मुख्य बिंदु: सिरोही प्रजामंडल राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रजामंडल आंदोलनों में से एक था। इस प्रजामंडल ने सिरोही रियासत में राजनीतिक चेतना जगाने, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए कड़ा संघर्ष किया था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं: 1. स्थापना वर्ष (Establishment Year) स्थापना वर्ष: 1939 […]
सिरोही प्रजामंडल राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रजामंडल आंदोलनों में से एक था। इस प्रजामंडल ने सिरोही रियासत में राजनीतिक चेतना जगाने, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए कड़ा संघर्ष किया था। इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ विस्तार से निम्नलिखित हैं:
1. स्थापना वर्ष (Establishment Year)
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स्थापना वर्ष: 1939 ई. में सिरोही प्रजामंडल की स्थापना की गई थी।
2. संस्थापक एवं प्रमुख नेता (Founder & Key Leaders)
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संस्थापक एवं प्रमुख नेता: गोकुल भाई भट्ट (गोकुल भाई भट्ट को सिरोही प्रजामंडल का प्राण और मुख्य नेता माना जाता है। उन्हें ‘राजस्थान का गांधी’ भी कहा जाता है)।
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अन्य सहयोगी नेता: वृद्धिशंकर त्रिवेदी, भवानी शंकर त्रिवेदी, और रमेश चंद्र ओझा आदि ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में उनका पूरा सहयोग किया।
3. मुख्य गतिविधियाँ एवं उपलब्धियाँ (Activities & Achievements)
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बंबई में स्थापना: बीकानेर प्रजामंडल की तरह ही सिरोही प्रजामंडल की स्थापना भी रियासत की सीमा के बाहर बंबई (वर्तमान मुंबई) में गोकुल भाई भट्ट द्वारा की गई थी, क्योंकि सिरोही रियासत और वहाँ के शासक का प्रशासन इस तरह के संगठनों के प्रति बहुत कठोर था।
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उत्तरदायी शासन की मांग: सिरोही रियासत में राजा के संरक्षण के अंतर्गत जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा शासन चलाने (उत्तरदायी शासन) की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।
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आदिवासियों और किसानों के अधिकार: सिरोही क्षेत्र में भील और गरासिया जनजातियाँ निवास करती थीं। प्रजामंडल ने इन जनजातियों पर लगने वाले अनैतिक करों, बेगार प्रथा (बिना पारिश्रमिक के काम करवाना) और सामंती शोषण के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई।
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बॉम्बे से संचालन और बाद में राज्य में प्रवेश: शुरुआती दौर में बंबई से गतिविधियाँ चलाने के बाद, गोकुल भाई भट्ट और अन्य कार्यकर्ताओं ने सिरोही राज्य के भीतर आकर जन-जागृति अभियान चलाए, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तारियों और दमन का सामना करना पड़ा।
4. कमियाँ एवं सीमाएँ (Limitations & Challenges)
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रियासत और जागीरदारों का भारी दमन: सिरोही के महाराणा और वहाँ के जागीरदारों ने प्रजामंडल के कार्यकर्ताओं की सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया और कई नेताओं को जेल में डाल दिया।
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भौगोलिक एवं प्रशासनिक जटिलताएँ: सिरोही रियासत का क्षेत्र पहाड़ी और आबू जैसे रणनीतिक क्षेत्रों से घिरा हुआ था, जिसके कारण शुरुआती समय में ब्रिटिश प्रशासन और स्थानीय शासक के बीच सीमा और नियंत्रण को लेकर भी कई राजनीतिक पेंच फंसे रहे, जिससे आंदोलन को कई प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ा।
5. मुख्य विशेषता / विवरण (Key Features / Summary)
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गोकुल भाई भट्ट का व्यक्तित्व: सिरोही प्रजामंडल की सबसे बड़ी पहचान गोकुल भाई भट्ट का निष्कलंक और समर्पित नेतृत्व था। उनके सादगीपूर्ण जीवन और संघर्ष ने सिरोही ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम को प्रभावित किया।
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राज्य के बाहर स्थापित प्रजामंडल: बीकानेर के बाद सिरोही उन प्रमुख प्रजामंडलों में शामिल था जिसकी स्थापना भौगोलिक सीमा से बाहर (बंबई में) की गई थी।