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अलवर: ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं साहित्यिक परिदृश्य

अलवर, राजस्थान जिला दर्शन (District GK) पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 31 August 2026
मुख्य बिंदु: अलवर जिले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: राजस्थान का सिंहद्वार, पूर्वी राजस्थान का कश्मीर, साल्व जनपद, मत्स्य अंचल का प्रमुख नगर। स्थापना: 25 नवंबर 1775 को कछवाहा वंश की नरूका शाखा के राव राजा प्रताप सिंह द्वारा अलवर राज्य की […]

अलवर जिले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:

1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य

  • उपनाम: राजस्थान का सिंहद्वार, पूर्वी राजस्थान का कश्मीर, साल्व जनपद, मत्स्य अंचल का प्रमुख नगर।
  • स्थापना: 25 नवंबर 1775 को कछवाहा वंश की नरूका शाखा के राव राजा प्रताप सिंह द्वारा अलवर राज्य की स्वतंत्र स्थापना की गई।
  • भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
    • नदियाँ: रूपारेल (उद्गम: उदयनाथ की पहाड़ी, थानागाजी), साबी (सेवर की पहाड़ियों से निकलकर बहरोड़/अलवर क्षेत्र से होते हुए हरियाणा जाती है), सोटा, चांदा।
    • झीलें व जलस्रोत:
      • सिलीसेढ़ झील: 1845 ई. में महाराजा विनय सिंह ने अपनी रानी ‘शीला’ के लिए छह मंजिला महल (लेक पैलेस) और झील का निर्माण कराया। इसे ‘राजस्थान का नंदनकानन’ कहा जाता है।
      • जयसमंद झील (अलवर): महाराजा जयसिंह द्वारा रूपारेल के पानी को रोककर निर्मित।
      • मानसरोवर बांध व विजय सागर बांध।
    • पहाड़ियाँ व पठार: अरावली की उत्तरी श्रेणियाँ, कांकणवाड़ी का पठार, क्रॉस्का का पठार (सरिस्का क्षेत्र), उदयनाथ की पहाड़ी।

2. राजवंश एवं प्रमुख शासक

  • राजवंश: कछवाहा राजपूतों की नरूका शाखा (कल्याणोत नरूका)।
  • प्रमुख शासक व योगदान:
    • राव राजा प्रताप सिंह (1775–1791 ई.): माचेड़ी के जागीरदार से अलवर राज्य के स्वतंत्र संस्थापक बने।
    • महाराजा बख्तावर सिंह (1791–1815 ई.): ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से 1803 में सर्वप्रथम रक्षात्मक व आक्रामक संधि (लॉर्ड लेक के समय लासवाड़ी युद्ध के बाद) करने वाले शासक। इनकी पासवान ‘मूसी महारानी’ थीं।
    • महाराजा विनय सिंह (1815–1857 ई.): स्थापत्य कला के महान संरक्षक; सिलीसेढ़ लेक पैलेस और मूसी महारानी की 80 खंभों की छतरी का निर्माण कराया। अलवर चित्रकला का स्वर्णकाल।
    • महाराजा मंगल सिंह: 1875 में मेयो कॉलेज (अजमेर) में प्रवेश लेने वाले प्रथम छात्र।
    • महाराजा जयसिंह प्रभाकर (1892–1937 ई.): प्रखर राष्ट्रवादी व विद्वान शासक; तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया; 1933 में तिजारा दंगों व किसान आंदोलन के कारण अंग्रेजों ने इन्हें पदच्युत कर पेरिस निर्वासित कर दिया, जहाँ इनका निधन हुआ।
    • महाराजा तेजसिंह: स्वतंत्रता एवं मत्स्य संघ के गठन (1948) के समय अलवर के अंतिम शासक।

3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं ऐतिहासिक स्थल

  • भानगढ़ (अजबगढ़-भानगढ़):
    • 1573 ई. में भगवंत दास द्वारा बसाया गया ऐतिहासिक नगर।
    • वर्तमान में यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित ‘रहस्यमयी/भूतहा शहर’ (Ruined Heritage City) कहलाता है।
  • नीलकंठ महादेव (राजगढ़): बड़गूजर शासक अजयपाल द्वारा 10वीं सदी में निर्मित प्रतिहार शैली का भव्य मंदिर समूह; नौगजा जैन प्रतिमा (पार्श्वनाथ) स्थित है।
  • राठ क्षेत्र (कोटपूतली-बहरोड़/अलवर सीमा): अहिरवाटी/राठी बोली व संस्कृति का ऐतिहासिक केंद्र।

4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य

स्मारक / स्थल निर्माता प्रमुख विशेषता
बाला किला (अलवर दुर्ग / बड़ा किला) हसन खां मेवाती (प्रारंभ: निकुंभ राजपूत) अरावली की 1000 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित; इसे ‘आंख वाला किला’ या ‘कुंवारा किला’ (किसी बड़े आक्रमणकारी द्वारा सीधे न जीता गया) कहा जाता है। बाबर ने खानवा युद्ध के बाद एक रात यहाँ विश्राम किया था और जहांगीर को सलीम महल में 3 वर्ष नजरबंद रखा गया था। 52 बुर्जों वाला दुर्ग।
कांकणवाड़ी दुर्ग सवाई जयसिंह द्वितीय सरिस्का के घने जंगलों में स्थित पठारी किला; औरंगजेब ने अपने बड़े भाई दारा शिकोह को उत्तराधिकार युद्ध में बंदी बनाकर इसी किले में कैद रखा था।
सिटी पैलेस (विनय विलास महल) राजा बख्तावर सिंह व विनय सिंह (1793 ई.) राजपूत और मुग़ल स्थापत्य का उत्कृष्ट समन्वय; इसके ऊपरी भाग में राजस्थान का प्रसिद्ध अलवर संग्रहालय (Museum) स्थित है, जिसमें बाबरनामा की पांडुलिपि व 80 फीट लंबा कुरान रखा है।
मूसी महारानी की छतरी महाराजा विनय सिंह (1815 ई.) महाराजा बख्तावर सिंह व उनकी रानी मूसी महारानी की स्मृति में निर्मित 80 खंभों की दो मंजिला छतरी; निचली मंजिल लाल पत्थर व ऊपरी मंजिल सफेद संगमरमर से बनी है। रामायण व महाभारत के भित्तिचित्र उकेरे गए हैं।
फतेहगंज का गुंबद मुग़ल काल (1547 ई.) मुग़ल सूबेदार फतेह खां का पांच मंजिला मकबरा; हिंदू-इस्लामिक शैली का सुंदर संगम।
नीमराणा की बावड़ी / फोर्ट टोडरमल द्वारा बावड़ी (9 मंजिला) नीमराणा फोर्ट पैलेस वर्तमान में विख्यात ‘हेरिटेज रिजॉर्ट’ है; 9 मंजिला बावड़ी वास्तुशिल्प का बेजोड़ नमूना है।

5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध एवं घटनाएँ

  • लासवाड़ी का युद्ध (1 नवंबर 1803): अलवर के निकट ब्रिटिश जनरल लॉर्ड लेक और मराठा सेनापति दौलतराव सिंधिया के बीच लड़ा गया निर्णायक युद्ध; अंग्रेजों की विजय के बाद अलवर-अंग्रेज संधि हुई।
  • नीमूचाणा हत्याकांड (14 मई 1925):
    • अलवर के महाराजा जयसिंह द्वारा जंगली सूअरों के संरक्षण व लगान वृद्धि के विरोध में नीमूचाणा गाँव में जुटे किसानों पर कमांडर छाजू सिंह ने अंधाधुंध गोलियां चलवाईं।
    • सैकड़ों किसान शहीद हुए। महात्मा गांधी ने ‘यंग इंडिया’ में इसे ‘दोहरी डायरशाही’ (Dyerism Double Distilled) और ‘जलियांवाला बाग से भी अधिक वीभत्स’ कहा।
  • तिजारा दंगा (1932-33 ई.): मेव आंदोलन के दौरान हुए तनाव के चलते महाराजा जयसिंह को राज्य छोड़ना पड़ा।

6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं सूफी परंपरा

  • भर्तृहरि धाम (सरिस्का):
    • उज्जैन के राजा व महान वैरागी संत भर्तृहरि (संस्कृत ग्रंथ: नीतिशतक, वैराग्यशतक, श्रृंगारशतक के रचयिता) की तपोभूमि व समाधि स्थल।
    • नाथ संप्रदाय का प्रसिद्ध तीर्थ; भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को ‘कनफटे जोगियों’ का लक्खी मेला भरता है।
  • पांडुपोल हनुमान मंदिर (सरिस्का):
    • महाभारत काल में भीम द्वारा गदा मारकर रास्ता बनाने की मान्यता; यहाँ भगवान हनुमान की शयन मुद्रा (लेटी हुई प्रतिमा) स्थित है।
  • तिजारा जैन मंदिर (चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र):
    • आठवें जैन तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु को समर्पित प्रसिद्ध दिगंबर जैन तीर्थ स्थल।
  • संत लालदास जी:
    • लालदासी संप्रदाय के प्रवर्तक; जन्म: धोलीधूब (अलवर), समाधि: शेरपुर (अलवर)।
    • दीक्षा: तिजारा के मुस्लिम संत गदन चिश्ती से; हिंदू-मुस्लिम एकता, सत्य और श्रम के पक्षधर संत।
  • संत चरणदास जी:
    • जन्म: डेहरा (अलवर) (1703 ई.); प्रधान पीठ: दिल्ली; 42 नियमों का प्रतिपादन किया।
    • 1739 में ईरान के शासक नादिरशाह के दिल्ली आक्रमण की सटीक भविष्यवाणी की थी।
    • प्रमुख शिष्याएं: दयाबाई (दयाबोध, विनय मालिका) एवं सहजोबाई (सहज प्रकाश – ‘सोलह तिथि’)।
  • नारायणी माता (बरवा डूंगरी, राजगढ़):
    • सैन (नाई) समाज की कुलदेवी व मीणा समुदाय की आराध्य देवी।

7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प

  • अलवर चित्रकला शैली:
    • जयपुर व मुग़ल (ईरानी) शैली का सुंदर मिश्रण।
    • स्वर्णकाल: महाराजा विनय सिंह का शासनकाल।
    • प्रमुख विशेषताएँ: वेश्याओं/गणिकाओं के स्वतंत्र चित्र, योगासन मुद्रा के चित्र, हाथी दांत के फलकों पर लघु चित्रण (Miniature on Ivory), चावल के दानों पर चित्रकारी।
    • प्रसिद्ध चित्रकार: बलदेव, डालूराम, मूलचंद, जमुनादास, छोटेलाल।
    • शेख सादी के ‘गुलिस्तां’ ग्रंथ का चित्रांकन: विनय सिंह के समय बलदेव व गुलाम अली द्वारा 50,000 रुपए की लागत से स्वर्ण स्याही से तैयार।
  • लोक कला व संगीत:
    • भपंग वाद्ययंत्र: तुम्बे (लौकी) से बना तत्व वाद्य; जोगी जाति द्वारा बजाया जाता है।
    • जहूर खां मेवाती व उमर फारूक मेवाती: भपंग के अंतरराष्ट्रीय जादूगर (प्रसिद्ध वादक)।
    • मेवाती बोली: मेवात क्षेत्र (अलवर-भरतपुर) की प्रमुख बोली; डिंगल व ब्रज का संगम।
  • खानपान व उत्पाद:
    • अलवर का मावा / कलाकंद: ठाकुर बाबा राजसिंह द्वारा 1947 में शुरू किया गया प्रसिद्ध मावा मिष्ठान्न (मिल्क केक)।
    • कागजी पॉटरी (Paper Mache): पतली व पारदर्शी कागजी मिट्टी के बर्तन (अलवर की विशेषता)।

8. प्रमुख साहित्यकार, पर्यावरणविद एवं संस्थान

  • हसन खां मेवाती: मेवात के ऐतिहासिक शासक; 1527 में खानवा युद्ध में राणा सांगा की ओर से बाबर के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति पाई।
  • डॉ. राजेंद्र सिंह: ‘जल पुरुष’ (Waterman of India); अलवर के ‘तरुण भारत संघ’ (TBS) के माध्यम से जोहड़ व जल संरक्षण की प्राचीन पद्धतियों को पुनर्जीवित किया (रेमन मैग्सेसे व स्टॉकहोम वाटर प्राइज विजेता)।
  • सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य / टाइगर रिजर्व:
    • 1955 में अभयारण्य, 1978 में राजस्थान का दूसरा टाइगर रिजर्व घोषित।
    • हरे कबूतरों (Green Pigeons) के लिए प्रसिद्ध।
    • मोरों का सर्वाधिक घनत्व और रीसस बंदरों का प्राकृतिक वास।

9. स्वतंत्रता संग्राम, प्रजामंडल एवं मत्स्य संघ

  • अलवर प्रजामंडल (1938 ई.):
    • संस्थापक: पं. हरिनारायण शर्मा एवं कुंजबिहारी लाल मोदी।
    • पं. हरिनारायण शर्मा ने छुआछूत निवारण हेतु ‘अस्पृश्यता निवारण संघ’, ‘वाल्मीकि संघ’ और ‘आदिवासी संघ’ बनाए।
  • मेव किसान आंदोलन (1932 ई.):
    • नेतृत्व: डॉ. मोहम्मद अली एवं यासीन खां (अंजुमन-ए-खादिम-उल-इस्लाम संस्था द्वारा संगठित)।
  • मत्स्य संघ का निर्माण (18 मार्च 1948):
    • राजस्थान एकीकरण का प्रथम चरण; अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली व नीमराणा ठिकाने को मिलाकर गठित (नामकरण: के.एम. मुंशी के सुझाव पर)।
    • राजप्रमुख: महाराजा उदयभान सिंह (धौलपुर)।
    • प्रधानमंत्री: शोभाराम कुमावत (अलवर)।

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