प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

समसामयिकी दिनांक : 27 सितंबर 2026

समसामयिक पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 28 September 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान सुजस बुलेटिन (27 सितंबर, 2026) के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण और संपूर्ण करंट अफेयर्स नोट्स नीचे दिए गए हैं: 1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: राजस्थान की उल्लेखनीय प्रगति राष्ट्रीय रैंकिंग: भारत सरकार द्वारा राज्यों के योजना-विशिष्ट मापदंडों के आधार पर तैयार की गई रैंकिंग में राजस्थान ने 43.5 अंक प्राप्त कर […]
राजस्थान सुजस बुलेटिन (27 सितंबर, 2026) के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण और संपूर्ण करंट अफेयर्स नोट्स नीचे दिए गए हैं:

1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: राजस्थान की उल्लेखनीय प्रगति

  • राष्ट्रीय रैंकिंग: भारत सरकार द्वारा राज्यों के योजना-विशिष्ट मापदंडों के आधार पर तैयार की गई रैंकिंग में राजस्थान ने 43.5 अंक प्राप्त कर देश में चौथा स्थान हासिल किया है. मूल्यांकन में असम प्रथम और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहे.
  • वित्तीय लाभ: खरीफ 2016 से खरीफ 2026 तक किसानों द्वारा 7,800 करोड़ रुपये का प्रीमियम भरने के एवज में 35,600 करोड़ रुपये का फसल बीमा क्लेम भुगतान किया गया है, जो किसानों द्वारा दिए गए प्रीमियम का 4.5 गुना है.
  • डिजिटल और तकनीक आधारित प्रयास:
    • राजस्थान के लगभग 90 प्रतिशत फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiments) ऐप के माध्यम से ऑनलाइन हुए, जो देश में सर्वाधिक हैं और इसके लिए राज्य को पूरे 10 अंक मिले.
    • येसटेक (Yes-Tech) आधारित उपज आकलन को अपनाने में भी राज्य को पूरे 10 अंक प्राप्त हुए हैं.
    • फसल बीमा पोर्टल के साथ भूमि अभिलेख का एकीकरण करने वाला राजस्थान देश का तीसरा राज्य बन गया है, जिसके तहत राज्य के 89 प्रतिशत गांवों के भू-अभिलेख का एकीकरण किया जा चुका है.

2. द्रव्यवती नदी पर सौर ऊर्जा संयंत्र परियोजना

  • पहल: जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड (RRECL) के माध्यम से द्रव्यवती नदी पर स्थित 6 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) एवं 2 गार्डन की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं.
  • क्षमता एवं बचत: इस 5 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना से प्रतिदिन औसतन 20,000 यूनिट यानी प्रतिवर्ष लगभग 72 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिससे जेडीए को प्रतिवर्ष लगभग 6 करोड़ रुपये की विद्युत बचत संभावित है.

3. ‘राजनिवेश पोर्टल’ और औद्योगिक निवेश

  • निवेश आशय: अगस्त 2026 में राजनिवेश पोर्टल पर 48,453.05 करोड़ रुपये का निवेश आशय दर्ज हुआ है, जिसमें भूमि, उपयोगिताएं, श्रम, सीमेंट, पर्यटन और अचल संपत्ति प्रमुख क्षेत्र रहे.
  • स्वीकृतियां: अप्रैल से अगस्त के बीच 25,745 आवेदनों को स्वीकृति दी गई, जिसमें जयपुर अग्रणी जिला रहा.
  • रक्षा विनिर्माण: रीको (RIICO) की भूमि आवंटन नीति के तहत किशनगढ़ के उदयपुर खुर्द औद्योगिक क्षेत्र में इम्पीरियल आर्मरी प्राइवेट लिमिटेड को रक्षा एवं गोला-बारूद विनिर्माण परियोजना के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है, जिसमें 162 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है.

4. सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग की समीक्षा बैठक

  • ई-मित्र सेवाएं: ई-मित्र प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 1100 सेवाएं दी जा रही हैं तथा 75 हजार से अधिक भौतिक कियोस्क कार्यरत हैं. ‘ई-मित्र व्हाट्सएप गवर्नेंस’ के जरिए 109 सेवाएं उपलब्ध हैं.
  • साइबर सुरक्षा: मुख्य सचिव ने सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा करने तथा विभागीय कर्मियों के लिए हर माह ‘साइबर स्वच्छता’ कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए.
  • स्टार्टअप इकोसिस्टम: ‘आई-स्टार्ट’ के तहत 9,357 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं, जिनसे 49,438 से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं और 3,524 से अधिक महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप शामिल हैं.

5. विशेष जिला अध्ययन: दौसा (राजस्थान की प्राचीन आत्मा)

  • नामकरण एवं इतिहास: ‘दौसा’ नाम संस्कृत शब्द ‘धौ-सा’ (Dhau-sa) से बना है जिसका अर्थ ‘स्वर्ग जैसा सुंदर’ होता है. इसे ‘देव नगरी’ भी कहा जाता है और यह पूर्ववर्ती कछवाहा राजवंश का पहला मुख्यालय था.
  • प्रमुख पर्यटन स्थल:
    • चांद बावड़ी (आभानेरी): जयपुर-आगरा रोड पर स्थित आभानेरी में आठवीं शताब्दी में निर्मित यह बावड़ी भारत की सबसे गहरी और बड़ी बावड़ियों में से एक है, जो 19.5 मीटर गहरी और 13 मंजिला (1000 सीढ़ियों वाली) है. पर्यटन विभाग द्वारा यहां प्रसिद्ध ‘आभानेरी उत्सव’ आयोजित किया जाता है.
    • हर्षत माता मंदिर (आभानेरी): चांद बावड़ी के पास स्थित यह मंदिर हर्ष और उल्लास की देवी हर्षत माता को समर्पित है.
    • भंडारेज: महाभारत काल में ‘भद्रवती’ के नाम से जाना जाने वाला यह क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक दीवारों, कलात्मक जालियों, भंडारेज बावड़ी और भद्रवती पैलेस के लिए प्रसिद्ध है.

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