मुख्य बिंदु: झालावाड़ प्रजामंडल राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलनों में सबसे अंतिम (नवीनतम) प्रजामंडल था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं: 1. स्थापना वर्ष (Establishment Year) स्थापना वर्ष: 1946 ई. में झालावाड़ प्रजामंडल की स्थापना की गई थी। यह राजस्थान का सबसे अंतिम या नवीनतम गठित होने वाला प्रजामंडल था। 2. संस्थापक एवं प्रमुख […]
झालावाड़ प्रजामंडल राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलनों में सबसे अंतिम (नवीनतम) प्रजामंडल था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं:
1. स्थापना वर्ष (Establishment Year)
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स्थापना वर्ष: 1946 ई. में झालावाड़ प्रजामंडल की स्थापना की गई थी। यह राजस्थान का सबसे अंतिम या नवीनतम गठित होने वाला प्रजामंडल था।
2. संस्थापक एवं प्रमुख नेता (Founder & Key Leaders)
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संस्थापक एवं प्रमुख नेता: मांगीलाल भव्य।
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अन्य सहयोगी नेता: मकसूद अली खां और कन्हैयालाल मित्तल आदि ने भी इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. मुख्य गतिविधियाँ एवं उपलब्धियाँ (Activities & Achievements)
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उत्तरदायी शासन की मांग: झालावाड़ रियासत में राजा और प्रशासन के अंतर्गत जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा शासन चलाने (उत्तरदायी शासन) की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।
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लोकप्रिय मंत्रिमंडल का गठन: झालावाड़ रियासत राजस्थान की उन रियासतों में से थी जहाँ आजादी के समीप प्रशासनिक सुधारों और प्रजामंडल के प्रयासों के फलस्वरूप लोकप्रिय सरकार के गठन की दिशा में तेजी से कदम उठाए गए।
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जन-जागृति और नागरिक अधिकार: रियासत में जनता को उनके मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने, बेगार प्रथा का विरोध करने और प्रशासनिक पारदर्शिता लाने के लिए सभाओं का आयोजन किया गया।
4. कमियाँ एवं सीमाएँ (Limitations & Challenges)
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देरी से स्थापना: चूँकि इसकी स्थापना बहुत देर से (1946 में) हुई, इसलिए इसे अन्य पुराने प्रजामंडलों की तरह लंबा और व्यापक जन-संघर्ष चलाने का अवसर नहीं मिला, क्योंकि तब तक देश की स्वतंत्रता और रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
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सीमित संसाधन: झालावाड़ एक छोटी और शांत रियासत थी, जिसके कारण इसके संसाधन और सांगठनिक ढाँचा बड़े राज्यों (जैसे मेवाड़ या मारवाड़) की तुलना में काफी सीमित थे।
5. मुख्य विशेषता / विवरण (Key Features / Summary)
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राजस्थान का सबसे अंतिम प्रजामंडल: झालावाड़ प्रजामंडल राजस्थान का सबसे अंतिम (19th) प्रजामंडल था, जिसकी स्थापना मांगीलाल भव्य के नेतृत्व में 1946 में हुई थी।