मुख्य बिंदु: दूल्हा राय (तेजकरण) ढूंढाड़ (आमेर/जयपुर) के कछवाहा राजवंश के संस्थापक और आदिपुरुष माने जाते हैं। सामान्य परिचय व वंश राजवंश: कछवाहा (कुशवाहा) राजपूत वंश (भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज)। उपनाम/मूल नाम: तेजकरण; सुंदर रूप-रंग के कारण लोक परंपरा में ‘दूल्हा राय’ कहलाए। शासनकाल: 1137 – 1170 ई. (विभिन्न ख्यातों के अनुसार नींव वर्ष […]
दूल्हा राय (तेजकरण) ढूंढाड़ (आमेर/जयपुर) के कछवाहा राजवंश के संस्थापक और आदिपुरुष माने जाते हैं।
सामान्य परिचय व वंश
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राजवंश: कछवाहा (कुशवाहा) राजपूत वंश (भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज)।
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उपनाम/मूल नाम: तेजकरण; सुंदर रूप-रंग के कारण लोक परंपरा में ‘दूल्हा राय’ कहलाए।
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शासनकाल: 1137 – 1170 ई. (विभिन्न ख्यातों के अनुसार नींव वर्ष 1137 ई.)।
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राजधानी: दौसा (प्रथम राजधानी), बाद में मांच (रामनगर/जमवारामगढ़)।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
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मूल स्थान: नरवर (ग्वालियर क्षेत्र, मध्य प्रदेश) के शासक सोढ़देव के पुत्र।
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विवाह: दौसा के बड़गूजर शासक रालणसी की पुत्री (कुमुदवती/मृणालिनी) से विवाह। इस वैवाहिक गठबंधन के माध्यम से उन्हें दौसा का आधा राज्य दायजे (दहेज) में मिला।
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उत्तराधिकारी: इनके पुत्र कोकिलदेव (जिन्होंने 1207 ई. में मीणाओं को हराकर आमेर को राजधानी बनाया)।
प्रमुख युद्ध एवं सैन्य अभियान
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दौसा विजय: बड़गूजरों की सहायता से दौसा के आसपास के क्षेत्रों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया और बड़गूजरों के प्रभाव को समाप्त कर दौसा को कछवाहा वंश की पहली राजधानी बनाया।
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मांच विजय: मांच (वर्तमान जमवारामगढ़) के स्थानीय मीणा सरदारों को पराजित कर इस क्षेत्र पर अधिकार किया।
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भांडारेज व खोह विजय: खोह के चंदा मीणाओं और भांडारेज के शासकों को हराकर ढूंढाड़ क्षेत्र में राज्य का विस्तार किया।
प्रशासनिक एवं नीतिगत उपलब्धियां
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ढूंढाड़ राज्य की स्थापना: ढूंढाड़ अंचल (ढूंढ नदी बेसिन) में कछवाहा सत्ता की मजबूत नींव रखी।
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राजनीतिक रणनीति: स्थानीय शक्तियों (मीणा और बड़गूजर) के आपसी संघर्ष का लाभ उठाकर अपने राज्य की सीमाएं सुरक्षित कीं।
कला, संगीत एवं स्थापत्य निर्माण
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जमवाय माता मंदिर (जमवारामगढ़): मांच विजय के बाद इस स्थान का नाम बदलकर ‘रामनगर’ (वर्तमान जमवारामगढ़) रखा और अपनी कुलदेवी जमवाय माता (बुढ़वाय माता) के भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। जमवाय माता आज भी कछवाहा राजवंश की कुलदेवी हैं।
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जमवारामगढ़ दुर्ग: सामरिक सुरक्षा के लिए जमवारामगढ़ में परकोटे और प्रारंभिक दुर्ग संरचना की नींव रखी।
ऐतिहासिक संदर्भ (Sources)
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कर्नल जेम्स टॉड: एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान (Annals and Antiquities of Rajasthan)।
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मुंहता नैणसी: मुंहता नैणसी री ख्यात।
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कवि अतरौ: कछवाहा वंशावली।
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राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी (डॉ. गोपीनाथ शर्मा: राजस्थान का इतिहास; डॉ. हुकमचंद जैन एवं डॉ. नारायण लाल माली: राजस्थान का स्वतंत्रता संग्राम एवं रियासती इतिहास)।