मुख्य बिंदु: झुंझुनूं जिले (शेखावाटी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: तांबा नगरी (Copper City), शेखावाटी का प्रवेश द्वार, शहीदों/सैनिकों का जिला (City of Martyrs), हवेलियों व भित्तिचित्रों का सिरमौर। स्थापना: 1440 ई. के आसपास जुंझा (झूंझा) नामक जाट के नाम पर […]
झुंझुनूं जिले (शेखावाटी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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उपनाम: तांबा नगरी (Copper City), शेखावाटी का प्रवेश द्वार, शहीदों/सैनिकों का जिला (City of Martyrs), हवेलियों व भित्तिचित्रों का सिरमौर।
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स्थापना:
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1440 ई. के आसपास जुंझा (झूंझा) नामक जाट के नाम पर बसाया गया।
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1450 ई. में मोहम्मद खां (कायमखानी नवाब) ने इसे जीतकर कायमखानी रियासत का केंद्र बनाया।
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1730 ई. में शार्दुल सिंह शेखावत ने कायमखानी नवाब रोहिल्ला खां को पराजित कर झुंझुनूं पर शेखावत शासन स्थापित किया।
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भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
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नदियाँ: कांतली नदी (सीकर से निकलकर झुंझुनूं को दो भागों में बांटती हुई चूरू सीमा पर समाप्त होती है)।
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पहाड़ियाँ: अरावली की उत्तरी शाखाएं — बबाई, खेतड़ी, भोजगढ़ (झुंझुनूं की सबसे ऊँची चोटी – 897 मीटर), लोहार्गल पहाड़ियाँ।
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खनिज संपदा:
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तांबा (Copper): खेतड़ी, सिंघाना, कोलिहान, चांदमारी, बबाई (भारत सरकार का उपक्रम Hindustan Copper Limited – HCL, खेतड़ी 1967 से कार्यरत)।
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लोहा (Iron Ore): डाबला-सिंघाना क्षेत्र (हेमेटाइट अयस्क)।
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2. राजवंश एवं प्रमुख ठिकाने
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कायमखानी मुस्लिम शासक: चौहान शासक करमचंद के धर्म परिवर्तन के बाद ‘कायम खां’ बने और उनके वंशज कायमखानी कहलाए।
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शेखावत राजवंश (शार्दुल सिंह की वंश परंपरा):
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शार्दुल सिंह शेखावत: झुंझुनूं के सबसे प्रतापी शेखावत शासक। 1742 में इनकी मृत्यु के बाद इनकी जागीर इनके 5 पुत्रों में बंटी, जिसे ‘शेखावाटी के पंचपाने’ कहा गया:
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बिसाऊ (ठाकुर केसरी सिंह)
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नवलगढ़ (ठाकुर नवल सिंह)
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मंडावा (ठाकुर नवल सिंह के पुत्र)
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डूंडलोद (ठाकुर केसरी सिंह के पुत्र)
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मलसीसर (ठाकुर जालिम सिंह)
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खेतड़ी ठिकाना (राजा अजीत सिंह):
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राजा अजीत सिंह (1861–1901 ई.): स्वामी विवेकानंद के अनन्य मित्र व परम भक्त।
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1893 में ‘नरेंद्रनाथ दत्त’ को ‘स्वामी विवेकानंद’ नाम राजा अजीत सिंह ने ही दिया था और शिकागो (अमेरिका) विश्व धर्म सम्मेलन में जाने का संपूर्ण प्रबंध व आर्थिक खर्च वहन किया था।
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3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल
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सोनारी (सुनारी) सभ्यता:
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कांतली नदी के तट पर स्थित लोह युगीन (Iron Age) सभ्यता।
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उत्खनन: 1980-81 में राजस्थान पुरातत्व विभाग द्वारा।
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प्रमुख साक्ष्य: भारत में लोहा गलाने की प्राचीनतम भट्ठियां, लोहे के तीर, कुल्हाड़ियां और मातृदेवी की मूर्तियां।
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4. प्रमुख महल, दुर्ग, हवेलियाँ एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| खेतड़ी महल (झुंझुनूं) | भोपाल सिंह (1770 ई.) | इसे ‘शेखावाटी का हवा महल’ और ‘राजस्थान का दूसरा हवा महल’ कहा जाता है। स्तंभों व मेहराबों पर टिकी बहुमंजिला संरचना जिसमें बिना दरवाजों और खिड़कियों के प्राकृतिक वायु प्रवाह होता है। इसी महल को देखकर सवाई प्रताप सिंह ने जयपुर के हवा महल का विचार पाया था। |
| बादलगढ़ दुर्ग (झुंझुनूं) | नवाब फजल खां (17वीं सदी) | शहर की पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक किला। |
| मंडावा का किला व हवेलियाँ | ठाकुर नवल सिंह (1755 ई.) | मंडावा को ‘ओपन आर्ट गैलरी’ (Open Art Gallery) कहा जाता है; चौकानी हवेली, सराफ हवेली, लाडिया हवेली के उत्कृष्ट भित्तिचित्र (बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग का प्रमुख केंद्र)। |
| नवलगढ़ की हवेलियाँ | ठाकुर नवल सिंह | इसे ‘शेखावाटी की स्वर्ण नगरी’ कहा जाता है; पोद्दार हवेली, आठ हवेली परिसर, मोरारका हवेली, भगेरिया हवेली। |
| डूंडलोद का किला | ठाकुर केसरी सिंह (1750 ई.) | अपनी कलात्मक ‘दीवान-ए-खास’ और लकड़ी के नक्काशीदार फर्नीचर हेतु प्रसिद्ध; वर्तमान में हेरिटेज होटल व मारवाड़ी घोड़ों का ब्रीडिंग सेंटर। |
| ईसरदास मोदी की हवेली | सेठ ईसरदास मोदी (झुंझुनूं) | अपने 100 से अधिक कलात्मक झरोखों के लिए प्रसिद्ध। |
| मेड़तणी जी की बावड़ी | शार्दुल सिंह की पत्नी (1783 ई.) | झुंझुनूं की सबसे सुंदर और गहरी कलात्मक बावड़ी। |
5. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ
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रानी सती मंदिर (झुंझुनूं):
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मूल नाम: नारायणी बाई (अग्रवाल समाज); पति: तनधनदास जी।
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इन्हें स्थानीय रूप से ‘दादी जी’ कहा जाता है। भारत का सबसे बड़ा रानी सती मंदिर (भाद्रपद अमावस्या को लक्खी मेला भरता था, अब मेले पर कानूनी रोक है)।
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लोहार्गल तीर्थ (नवलगढ़ तहसील):
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अरावली की पहाड़ियों में स्थित महाभारत कालीन महातीर्थ; मान्यता है कि यहाँ के सूर्यकुंड में स्नान करने से पांडवों के अस्त्र-शस्त्र गल गए थे और उन्हें गोत्र-हत्या के पाप से मुक्ति मिली थी।
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भाद्रपद कृष्ण नवमी से अमावस्या तक ’24 कोसी परिक्रमा’ (मालकेतु की परिक्रमा) आयोजित होती है।
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सकराय माता (शाकंभरी माता): उदयपुरवाटी के निकट स्थित प्राचीन शक्तिपीठ।
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हजरत शक्करबार शाह की दरगाह (नरहड़ शरीफ):
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प्रसिद्ध सूफी संत; इन्हें ‘बागड़ का धनी’ और ‘हजरत हाजिब शक्करबार’ कहा जाता है।
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सांप्रदायिक सद्भाव का अनुपम केंद्र; यहाँ कृष्ण जन्माष्टमी के दिन विशाल उर्स भरता है। पागलपन और मानसिक रोगियों के उपचार हेतु प्रसिद्ध।
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बाबा खेताराम / मनसा माता (उदयपुरवाटी): अरावली पर्वतमाला में स्थित प्रसिद्ध लोकतीर्थ व लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व।
6. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प
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शेखावाटी भित्तिचित्र (Fresco Buno / Arayash):
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हवेलियों, छतरियों और मंदिरों की दीवारों पर गीले चूने के प्लास्टर पर प्राकृतिक रंगों (नील, कत्था, गेरू) से चित्रकारी।
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विषय: लोककथाएं (ढोला-मारू, हीर-रांझा), धार्मिक प्रसंग, और 19वीं सदी में अंग्रेजों के आगमन पर रेलगाड़ी, हवाई जहाज व मोटरकारों के आधुनिक चित्र।
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सैनिक संस्कृति व शौर्य परंपरा:
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भारत में सर्वाधिक सैनिक व सैन्य अधिकारी देने वाला जिला।
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भारत का प्रथम परमवीर चक्र (मरणोपरांत) विजेता: मेजर पीरू सिंह शेखावत (जन्म: बेरी गाँव, झुंझुनूं – 1948 के भारत-पाक युद्ध में ‘तिथवाल’ चौकी पर अद्वितीय शौर्य)।
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हस्तशिल्प व उद्योग:
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लकड़ी का नक्काशीदार एंटीक फर्नीचर।
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मंडावा व बिसाऊ की बंधेज (Tie & Dye) साड़ियां व चुनरी।
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7. प्रमुख साहित्यकार, विभूतियाँ एवं संस्थान
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स्वामी विवेकानंद साधना केंद्र (खेतड़ी): राजा अजीत सिंह के महल में स्थापित स्मृति संस्थान।
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पं. झाबरमल्ल शर्मा: जन्म: जसरापुर (झुंझुनूं); ‘पत्रकारिता के भीष्म पितामह’; राजस्थान के इतिहास व शेखावाटी के साहित्य पर अनेक प्रामाणिक ग्रंथ रचे।
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घनश्याम दास बिड़ला (G.D. Birla): जन्म: पिलानी (झुंझुनूं); भारत के अग्रणी उद्योगपति, स्वतंत्रता सेनानी व महात्मा गांधी के निकट सहयोगी।
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BITS Pilani (बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, 1964): भारत का विश्व विख्यात तकनीकी विश्वविद्यालय (पिलानी, झुंझुनूं)।
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CEERI (केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, 1953): CSIR की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रयोगशाला (पिलानी)।
8. स्वतंत्रता संग्राम, किसान आंदोलन एवं प्रजामंडल
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शेखावाटी किसान आंदोलन (1922–1946 ई.):
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पंचपाने के जागीरदारों द्वारा 50 से अधिक गैर-कानूनी ‘लाग-बाग’ और भू-राजस्व वृद्धि के विरोध में।
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नेतृत्व: चौधरी हरलाल सिंह, ताड़केश्वर शर्मा, घासीराम, नरोत्तम लाल जोशी।
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जयसिंहपुरा हत्याकांड (21 जून 1934, खेतड़ी/झुंझुनूं):
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ठाकुर ईश्वर सिंह के इशारे पर खेत जोत रहे निहत्थे किसानों पर गोलियां चलाई गईं।
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ऐतिहासिक महत्व: यह राजस्थान का पहला ऐसा मामला था जिसमें दोषी जागीरदार को अदालत में सजा सुनाई गई थी।
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नरोत्तम लाल जोशी: झुंझुनूं के प्रजामंडल नेता; 1952 में राजस्थान विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष (First Speaker of Rajasthan Legislative Assembly) बने।
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सुमित्रा सिंह: झुंझुनूं की राजनीतिज्ञ, जो राजस्थान विधानसभा की प्रथम महिला अध्यक्ष (First Woman Speaker, 12वीं विधानसभा) बनीं।