मुख्य बिंदु: धौलपुर जिले (पूर्वी डांग व ब्रज अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: कोठी (धवलपुरी / धवलगिरि)। उपनाम: रेड डायमंड सिटी (Red Diamond City – लाल बलुआ पत्थर के कारण), राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार, तीर्थों का भांजा (मचकुंड)। स्थापना […]
धौलपुर जिले (पूर्वी डांग व ब्रज अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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प्राचीन नाम: कोठी (धवलपुरी / धवलगिरि)।
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उपनाम: रेड डायमंड सिटी (Red Diamond City – लाल बलुआ पत्थर के कारण), राजस्थान का पूर्वी प्रवेश द्वार, तीर्थों का भांजा (मचकुंड)।
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स्थापना व गठन:
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700 ई. में तोमर (तंवर) वंशीय राजा धवलदेव (धोलनदेव) द्वारा चंबल नदी के किनारे धौलपुर बसाया गया।
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15 अप्रैल 1982 को भरतपुर से पृथक कर राजस्थान का 27वाँ स्वतंत्र जिला बनाया गया (क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान के सबसे छोटे जिलों में शामिल)।
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भौगोलिक स्थिति व अक्षांश:
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राजस्थान का सबसे पूर्वी बिंदु: सिलावट गाँव (राजाखेड़ा तहसील) — जहाँ राजस्थान में सर्वप्रथम सूर्योदय व सूर्यास्त होता है।
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नदियाँ एवं जल परियोजनाएं:
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चंबल नदी: धौलपुर और मध्य प्रदेश के मध्य प्राकृतिक व अंतरराज्यीय सीमा बनाती है; चंबल के बीहड़ (Ravines/Badland Topography) और डांग क्षेत्र का विस्तार।
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पार्वती नदी: धौलपुर की प्रमुख आंतरिक नदी (उद्गम: करौली सीमा)।
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पार्वती बांध (आंगई बांध): पार्वती नदी पर स्थित धौलपुर का सबसे बड़ा सिंचाई बांध।
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उर्मिला सागर, रामसागर एवं तालाब-ए-शाही झील: ऐतिहासिक मीठे पानी के जलाशय।
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खनिज संपदा:
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लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone): धौलपुर का प्रसिद्ध लाल पत्थर जिससे दिल्ली का लाल किला, राष्ट्रपति भवन व संसद भवन निर्मित हैं।
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2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
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तोमर वंशीय व यादव शासक: 8वीं-11वीं शताब्दी तक धवलदेव तोमर व यदुवंशी शासकों का नियंत्रण।
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बामरोलिया जाट राजवंश (1805 ई. से):
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मूलतः गोहद (मध्य प्रदेश) के जाट शासक; 1805 में अंग्रेजों व मराठों के समझौते के तहत राणा कीरत सिंह को गोहद के बदले धौलपुर का स्वतंत्र राज्य मिला।
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महाराजा भगवंत सिंह (1857 ई.): 1857 की क्रांति के समय अंग्रेजों के कट्टर समर्थक रहे; इंदौर व ग्वालियर के विद्रोहियों ने इन्हें नजरबंद कर लिया था, बाद में पटियाला की सिख सेना की मदद से मुक्त हुए।
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महाराजा निहाल सिंह: आधुनिक सुधारक; ‘निहाल टावर’ (घंटाघर) का निर्माण शुरू कराया।
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महाराजा उदयभान सिंह: धौलपुर के अंतिम शासक; नरेंद्र मंडल के चांसलर रहे तथा 18 मार्च 1948 को गठित ‘मत्स्य संघ’ के प्रथम राजप्रमुख बने।
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3. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| शेरगढ़ दुर्ग (धौलपुर का किला) | मालदेव राठौड़ / जीर्णोद्धार: शेरशाह सूरी (1540 ई.) | चंबल नदी के तट पर स्थित जल व गिरि दुर्ग; इसे ‘दक्षिण का द्वारगढ़’ कहा जाता है। यह राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के त्रिकोण पर स्थित है। इसमें ‘हुनहुंकार तोप’ और सूफी संत सैयद जमालुद्दीन की दरगाह स्थित है। |
| मचकुंड तीर्थ (Muchkund) | सूर्यवंशी राजा मुचुकुंद | इसे ‘तीर्थों का भांजा’ कहा जाता है (पुष्कर ‘तीर्थों का मामा’ और मातृकुण्डिया ‘तीर्थों की नानी’ है)। मान्यता है कि श्रीकृष्ण के पीछे पड़े राक्षस ‘काल्यावन’ को राजा मुचुकुंद ने दृष्टिपात कर भस्म किया था। ऋषि पंचमी व देवछठ को लक्खी मेला भरता है। |
| निहाल टावर (घंटाघर) | महाराजा निहाल सिंह (प्रारंभ 1880), पूर्ण: रामसिंह (1910) | भारत का सबसे बड़ा 8 मंजिला क्लॉक टावर (घंटाघर); लाल पत्थर से निर्मित, जिसमें 7 धातुओं से बनी विशाल घड़ी लगी है। |
| तालाब-ए-शाही | मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के मनसबदार सुलेह खां (1617 ई.) | शाहजहाँ के शिकारगाह हेतु निर्मित सुंदर झील व शाही महल। |
| कमल के फूल का बाग (बाग-ए-नीलोफर) | मुग़ल सम्राट बाबर | मचकुंड के निकट स्थित; बाबर ने अपनी आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में इस बगीचे और चट्टान काटकर बनाए गए कमल के आकार के फव्वारे का उल्लेख किया है। |
| खानपुर महल | मुग़ल काल | शिकारगाह के रूप में प्रयुक्त आकर्षक ऐतिहासिक महल। |
4. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध
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सामूगढ़ का युद्ध (29 मई 1658 ई.):
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आगरा-धौलपुर सीमा पर दारा शिकोह और औरंगजेब के बीच मुग़ल उत्तराधिकार युद्ध; औरंगजेब की विजय।
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जजाऊ का युद्ध (18 जून 1707 ई.):
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धौलपुर-आगरा सीमा पर औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसके पुत्रों मुअज्जम (बहादुरशाह प्रथम) और आजम के बीच युद्ध; मुअज्जम विजयी होकर बादशाह बना।
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5. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ
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चौपड़ा शिव मंदिर: 18वीं सदी में निर्मित प्राचीन मंदिर; अष्टकोणीय चौपड़े के आकार में जलकुंड स्थित है।
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बाबू महाराज का मंदिर (बाड़ी): स्थानीय जनमानस के परम पूज्य लोक संत; भाद्रपद शुक्ल एकादशी को विशाल मेला भरता है।
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गुरुद्वारा शेर शिकार साहब: मचकुंड के निकट स्थित; मान्यता है कि सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोविंद सिंह जी ने ग्वालियर जाते समय यहाँ एक खूंखार शेर का तलवार के एक ही वार से शिकार कर लोगों की रक्षा की थी।
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संत वनखंडी महादेव मंदिर: बीहड़ों में स्थित प्राचीन तपोस्थली शिवालय।
6. कला, संस्कृति, हस्तशिल्प एवं वन्यजीव
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धौलपुर स्टोन क्राफ्ट: लाल व बलुआ पत्थर पर नक्काशी, कलात्मक जाली कार्य, तोरण द्वार व छतरियों का निर्माण।
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राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य (1979):
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राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त अंतरराज्यीय अभयारण्य।
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घड़ियाल (Gharial), मगरमच्छ और विलुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन (Gangetic Dolphin / गांगेय सूंस) का प्रमुख प्राकृतिक संरक्षण केंद्र।
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रामसागर व वन विहार वन्यजीव अभयारण्य: सांभर, चीतल और प्रवासी जलीय पक्षियों का सुरक्षित प्राकृतिक आवास।
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डांग संस्कृति व लोक गायन: ब्रज भाषा व कनौजी का प्रभाव; कन्हैया दंगल और रसिया गायन।
7. स्वतंत्रता संग्राम, तसीमो कांड एवं प्रजामंडल
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धौलपुर प्रजामंडल (1936-1938 ई.):
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संस्थापक: कृष्णदत्त पालीवाल, ज्वाला प्रसाद जिज्ञासु, जौहरीलाल इंदु और मलूकचंद।
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तसीमो कांड (11 अप्रैल 1947) — राजस्थान का ऐतिहासिक तिरंगा बलिदान:
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तसीमो गाँव में प्रजामंडल की सभा में नीम के पेड़ पर तिरंगा झंडा फहराने को लेकर पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं।
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तिरंगे की रक्षा करते हुए छत्तर सिंह परमार और पंचम सिंह कुशवाह शहीद हो गए। (यह तिरंगे की आन-बान-शान के लिए दिया गया अमर बलिदान था)।
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मत्स्य संघ व राजस्थान एकीकरण (18 मार्च 1948):
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प्रथम चरण में धौलपुर का विलय मत्स्य संघ में हुआ।
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राजप्रमुख: धौलपुर के महाराजा उदयभान सिंह।
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शंकरराव देव समिति की सिफारिश: धौलपुर व भरतपुर की जनता का रुझान उत्तर प्रदेश में मिलने का था, परंतु समिति की जनमत रिपोर्ट के आधार पर 15 मई 1949 को (5वें चरण में) इसे राजस्थान संघ में सम्मिलित किया गया।
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