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डीग जिला: ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य

डीग, राजस्थान जिला दर्शन (District GK) पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 01 September 2026
मुख्य बिंदु: डीग जिले (ब्रज व मत्स्य अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: दीर्घपुर / दीर्घावती (स्कंद पुराण व मध्यकालीन अभिलेखों में)। उपनाम: जलमहलों की नगरी (City of Water Palaces), फव्वारों का शहर, जाट रियासत की प्रथम राजधानी, ब्रज भूमि का […]
डीग जिले (ब्रज व मत्स्य अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:

1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य

  • प्राचीन नाम: दीर्घपुर / दीर्घावती (स्कंद पुराण व मध्यकालीन अभिलेखों में)।
  • उपनाम: जलमहलों की नगरी (City of Water Palaces), फव्वारों का शहर, जाट रियासत की प्रथम राजधानी, ब्रज भूमि का प्रवेश द्वार।
  • स्थापना व गठन:
    • अगस्त 2023 में भरतपुर जिले के पुनर्गठन से डीग, कुम्हेर, कामां, नगर, सीकरी, पहाड़ी, जुरहरा और जनूथर तहसीलों को मिलाकर नए जिले का गठन किया गया।
  • भौगोलिक स्थिति व सीमाएं:
    • यह जिला राजस्थान के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित है और उत्तर प्रदेश (मथुरा) तथा हरियाणा (नूंह) के साथ अंतरराज्यीय सीमा साझा करता है।
  • नदियाँ एवं जल संरचनाएं:
    • रूपारेल नदी (वराह / लसवारी नदी): उदयनाथ की पहाड़ियों (अलवर) से निकलकर सीकरी-डीग क्षेत्र में प्रवाहित होती है।
    • सीकरी बांध (Sikri Dam): रूपारेल नदी के बाढ़ के जल को नियंत्रित करने और सिंचाई हेतु निर्मित ऐतिहासिक बांध।
    • रूपसागर एवं गोपाल सागर तालाब: डीग के जलमहलों के दोनों ओर स्थित कृत्रिम जलाशय।
  • पशुधन एवं कृषि:
    • मुर्राह नस्ल भैंस अनुसंधान व प्रजनन केंद्र: कुम्हेर (डीग) में स्थित।
    • सरसों व गेहूं का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र।

2. राजवंश एवं प्रमुख शासक

  • सिनसिनवार जाट राजवंश:
    • बदन सिंह (1722–1756 ई.):
      • सवाई जयसिंह (जयपुर) ने इन्हें ‘ब्रजराज’ की उपाधि तथा डीग की जागीर व नगाड़ा-निशान प्रदान किया।
      • इन्होंने डीग को जाट साम्राज्य की प्रथम राजधानी बनाया और डीग के प्रसिद्ध दुर्ग व सुंदर महलों की नींव रखी।
    • महाराजा सूरजमल (‘जाटों का प्लेटो’ / ‘जाटों का अफलातून’ – 1756–1763 ई.):
      • अदम्य कूटनीतिज्ञ, दूरदर्शी व अपराजेय योद्धा; इन्होंने डीग के विश्व विख्यात जलमहलों, भव्य फव्वारों और अभेद्य सुरक्षा प्रणाली का निर्माण पूर्ण कराया।
    • महाराजा जवाहर सिंह: 1765 में दिल्ली के लाल किले पर आक्रमण कर वहाँ से अष्टधातु का दरवाजा और संगमरमर का सिंहासन जीतकर डीग व भरतपुर लाए।

3. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध

  • कुम्हेर का घेरा / युद्ध (1754 ई.):
    • मुग़ल वजीर सफदरजंग और मराठा पेशवा की सेना (मल्हारराव होलकर) ने कुम्हेर दुर्ग को 4 महीने तक घेरे रखा।
    • युद्ध के दौरान तोप का गोला लगने से मल्हारराव होलकर के इकलौते पुत्र खांडेराव होलकर की मृत्यु कुम्हेर में हुई (इनकी छतरी गांगरोली/कुम्हेर क्षेत्र में बनी है)। महाराजा सूरजमल की महारानी किशोरी देवी की कूटनीति से मराठों को संधि करनी पड़ी।
  • डीग का युद्ध (13 नवंबर 1804 ई.):
    • यशवंतराव होलकर (मराठा) का पीछा करते हुए आई ब्रिटिश सेना (जनरल फ्रेजर) और भरतपुर-मराठा संयुक्त सेना के बीच भीषण युद्ध; अंग्रेजों के जनरल फ्रेजर घायल होकर मारे गए।

4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य

स्मारक / स्थल निर्माता प्रमुख विशेषता
डीग का किला (Deeg Fort) बदन सिंह / सूरजमल (1730 ई.) मिट्टी व पत्थरों से निर्मित परकोटेदार दुर्ग; खाई से घिरा हुआ। दुर्ग की ‘लखा बुर्ज’ पर सुप्रसिद्ध ‘लाखा तोप’ स्थापित है।
डीग के जलमहल (Water Palaces) महाराजा सूरजमल (1755–1760 ई.) मुग़ल व राजपूत शैली (चारबाग पद्धति) में निर्मित भारत के सबसे भव्य जलमहल; इनके दोनों ओर ‘रूपसागर’ व ‘गोपाल सागर’ जलाशय हैं।
गोपाल भवन महाराजा सूरजमल जलमहल परिसर का सबसे बड़ा व सुंदर महल; सामने संगमरमर का मुग़लकालीन झूला/हिंडोला स्थापित है।
सावन-भादों भवन महाराजा सूरजमल जलमहलों के उत्तरी व दक्षिणी छोर पर स्थित दो सुंदर मंडप, जो वर्षा ऋतु के सजीव आभास हेतु निर्मित हैं।
डीग के रंगीन फव्वारे (Fountains) महाराजा सूरजमल बिना किसी मोटर या आधुनिक पंप के, केवल गुरुत्वाकर्षण और जलदाब पर आधारित 500 से अधिक फव्वारों की अनूठी हाइड्रोलिक प्रणाली (होली पर रंगीन महकते फव्वारे चलाए जाते हैं)।
चौरासी खंभा मंदिर (कामां) प्रतिहार/गुप्ता काल (8वीं-11वीं सदी) 84 कलात्मक नक्काशीदार लाल बलुआ पत्थर के खंभों पर टिका ऐतिहासिक मंदिर; काम्यवन का मुख्य दर्शनीय स्थल।
कुम्हेर दुर्ग (कुंभलगढ़-कुम्हेर) राजा बदन सिंह / सूरजमल सामरिक दृष्टि से निर्मित अभेद्य दुर्ग।

5. मंदिर, तीर्थ, संत एवं ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा

  • कामां (प्राचीन नाम: काम्यवन):
    • भगवान श्रीकृष्ण की ब्रजलीलाओं के 12 प्रमुख वनों में से एक प्रमुख वन।
    • ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा (Brij 84 Kos Yatra): इस परिक्रमा का एक बड़ा हिस्सा डीग जिले के कामां, जुरहरा और पहाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरता है।
    • भोजन थाली मेला (कामां): भाद्रपद शुक्ल पंचमी को भरने वाला प्रसिद्ध मेला (मान्यता है कि यहाँ श्रीकृष्ण ने ग्वाल-बालों के साथ भोजन किया था)।
  • गोकुलचंद्र जी मंदिर (कामां):
    • वल्लभ संप्रदाय (पुष्टिमार्ग) की प्रथम पीठ के अंतर्गत विख्यात मदनमोहन जी व गोकुलचंद्र जी के प्राचीन विग्रह।
  • राधा-कृष्ण के कुंड (कामां क्षेत्र): विमल कुंड, धर्म कुंड, कामेश्वर महादेव मंदिर, चरण पहाड़ी।
  • गंगा मंदिर व लक्ष्मण मंदिर (डीग शहर): स्थानीय आस्था के प्रमुख केंद्र।

6. कला, संस्कृति, लोकनाट्य एवं हस्तशिल्प

  • नौटंकी लोकनाट्य (Nautanki – हाथरसी/डीग शैली):
    • राजस्थान में नौटंकी का प्रमुख गढ़ डीग-भरतपुर अंचल है।
    • प्रवर्तक: भूरीलाल जी (डीग); अन्य प्रसिद्ध कलाकार: नत्थाराम शर्मा, गिरिराज प्रसाद।
    • वाद्ययंत्र: नगाड़ा, शहनाई, सारंगी, ढोलक व डफ।
  • चरकुला एवं बमरसिया नृत्य:
    • बमरसिया (Bam Nritya): फाल्गुन माह में नई फसल आने की खुशी में विशाल नगाड़े (बम) की थाप पर पुरुषों द्वारा किया जाने वाला ओजपूर्ण नृत्य।
    • चरकुला नृत्य: ब्रज क्षेत्र की महिलाओं द्वारा सिर पर 108 दीपकों का पहिया (चरकुला) रखकर किया जाने वाला नृत्य।
  • डीग का मेला (Deeg Mela): प्रतिवर्ष भाद्रपद माह में जलमहलों के फव्वारे चलने के अवसर पर आयोजित 3 दिवसीय प्रसिद्ध सांस्कृतिक मेला।
  • ब्रज भाषा: संपूर्ण जिले की मुख्य बोलचाल व साहित्यिक भाषा ब्रज भाषा है।

7. स्वतंत्रता संग्राम, प्रजामंडल एवं जन आंदोलन

  • भरतपुर प्रजामंडल का केंद्र: डीग और कुम्हेर प्रजामंडल के अधिवेशनों और राजनीतिक जनजागृति के प्रमुख केंद्र रहे।
  • मास्टर आदित्येंद्र व जुगलकिशोर चतुर्वेदी (‘नेहरू ऑफ राजस्थान’): इन्होंने डीग व कामां क्षेत्र में किसान सभाओं और बेगार विरोधी आंदोलनों का नेतृत्व किया।
  • मत्स्य संघ में विलय (18 मार्च 1948): राजस्थान एकीकरण के प्रथम चरण में भरतपुर रियासत के साथ डीग क्षेत्र ‘मत्स्य संघ’ का अंग बना।

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