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पाली जिला: ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य

पाली, राजस्थान जिला दर्शन (District GK) पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 01 September 2026
मुख्य बिंदु: पाली जिले (गोडवाड़ अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: पल्लिका / पालिका (पालीवाल ब्राह्मणों की कर्मभूमि होने के कारण)। उपनाम: गोडवाड़ का हृदय स्थल, मेहंदी की नगरी (सोजत), राजस्थान का टेक्सटाइल हब। भौगोलिक स्थिति व सीमाएँ: राजस्थान के पुनर्गठन […]
पाली जिले (गोडवाड़ अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:

1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य

  • प्राचीन नाम: पल्लिका / पालिका (पालीवाल ब्राह्मणों की कर्मभूमि होने के कारण)।
  • उपनाम: गोडवाड़ का हृदय स्थल, मेहंदी की नगरी (सोजत), राजस्थान का टेक्सटाइल हब।
  • भौगोलिक स्थिति व सीमाएँ:
    • राजस्थान के पुनर्गठन से पूर्व पाली सर्वाधिक 8 जिलों की सीमाओं को छूने वाला एकमात्र आंतरिक जिला था।
  • नदियाँ एवं जल परियोजनाएं:
    • प्रमुख नदियाँ: जवाई (लूनी की प्रमुख सहायक नदी), बांडी (रासायनिक प्रदूषण के कारण ‘केमिकल नदी’), सूकड़ी, मीठड़ी, गुहिया, लीलड़ी।
    • जवाई बांध (सुमेरपुर, पाली):
      • 1946 ई. में जोधपुर के महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा शुरू (इंजीनियर: एडगर व फर्गुसन)।
      • इसे ‘मारवाड़ का अमृत सरोवर’ कहा जाता है (पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा जल जलाशय)।
      • जवाई बांध में जलापूर्ति बढ़ाने हेतु उदयपुर से ‘सेई जल सुरंग’ (राजस्थान की पहली जल सुरंग) जोड़ी गई है।
      • जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व: पैंथरों (Leopards) और ग्रेनाइट चट्टानों के सह-अस्तित्व हेतु विश्व विख्यात।
    • सरदार समंद झील: महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा अकाल राहत हेतु निर्मित सुंदर झील।

2. राजवंश एवं प्रमुख शासक

  • पालीवाल ब्राह्मण: मध्यकाल में पाली समृद्ध व्यापारिक नगर था, जहाँ पालीवाल ब्राह्मणों ने वैज्ञानिक जल संरक्षण विधि ‘खड़ीन’ विकसित की थी।
  • राठौड़ वंश की स्थापना (13वीं सदी):
    • राव सीहा: कन्नौज से आकर पालीवाल ब्राह्मणों की रक्षा हेतु पाली (खेड़/बिठू) में राठौड़ वंश की नींव रखी। बिठू गाँव में राव सीहा का स्मारक व शिलालेख (1273 ई.) स्थित है।
  • नाडोल के चौहान (960 ई.):
    • लक्ष्मण चौहान (लाखा): शाकंभरी के शासक वाकपतिराज के पुत्र; नाडोल (पाली) में चौहान वंश की स्वतंत्र शाखा स्थापित की।
  • मारवाड़ का ठिकाना – आउवा (चंपावत राठौड़):
    • ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत: 1857 की क्रांति में अंग्रेजों व जोधपुर की सेना को लगातार दो युद्धों में पराजित करने वाले अमर नायक।

3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं ऐतिहासिक स्थल

  • नाडोल (Nadol): नाडोल चौहानों की राजधानी; आशापुरा माता का मूल मंदिर और 10वीं-12वीं सदी के प्राचीन जैन-हिंदू मंदिर।
  • घाणेराव (Ghanerao): गोडवाड़ क्षेत्र का प्रमुख ऐतिहासिक ठिकाना; अपने जैन मंदिरों और कलात्मक छतरियों हेतु प्रसिद्ध।

4. प्रमुख दुर्ग, मंदिर एवं स्थापत्य

स्मारक / स्थल निर्माता प्रमुख विशेषता
रणकपुर जैन मंदिर (चौमुखा मंदिर) सेठ धरनक शाह (महाराणा कुंभा काल, 1439 ई.) मघई नदी के तट पर स्थित; प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) को समर्पित। वास्तुकार: देपाक (देपा)। इसमें कुल 1444 नक्काशीदार खंभे हैं (कोई भी दो खंभे एक जैसे नहीं हैं); इसे ‘स्तंभों का वन’ (Forest of Pillars) और ‘त्रिलोक दीपक’ कहा जाता है।
सोजत दुर्ग निंबा (राव जोधा के पुत्र, 1460 ई.) नानी सिरडी पहाड़ी पर स्थित; इसके नीचे सोजत की विश्व प्रसिद्ध मेहंदी उगाई जाती है।
सुगाली माता मंदिर (आउवा) आउवा के ठाकुरों की कुलदेवी 10 सिर और 54 भुजाओं वाली देवी; 1857 के क्रांतिकारियों की प्रेरणास्रोत (वर्तमान में पाली संग्रहालय में मूर्ति सुरक्षित)।
परशुराम महादेव मंदिर (सादड़ी) प्राकृतिक गुफा अरावली की दुर्गम गुफा में स्थित; इसे ‘राजस्थान का अमरनाथ’ कहा जाता है (मान्यता है कि परशुराम जी ने यहाँ तपस्या की थी)।
मूछाला महावीर मंदिर (घाणेराव) प्राचीन जैन तीर्थ मूंछों वाले भगवान महावीर स्वामी की दुर्लभ व चमत्कारी प्रतिमा।
ओम बन्ना धाम (बुलेट बाबा – चोटिला): लोक आस्था केंद्र एनएच-62 पर स्थित; स्वर्गीय ओम सिंह राठौड़ की 350cc रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक की पूजा होती है (सड़क दुर्घटनाओं से रक्षा हेतु)।
जाडन आश्रम (ओम आकार का मंदिर): स्वामी महेश्वरानंद जी विश्व का पहला ‘ॐ’ (OM) की भौगोलिक आकृति में निर्मित भव्य शिव मंदिर परिसर।

5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध एवं 1857 की क्रांति

  • गिरी-सुमेल का युद्ध (1544 ई., जैतारण / तत्कालीन पाली):
    • मारवाड़ के राव मालदेव (सेनापति: जैता व कूंपा) और शेरशाह सूरी के बीच।
    • जैता और कूंपा के अद्भुत शौर्य से घबराकर शेरशाह ने कहा था: “एक मुट्ठी बाजरे के लिए मैं पूरे हिंदुस्तान की सल्तनत खो बैठता।”
  • 1857 की क्रांति और आउवा का संघर्ष (ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत का नेतृत्व):
    • बिथोड़ा का युद्ध (8 सितंबर 1857): कुशाल सिंह की सेना ने जोधपुर के कैप्टन हीथकोट और तख्तसिंह के सेनापति ओंकार सिंह को पराजित किया (ओंकार सिंह मारा गया)।
    • चेलावास का युद्ध (18 सितंबर 1857): इसे ‘काले और गोरों का युद्ध’ कहा जाता है। एजीजी जॉर्ज लॉरेंस और जोधपुर के पॉलिटिकल एजेंट मॉक मेसन की सेना पराजित हुई; क्रांतिकारियों ने मॉक मेसन का सिर काटकर आउवा के किले के दरवाजे पर लटका दिया।
    • आउवा का पतन (जनवरी 1858): कर्नल होम्स के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने आउवा पर अधिकार कर सुगाली माता की मूर्ति को अजमेर ले गए।

6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं संप्रदाय

  • भक्त शिरोमणि मीराबाई (कुड़की गाँव):
    • मीराबाई का जन्म 1498 ई. में कुड़की गाँव (जैतारण, पाली) में रतनसिंह राठौड़ के घर हुआ था।
  • संत दरियाव जी (रेण शाखा के प्रवर्तक): इनका जन्म जैतारण (पाली) में हुआ था।
  • आशापुरा माता (नाडोल): चौहानों की कुलदेवी; बिस्सा ब्राह्मणों की आराध्य देवी।
  • सोमनाथ मंदिर (पाली): गुजरात के राजा कुमारपाल सोलंकी द्वारा 12वीं सदी में निर्मित प्राचीन ऐतिहासिक देवालय।

7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प

  • सोजत की मेहंदी (Sojat Henna):
    • सोजत की लाल-सुर्ख प्राकृतिक मेहंदी पूरे विश्व में विख्यात है; इसे भारत सरकार द्वारा जीआई (GI) टैग प्राप्त है।
  • तेरहताली नृत्य का उद्गम (पादरला गाँव, पाली):
    • लोकदेवता रामदेव जी की आराधना में कांबड़िया पंथ की महिलाओं द्वारा बैठकर किया जाने वाला प्रसिद्ध नृत्य।
    • शरीर पर 13 मंजीरे बांधकर मुंह में तलवार व सिर पर लोटा रखकर कलाबाजी की जाती है (प्रसिद्ध नृत्यांगना: मांगी बाई एवं मोहिनी देवी)।
  • पाली की सूती वस्त्र छपाई (टेक्सटाइल उद्योग):
    • रँगाई-छपाई और पॉपलिन (Poplin) कपड़े के उत्पादन में राजस्थान का अग्रणी केंद्र।

8. प्रमुख विभूतियाँ एवं संस्थान

  • मेजर शैतान सिंह भाटी (बाणासुर के शहीद):
    • 1962 के भारत-चीन युद्ध में रेजांग ला (लद्दाख) की बर्फीली चौकी पर 120 जवानों के साथ अदम्य शौर्य दिखाते हुए वीरगति प्राप्त की; परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित।
  • देपाक (Depa): रणकपुर जैन मंदिर के विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार।
  • पालीवाल ब्राह्मण: प्राचीन जल संचयन तकनीक ‘खड़ीन’ के जनक और राजस्थान के अग्रणी व्यापारिक समुदाय।

9. स्वतंत्रता संग्राम एवं किसान आंदोलन

  • पाली में प्रजामंडल आंदोलन:
    • मारवाड़ लोक परिषद के बैनर तले आउवा, सोजत और पाली में सामंती अत्याचारों व लाग-बाग के विरुद्ध व्यापक जनआंदोलन।
  • विजय सिंह पथिक व जयनारायण व्यास की गतिविधियाँ:
    • पाली मारवाड़ रियासत की जनजागृति का प्रमुख संपर्क केंद्र रहा।

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