प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

बाड़मेर: ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं साहित्यिक परिदृश्य

बाड़मेर, राजस्थान जिला दर्शन (District GK) पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
लॉगिन
1 (आज: 0)
शेयर: WA TG FB 𝕏 सुधार सुझाएँ
सत्यापित: 31 August 2026
मुख्य बिंदु: बाड़मेर जिले (मालाणी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: थार की कला व हस्तशिल्प नगरी, मालाणी प्रदेश, राजस्थान की दुबई (तेल/पेट्रोलियम भंडार के कारण), बाहाड़मेर। स्थापना: 13वीं शताब्दी में परमार शासक राव बाहड़ (बाहाड़ राव) द्वारा (पहाड़ी पर बाहाड़मेर बसाया […]

बाड़मेर जिले (मालाणी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:

1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य

  • उपनाम: थार की कला व हस्तशिल्प नगरी, मालाणी प्रदेश, राजस्थान की दुबई (तेल/पेट्रोलियम भंडार के कारण), बाहाड़मेर।
  • स्थापना: 13वीं शताब्दी में परमार शासक राव बाहड़ (बाहाड़ राव) द्वारा (पहाड़ी पर बाहाड़मेर बसाया गया)।
  • भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
    • नदियाँ: लूनी नदी (बालोतरा तक इसका पानी मीठा रहता है, उसके बाद खारा हो जाता है), सूकड़ी।
    • पहाड़ियाँ: छप्पन की पहाड़ियाँ (सिवाना क्षेत्र में गोलाकार पहाड़ियाँ; नाकोड़ा पर्वत), हल्देश्वर पहाड़ी।
    • बालुका स्तूप: महाबार के रेतीले धोरे (Mahabar Sand Dunes)।
    • खनिज व ऊर्जा:
      • खनिज तेल (पेट्रोलियम): मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, शक्ति, कामेश्वरी, सरस्वती आदि प्रमुख तेल क्षेत्र।
      • लिग्नाइट कोयला: गिरल, कपूरड़ी, जालीपा, भादरेश (गिरल में राज्य का पहला गैसीकरण आधारित ताप विद्युत संयंत्र)।
      • बेंटोनाइट व मुल्तानी मिट्टी: बाड़मेर प्रमुख उत्पादक क्षेत्र।

2. राजवंश एवं प्रमुख शासक

  • राजवंश: परमार वंश (प्रारंभिक शासक किराडू क्षेत्र), प्रतिहार, चौहान और बाद में राठौड़ वंश (मालाणी शाखा)।
  • प्रमुख शासक व व्यक्तित्व:
    • रावल मल्लीनाथ जी (14वीं सदी): मारवाड़ के प्रतापी वीर योद्धा, सिद्ध संत व लोकदेवता; इनके नाम पर पूरे क्षेत्र का नाम ‘मालाणी’ पड़ा। 1378 ई. में फिरोजशाह तुगलक व मालवा के सूबेदार निजामुद्दीन की संयुक्त सेना को पराजित किया।
    • राव जगमाल: मल्लीनाथ जी के वीर पुत्र, जिन्होंने गुजरात की सेना से युद्ध कर अमूल्य सेवाएं दीं।
    • राव कान्हड़दे परमार: किराडू के प्रारंभिक शासक।

3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल

  • तिलवाड़ा सभ्यता:
    • लूनी नदी के तट पर स्थित मध्य पाषाण कालीन (Mesolithic) स्थल।
    • उत्खनन: वी.एन. मिश्र (1967-68 ई.)।
    • यहाँ से पशुपालन और अग्नि कुंडों के प्राचीन साक्ष्य मिले हैं।
  • किराडू (प्राचीन नाम: किरातकूप):
    • 11वीं-12वीं शताब्दी में परमारों की राजधानी; महा-मारू एवं गुर्जर-प्रतिहार स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट केंद्र।

4. प्रमुख दुर्ग, मंदिर एवं स्थापत्य

स्मारक / स्थल निर्माता प्रमुख विशेषता
किराडू के मंदिर परमार शासक (11वीं-12वीं सदी) 5 मंदिरों का समूह (मुख्य मंदिर: सोमेश्वर महादेव); इसे ‘राजस्थान का खजुराहो’ कहा जाता है। अपनी उत्कृष्ट कामुक व बारीक मूर्तिकला के लिए विख्यात।
सिवाना दुर्ग (गढ़ सिवाना) वीर नारायण पंवार (954 ई.) हल्देश्वर पहाड़ी पर स्थित; इसे ‘जालौर दुर्ग की कुंजी’ और ‘मारवाड़ के राजाओं की शरणस्थली’ (मालदेव व चंद्रसेन का आश्रय स्थल) कहा जाता है। (ऐतिहासिक दृष्टि से बाड़मेर/बालोतरा अंचल)।
नाकोड़ा जैन तीर्थ (मेवानगर) आलमशाह काल में जीर्णोद्धार 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित; इसे ‘हाथ का हुजूर’ व ‘जागती ज्योत’ कहा जाता है; भैरव जी की चमत्कारी प्रतिमा स्थित है।
कोटड़ा का किला (शिव तहसील) परमार शासक पहाड़ी पर स्थित प्राचीन सामरिक महत्व का दुर्ग।
बटाडू का कुआं (बायतु) रावल गुलाब सिंह सफेद संगमरमर से निर्मित कलात्मक कुआं; इसे ‘रेगिस्तान का जलमहल’ कहा जाता है।
पीपलूद (हल्देश्वर महादेव) प्राकृतिक तीर्थ छप्पन की पहाड़ियों में स्थित; अत्यधिक ठंडक और वर्षा के कारण इसे ‘राजस्थान का लघु माउंट आबू’ कहा जाता है।

5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध एवं सिवाना के साके

  • सिवाना का प्रथम साका (1308 ई.):
    • आक्रमणकारी: अलाउद्दीन खिलजी।
    • शासक/सेनापति: शीतलदेव (सातलदेव) व सोमा।
    • भायला पंवार के विश्वासघात से दुर्ग का पतन; वीरांगनाओं ने जौहर किया। खिलजी ने सिवाना का नाम बदलकर ‘खैराबाद’ रखा।
  • सिवाना का द्वितीय साका (1582 ई.):
    • अकबर की सेना (मोटा राजा उदयसिंह के नेतृत्व में) का आक्रमण; वीर कल्ला रायमलोत ने केसरिया किया और रानी हाड़ी भानकंवर के नेतृत्व में जौहर हुआ।

6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ

  • लोकदेवता रावल मल्लीनाथ जी (तिलवाड़ा):
    • जन्म: गोपड़ी (बाड़मेर); गुरु: उगमसी भाटी; पत्नी: रानी रूपादे (स्वयं पूज्य लोकदेवी)।
    • 1399 ई. में मारवाड़ में कुंडा पंथ की स्थापना की और हरि-कीर्तन (मेगा संत सम्मेलन) आयोजित कराया।
    • मल्लीनाथ पशु मेला (तिलवाड़ा): चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी तक लूनी नदी के पेटे में लगने वाला राजस्थान का सबसे प्राचीन पशु मेला (थारपारकर व कांकरेज नस्ल के गौवंश व मालाणी नस्ल के घोड़ों की खरीद-फरोख्त)।
  • आलम जी (धोरीमन्ना):
    • जैतमलोत राठौड़; धोरीमन्ना की रेतीली ढाणी में मंदिर स्थित है, जिसे ‘घोड़ों का तीर्थ स्थल’ कहा जाता है।
  • रानी भटियाणी (जसोल):
    • लोकदेवी स्वरूप पूज्य; इन्हें स्थानीय रूप से ‘माजीसा’ कहा जाता है (मेला: भाद्रपद व माघ वदी त्रयोदशी)।
  • ब्रह्मा मंदिर (आसोतरा):
    • पुष्कर के बाद भारत का दूसरा प्रमुख ब्रह्मा जी का मंदिर; इसका निर्माण संत खेताराम जी महाराज ने 1984 में करवाया था।
  • नागणेची माता (नागाणा गाँव):
    • राठौड़ों की कुलदेवी; 18 भुजाओं वाली काष्ठ प्रतिमा जिसे राव धूहड़ कर्नाटक से लाए थे।

7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प

  • अजरक प्रिंट व मलीर प्रिंट:
    • अजरक प्रिंट: लाल और नीले (Indigo) रंग की दोनों तरफ छपाई (ज्यामितीय आकृतियाँ)।
    • मलीर प्रिंट: कत्थई (काला-भूरा) रंग की एकतरफा छपाई।
    • खत्री समुदाय द्वारा लकड़ी के ठप्पों (Blocks) से तैयार।
  • कशीदाकारी व पैचवर्क (Applique Work):
    • दर्पण जड़ित कशीदाकारी और रल्लियां (पारंपरिक रजाई/बिछौने) विश्व प्रसिद्ध हैं (प्रसिद्ध शिल्पी: रूमा देवी – नारी शक्ति पुरस्कार विजेता)।
  • काष्ठ नक्काशी व फर्नीचर:
    • शीशम व रोहिड़े की लकड़ी पर बारीक जालीदार नक्काशीदार फर्नीचर।
  • लोक नृत्य व संगीत:
    • गैर नृत्य: कनाना और लाखेटा गाँव की आंगी-बांगी गैर और तलवारों की गैर।
    • थार महोत्सव: बाड़मेर के लोक जीवन और संस्कृति को प्रदर्शित करने वाला राज्य स्तरीय वार्षिक उत्सव।
    • लंगा व मांगणियार लोक गायकों का पारंपरिक गढ़।

8. प्रमुख विभूतियाँ एवं संस्थान

  • रूमा देवी: बाड़मेर की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता व हस्तशिल्प डिजाइनर; ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु ‘नारी शक्ति पुरस्कार (2018)’ से सम्मानित।
  • मालाणी नस्ल के घोड़े: अपनी गति, कद-काठी और सुंदरता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध।
  • थारपारकर व कांकरेज गाय: पश्चिमी राजस्थान की उच्च दुग्ध उत्पादक देशी गौवंश नस्लें।
  • उत्तरलाई वायुसेना स्टेशन (Uttarlai AFB): भारत का पहला भूमिगत हवाई अड्डा (Underground Airbase)।

9. स्वतंत्रता संग्राम एवं किसान आंदोलन

  • बाड़मेर में जन जागृति:
    • मारवाड़ लोक परिषद और जयनारायण व्यास के आंदोलनों का सीधा प्रभाव।
    • वृद्ध भारत समाज व मारवाड़ किसान सभा: जागीरदारी व ‘बैठ-बेगार’ प्रथा के विरुद्ध आंदोलन।
  • गुड़ामालानी किसान संघर्ष: किसानों ने लाग-बाग और गैर-कानूनी करों के विरुद्ध संगठित मोर्चा खोला।
  • हरिभाऊ किंकर व किशनलाल जोशी: बाड़मेर अंचल में शिक्षा व चेतना के प्रचारक।

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

नया संदर्भ / संशोधन जोड़ें
इस आलेख पर अभी कोई बाह्य संदर्भ दर्ज नहीं है। यदि आपके पास प्रामाणिक संदर्भ है तो यहाँ क्लिक करके जोड़ें।

विद्यार्थी चर्चा (0)

विद्यार्थी चर्चा में भाग लेने के लिए कृपया लॉगिन करें।