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राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (RSHRC): संरचना, शक्तियां, कार्य एवं महत्वपूर्ण तथ्य

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सत्यापित: 02 September 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (RSHRC) — त्वरित रिवीजन नोट्स 1. सामान्य परिचय एवं पृष्ठभूमि प्रकृति: सांविधिक / गैर-संवैधानिक निकाय (Statutory Body) अधिनियम: मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (Protection of Human Rights Act, 1993) संबंधित धारा: धारा 21(1) के अंतर्गत राज्य आयोग का गठन गठन अधिसूचना: 18 जनवरी 1999 क्रियाशील तिथि: 23 मार्च 2000 मुख्यालय: जयपुर (एस.एस.ओ. […]
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (RSHRC) — त्वरित रिवीजन नोट्स

1. सामान्य परिचय एवं पृष्ठभूमि

  • प्रकृति: सांविधिक / गैर-संवैधानिक निकाय (Statutory Body)
  • अधिनियम: मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (Protection of Human Rights Act, 1993)
  • संबंधित धारा: धारा 21(1) के अंतर्गत राज्य आयोग का गठन
  • गठन अधिसूचना: 18 जनवरी 1999
  • क्रियाशील तिथि: 23 मार्च 2000
  • मुख्यालय: जयपुर (एस.एस.ओ. बिल्डिंग / सचिवालय परिसर)

2. संगठनात्मक संरचना (Composition)

  • मूल अधिनियम (1993): 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य (कुल 5)
  • 2006 संशोधन: घटाकर 1 अध्यक्ष + 2 सदस्य (कुल 3) किया गया।
  • योग्यताएं (2019 संशोधन के अनुसार):
    • अध्यक्ष: उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (Retired CJ) या सेवानिवृत्त न्यायाधीश (Retired Judge)
    • सदस्य 1: उच्च न्यायालय का कार्यरत/सेवानिवृत्त न्यायाधीश या राज्य में न्यूनतम 7 वर्ष का अनुभव रखने वाला जिला न्यायाधीश
    • सदस्य 2: मानवाधिकार मामलों का व्यावहारिक ज्ञान/अनुभव रखने वाला व्यक्ति

3. नियुक्ति एवं चयन समिति (धारा 22)

  • नियुक्ति कर्ता: राज्यपाल (Governor) द्वारा वारंट (मुद्रा सहित अधिपत्र) जारी कर।
  • चयन समिति की सिफारिश पर:
    1. मुख्यमंत्री (समिति का अध्यक्ष)
    2. गृह मंत्री (राज्य का गृह विभाग प्रभारी)
    3. विधानसभा अध्यक्ष (Speaker)
    4. विधानसभा में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition)
      (नोट: यदि राज्य में विधान परिषद हो तो उसके सभापति एवं विपक्ष के नेता भी शामिल होते हैं; राजस्थान में केवल 4 सदस्य होते हैं।)

4. कार्यकाल, त्यागपत्र एवं पदमुक्ति (धारा 23 एवं 24)

  • कार्यकाल (2019 संशोधन के बाद): 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)।
    (पूर्व में 5 वर्ष/70 वर्ष था।)
  • पुनर्नियुक्ति: पुनर्नियुक्ति के पात्र हैं (अधिकतम 70 वर्ष की आयु सीमा तक)।
  • त्यागपत्र: राज्यपाल को संबोधित।
  • पद से हटाना (Removal):
    • अधिकार: केवल राष्ट्रपति को (राज्यपाल को हटाने का अधिकार नहीं है)।
    • प्रक्रिया: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा की गई जांच में साबित कदाचार या असमर्थता पाए जाने पर।
    • अन्य आधार: दिवालिया घोषित होने, शारीरिक/मानसिक रूप से अक्षम होने या विकृतचित्त होने पर सीधे राष्ट्रपति द्वारा।

5. कार्य, शक्तियां एवं सीमाएं

  • शक्तियां: जांच करते समय दीवानी न्यायालय (Civil Court – CPC, 1908) की शक्तियां प्राप्त हैं (समन जारी करना, गवाह बुलाना, हलफनामा लेना)।
  • अन्वेषण दल: आयोग का अपना जांच दल होता है, जिसका प्रमुख कम से कम आईजी (Inspector General) रैंक का पुलिस अधिकारी होता है।
  • प्रकृति: आयोग की सिफारिशें केवल सलाहकारी (Advisory) होती हैं।
  • सीमाएं:
    • आयोग सीधे दंड या अंतिम मुआवजा नहीं दे सकता (केवल राहत/मुआवजे की सिफारिश करता है)।
    • समय सीमा: घटना घटित होने के 1 वर्ष के भीतर ही शिकायत दर्ज होनी चाहिए (1 वर्ष से पुराने मामलों की सुनवाई नहीं करता)।
    • सेना/सशस्त्र बलों के खिलाफ मामलों में जांच की शक्ति सीमित है (केवल केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांग सकता है)।

6. वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report)

  • आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपता है।
  • राज्य सरकार इस रिपोर्ट को विधानमंडल (विधानसभा) के पटल पर रखवाती है (कार्रवाई या अस्वीकृति के कारणों सहित)।

7. महत्वपूर्ण तथ्य (Exams Direct Hit Facts)

  • प्रथम अध्यक्ष: जस्टिस कांता कुमारी भटनागर (मार्च 2000)
  • अन्य प्रमुख पूर्व अध्यक्ष: जस्टिस एस. सगीर अहमद, जस्टिस एन.के. जैन, जस्टिस एच.आर. कुड़ी (कार्यवाहक), जस्टिस जी.के. व्यास
  • वर्तमान अध्यक्ष: जस्टिस गंगा राम मूलचंदानी
  • मानवाधिकार संदेश: आयोग द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका

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