मुख्य बिंदु: नागौर जिले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: अहिछत्रपुर (महाभारत काल में जांगल देश/शाकंभरी के चौहानों की प्रारंभिक राजधानी), नागदुर्ग। उपनाम: राजस्थान की धातु नगरी (औजारों की नगरी / City of Tools), संतों व सूफियों की पावन भूमि, पंचायती राज […]
नागौर जिले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
- प्राचीन नाम: अहिछत्रपुर (महाभारत काल में जांगल देश/शाकंभरी के चौहानों की प्रारंभिक राजधानी), नागदुर्ग।
- उपनाम: राजस्थान की धातु नगरी (औजारों की नगरी / City of Tools), संतों व सूफियों की पावन भूमि, पंचायती राज की जन्मभूमि।
- भौगोलिक स्थिति व खनिज:
- भू-आकृति: यह राजस्थान के मध्यवर्ती भाग में स्थित है। लाडनूं-मकराना-नागौर क्षेत्र।
- कूबड़ पट्टी (बांका पट्टी): नागौर और अजमेर के मध्य विस्तृत भूगर्भीय फ्लोराइड युक्त जलपट्टी, जिसके अत्यधिक सेवन से लोगों में फ्लोरोसिस व हड्डियों का टेढ़ापन (कूबड़ निकलना) हो जाता है।
- खनिज संपदा:
- मकराना संगमरमर: विश्व प्रसिद्ध कैल्साइट श्रेणी का सफेद संगमरमर (जिससे आगरा का ताजमहल व कोलकाता का विक्टोरिया मेमोरियल बना)।
- टंगस्टन (डेगाना – रेवत पहाड़ी): भारत की प्रमुख टंगस्टन खान (वुल्फ्रेमाइट अयस्क)।
- जिप्सम: गोट-मांगलोद, भदवासी (राजस्थान में सर्वाधिक भंडार)।
- सफेद सीमेंट: गोटन (Gotan) – राजस्थान का पहला सफेद सीमेंट कारखाना (1984 ई.)।
2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
- प्रारंभिक राजवंश: नागवंशीय शासक (नागदुर्ग के संस्थापक), प्रतिहार, शाकंभरी के चौहान (वासुदेव चौहान द्वारा 551 ई. में सपादलक्ष/अहिछत्रपुर में नींव)।
- राठौड़ शाखा एवं अमरसिंह राठौड़:
- जोधपुर के राव गजसिंह के ज्येष्ठ पुत्र राव अमरसिंह राठौड़ को नागौर की जागीर मिली।
- ‘कटार का धनी’: अमरसिंह राठौड़ अपने स्वाभिमान, अदम्य शौर्य और कटार के प्रयोग हेतु विख्यात थे। शाहजहाँ के भरे दरबार (आगरा किले) में मीर बख्शी सलावत खां को अपशब्द कहने पर एक ही झटके में मार गिराया था।
- मतीरे की राड़ (1644 ई.): नागौर के अमरसिंह राठौड़ और बीकानेर के कर्णसिंह के मध्य सीमा विवाद (मतीरे की बेल) को लेकर युद्ध हुआ।
- भक्त शिरोमणि मीराबाई के पूर्वज: राव दूदा (मेड़ता के संस्थापक) एवं जयमल मेड़तिया (1568 के चित्तौड़ साके के महानायक)।
3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल
- कुराड़ा (परबतसर):
- ताम्र संचय संस्कृति का प्रमुख स्थल; इसे ‘ताम्र पाषाणिक औजारों की नगरी’ कहा जाता है।
- 1934 में यहाँ से बड़ी मात्रा में तांबे के प्राचीन बर्तन, कुल्हाड़ियां और अर्ध-चंद्राकार औजार प्राप्त हुए।
- जायल एवं डीडवाना: प्रागैतिहासिक पुरापाषाण कालीन कुल्हाड़ी, हस्त-कुठार (Hand-axe) और सूक्ष्म पाषाण औजारों के विशाल केंद्र।
4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| अहिछत्रपुर दुर्ग (नागौर किला) | सामंत कैमास / कदमवास (सोमेश्वर चौहान काल) | धान्वन दुर्ग; अपनी अद्वितीय जल-प्रबंधन प्रणाली और फव्वारों हेतु प्रसिद्ध। इसकी प्राचीर पर तोप के गोले दागने पर वे महलों को नुकसान पहुंचाए बिना ऊपर से निकल जाते थे। इसे यूनेस्को का ‘एशिया-पैसिफिक हेरिटेज अवॉर्ड (2002)’ प्राप्त है। |
| मेड़ता का मालकोट दुर्ग | राव मालदेव (1538 ई.) | मारवाड़ के राठौड़ों का सामरिक केंद्र; मेड़तिया राठौड़ों की गढ़ी। |
| कुचामन दुर्ग | जालिम सिंह मेड़तिया | पहाड़ी पर स्थित अभेद्य किला; इसे ‘जागीरी किलों का सिरमौर’ कहा जाता है। यहाँ अपनी स्वतंत्र टकसाल में ‘कुचामनी सिक्के’ ढाले जाते थे। |
| अमरसिंह राठौड़ की 16 खंभों की छतरी | नागौर शहर | पीले बलुआ पत्थर से निर्मित अमरसिंह राठौड़ की वीरता की स्मारक छतरी। |
| बड़े पीर साहब की दरगाह / बुलंद दरवाजा | सुल्तान इल्तुतमिश | नागौर शहर में स्थित ऐतिहासिक विशाल प्रवेश द्वार। |
5. ऐतिहासिक घटनाएँ एवं नागौर दरबार
- नागौर दरबार (नवंबर 1570 ई.):
- मुग़ल सम्राट अकबर द्वारा भारमल (आमेर) के सहयोग से आयोजित।
- उद्देश्य: राजपूताना के शासकों को मुग़ल अधीनता में लाना (अकाल राहत के नाम पर ‘शुक्र तालाब’ का निर्माण कराया)।
- परिणाम: बीकानेर के राव कल्याणमल व उनके पुत्र रायसिंह, जैसलमेर के हरराज भाटी ने अधीनता स्वीकार की; परंतु मारवाड़ के राव चंद्रसेन दरबार छोड़कर चले गए और आजीवन संघर्ष किया।
- पंचायती राज का ऐतिहासिक उद्घाटन (2 अक्टूबर 1959):
- स्वतंत्र भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का शुभारंभ नागौर के बगदरी गाँव से देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया।
6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं सूफी परंपरा
- लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज:
- जन्म स्थल: खरनाल (नागौर) – माघ शुक्ल चतुर्दशी को धौल्या गोत्र के जाट परिवार में।
- लाछां गूजरी की गायों को मेर के मीणों से छुड़ाते हुए घायल हुए और सर्पदंश से वीरगति पाई; ‘काला और बाला के देवता’, ‘कृषि उपकारक देवता’।
- वीर तेजाजी पशु मेला (परबतसर): भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) को लगने वाला राजस्थान का प्रसिद्ध पशु मेला (नागौरी बैलों की बिक्री)।
- लोकदेवता हरिराम जी (झोरड़ा, नागौर):
- सर्पदंश व जहरीले कीड़ों के दंश के इलाज हेतु प्रसिद्ध; इनके मंदिर में ‘सांप की बांबी’ और चरण कमल (प्रतीक) पूजे जाते हैं।
- संत हमीदुद्दीन नागौरी (सुल्तान-उत-तारिकीन):
- ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रमुख शिष्य; इन्होंने नागौर के सुवाल गाँव में रहकर खेती की और शाकाहारी जीवन बिताया।
- उपाधि: ‘सुल्तान-उत-तारिकीन’ (संन्यासियों का सुल्तान); ख्वाजा साहब के बाद राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा उर्स नागौर में भरता है।
- दधिमती माता मंदिर (गोठ-मांगलोद):
- प्रतिहार कालीन (महा-मारू शैली) का प्राचीन शक्तिपीठ; दाधीच (ब्राह्मण) समाज की कुलदेवी; गुप्तकालीन शिलालेख स्थित है।
- भक्त शिरोमणि मीराबाई (कुड़की / मेड़ता):
- जन्म: कुड़की गाँव (रतनसिंह के घर); पालन-पोषण मेड़ता में राव दूदा के पास हुआ। मेड़ता में प्रसिद्ध चारभुजा जी / मीरां मंदिर स्थित है।
- संत रामचरण जी (रामस्नेही संप्रदाय):
- जन्म: सोड़ा गाँव (टोंक/नागौर सीमा); इनकी दीक्षा स्थली व रामस्नेही संप्रदाय की सिंहथल व रेण (दरियाव जी द्वारा स्थापित) शाखाएं प्रसिद्ध हैं। संत दरियाव जी ने रेण (नागौर) में रामस्नेही शाखा शुरू की।
7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प
- नागौरी बैल व अश्व:
- नागौरी नस्ल के बैल अपनी मजबूत कद-काठी, फुर्तीलेपन और कृषि कार्यों में जुताई हेतु पूरे भारत में विख्यात हैं (सुहालक प्रदेश)।
- लोहे के कृषि औजार व हस्तशिल्प:
- नागौर व मेड़ता लोहे की कैंची, चाकू, संडासी, हथौड़े व कृषि उपकरणों (धातु उद्योग) के निर्माण का प्रमुख गढ़ है।
- टांकला की दरियां:
- टांकला गाँव (नागौर) में सूत (कॉटन) और ऊन से हाथ द्वारा बुनी गई कलात्मक दरियां (Durries) प्रसिद्ध हैं।
- कुचामनी ख्याल:
- प्रवर्तक: लक्षीराम जी; हास्य, व्यंग्य और ओजपूर्ण गायकी प्रधान लोकनाट्य शैली।
- कांस्या / बाडिया (बर्तन कला): नागौर के पीतल व कांसे के बर्तन निर्माण की प्राचीन परंपरा।
8. प्रमुख साहित्यकार एवं विद्वान
- अबुल फजल एवं फैजी: मुग़ल सम्राट अकबर के नवरत्नों में शामिल दोनों प्रसिद्ध विद्वान भाई मूल रूप से नागौर के निवासी थे (इनके पिता शेख मुबारक नागौर के प्रतिष्ठित सूफी विद्वान थे, जिन्होंने अकबर का ‘महजरनामा’ तैयार किया था)।
- संत दरियाव जी: रामस्नेही संप्रदाय की ‘रेण शाखा’ के प्रवर्तक; ‘राम’ शब्द में ‘रा’ का अर्थ राम और ‘म’ का अर्थ मोहम्मद बताकर धार्मिक समन्वय स्थापित किया।
- जोधराज / चारण कवि: अमरसिंह राठौड़ की वीरता पर अनेक डिंगल कवियों ने प्रसिद्ध दोहे और ‘रासो’ रचे।
9. स्वतंत्रता संग्राम, किसान आंदोलन एवं प्रजामंडल
- मारवाड़ लोक परिषद व नागौर किसान आंदोलन:
- नागौर मारवाड़ रियासत का प्रमुख अंग था। सामंती शोषण, लाग-बाग और बेगार के विरुद्ध किसानों ने कड़ा संघर्ष किया।
- जयमल मेड़तिया व बालमुकुंद बिस्सा: राष्ट्रीय चेतना के प्रसारक।
- सी.आर. चौधरी व बलदेव राम मिर्धा: नागौर-मारवाड़ अंचल में ‘किसान सभा’ के माध्यम से जाट चेतना व किसान उत्थान के प्रणेता (मिर्धा परिवार का राजनीति में ऐतिहासिक योगदान)।
- लाडनूं (जैन विश्व भारती संस्थान): 1970 में आचार्य तुलसी द्वारा स्थापित; प्रेक्षाध्यान, अहिंसा और अणुव्रत आंदोलन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र।