उपकरण (Stone Tools & Artifacts)

पूर्व पाषाण काल के मनुष्य मुख्य रूप से क्वार्टजाइट (Quartzite), जैस्पर और चर्ट जैसे कठोर पत्थरों का उपयोग औजार बनाने के लिए करते थे। इन उपकरणों को उनकी बनावट और उपयोग के आधार पर मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
  • हस्तकुल्हाड़ी (Handaxe / चॉपर-चॉपिंग उपकरण):
    • यह इस काल का सबसे प्रमुख और सर्वव्यापी उपकरण था।
    • यह नाशपाती के आकार का या बादाम के आकार का भारी पत्थर होता था, जिसे दोनों तरफ से तराशकर नुकीला बनाया जाता था।
    • इसका उपयोग पेड़ की जड़ें खोदने, जानवरों की खाल उतारने, लकड़ी काटने और मांस फाड़ने के लिए किया जाता था।
  • विदर (Cleaver):
    • यह एक प्रकार की चौड़ी धार वाली कुल्हाड़ी जैसी वस्तु होती थी, जिसका आगे का सिरा सीधा और तेज धार वाला होता था।
    • इसका उपयोग मुख्य रूप से लकड़ी को चीरने या खाल को साफ करने के लिए किया जाता था।
  • कोर उपकरण (Core Tools):
    • जब बड़े पत्थर (कोर) के बड़े टुकड़े को तोड़कर वांछित औजार बनाया जाता था और शेष बड़े हिस्से को कोर कहा जाता था, तो इनसे बने भारी और भद्दे उपकरण इस काल की मुख्य पहचान हैं। इसमें स्क्रैपर (खुरचनी) और ब्लेडनुमा प्रारंभिक रूप भी शामिल होते थे।

4. इस काल के मानव की जीवनशैली (Lifestyle of Lower Paleolithic Humans)

  • भोजन: वे पूरी तरह से कंदमूल, फल, कच्चा मांस और मछलियों पर निर्भर थे। उन्हें कृषि या पशुपालन का ज्ञान नहीं था।
  • निवास: वे गुफाओं, पेड़ों की छांव या नदियों के खुले किनारों पर रहते थे। उनके पास स्थायी मकान नहीं थे।
  • अग्नि की खोज: इस काल के अंतिम चरण तक आते-आते मानव ने आग के उपयोग से थोड़ा बहुत परिचित होना शुरू कर दिया था, हालांकि संगठित रूप से इसका प्रयोग बाद के कालों में बढ़ा।
क्या आप इस काल के बाद आने वाले ‘मध्य पाषाण काल’ (Mesolithic) और उसके विशेष सूक्ष्म उपकरणों (Microliths) के बारे में भी इसी तरह विस्तार से जानना चाहते हैं?

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