मुख्य बिंदु: कोटा प्रजामंडल राजस्थान के प्रमुख प्रजामंडल आंदोलनों में से एक था। हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, झालावाड़) में जन-जागृति और उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए इस प्रजामंडल ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं: 1. स्थापना वर्ष (Establishment Year) स्थापना वर्ष: 1939 ई. में कोटा प्रजामंडल […]
कोटा प्रजामंडल राजस्थान के प्रमुख प्रजामंडल आंदोलनों में से एक था। हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, झालावाड़) में जन-जागृति और उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए इस प्रजामंडल ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं:
1. स्थापना वर्ष (Establishment Year)
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स्थापना वर्ष: 1939 ई. में कोटा प्रजामंडल की आधिकारिक स्थापना की गई थी (इससे पहले 1934 में ‘हाड़ौती प्रजामंडल’ का गठन हुआ था, जिसे बाद में कोटा प्रजामंडल के रूप में एक व्यापक और संगठित रूप दिया गया)।
2. संस्थापक एवं प्रमुख नेता (Founder & Key Leaders)
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संस्थापक एवं मुख्य नेता: पंडित नैनूराम शर्मा और अभिन हरी (अभिनहरि शर्मा)।
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अन्य प्रमुख नेता: गोपीलाल यादव, प्रभुलाल विजय, और मंगीलाल भव्य।
3. मुख्य गतिविधियाँ एवं उपलब्धियाँ (Activities & Achievements)
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उत्तरदायी शासन की माँग: कोटा रियासत में राजा के संरक्षण के अंतर्गत जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा शासन चलाने (उत्तरदायी शासन) की मांग को सबसे प्रमुखता से उठाया गया।
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पहला उत्तरदायी मंत्रिमंडल (1942): कोटा रियासत राजस्थान की उन रियासतों में से थी जहाँ जनता के संघर्ष और प्रजामंडल के दबाव के कारण सबसे पहले राजनीतिक सुधारों की दिशा में कदम उठाए गए और बाद में लोकप्रिय मंत्रिमंडल का गठन हुआ।
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किसानों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई: कोटा क्षेत्र में जागीरदारों द्वारा किसानों पर लगाए जाने वाले भारी करों, बेगार प्रथा (बिना पारिश्रमिक के काम करवाना) और मजदूरों के शोषण के खिलाफ इस प्रजामंडल ने जोरदार आंदोलन किए।
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जन-जागृति और सभाएँ: पंडित नैनूराम शर्मा और अभिन हरी ने कोटा शहर के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी सभाओं और सम्मेलनों के माध्यम से जनता को जागरूक किया।
4. कमियाँ एवं सीमाएँ (Limitations & Challenges)
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प्रशासनिक और शासक का विरोध: कोटा के महाराणा और वहाँ के अधिकारियों ने शुरुआत में प्रजामंडल की गतिविधियों को रोकने के लिए कई प्रतिबंध लगाए और कार्यकर्ताओं को परेशान किया।
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आंतरिक और सामंती प्रतिरोध: सामंती ताकतों (जागीरदारों) ने किसानों के आंदोलनों को कुचलने के कई प्रयास किए, जिसके कारण प्रजामंडल के नेताओं को लंबा और कड़ा संघर्ष करना पड़ा।
5. मुख्य विशेषता / विवरण (Key Features / Summary)
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पंडित नैनूराम शर्मा का सर्वस्व बलिदान: कोटा प्रजामंडल की पूरी पहचान पंडित नैनूराम शर्मा के ओजस्वी और साहसी नेतृत्व से जुड़ी है। उन्होंने हाड़ौती आंचल में प्रजातंत्र की स्थापना के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
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सक्रिय जन-आंदोलन: कोटा प्रजामंडल केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने कोटा रियासत की जनता को गोलबंद करके एक मजबूत जन-आंदोलन का रूप दिया।