मुख्य बिंदु: कोटपूतली-बहरोड़ जिले (राठ व मत्स्य अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: राजस्थान का औद्योगिक प्रवेश द्वार, राठ क्षेत्र (बहरोड़-नीमराना), मत्स्य जनपद की राजधानी (विराटनगर), सीमेंट हब। स्थापना व गठन: अगस्त 2023 में जयपुर और अलवर जिलों के पुनर्गठन से कोटपूतली, […]
कोटपूतली-बहरोड़ जिले (राठ व मत्स्य अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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उपनाम: राजस्थान का औद्योगिक प्रवेश द्वार, राठ क्षेत्र (बहरोड़-नीमराना), मत्स्य जनपद की राजधानी (विराटनगर), सीमेंट हब।
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स्थापना व गठन:
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अगस्त 2023 में जयपुर और अलवर जिलों के पुनर्गठन से कोटपूतली, बहरोड़, नीमराना, बानसूर, विराटनगर, पावटा, मांढण और नारायणपुर तहसीलों को मिलाकर नए जिले के रूप में गठित किया गया।
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नामकरण: ‘कोट’ (किले) और ‘पूतली’ (पास के कस्बे) को मिलाकर कोटपूतली नामकरण हुआ।
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भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
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साबी (साहिबी) नदी: सेवर की पहाड़ियों से निकलकर बहरोड़-कोटपूतली क्षेत्र से होते हुए हरियाणा (पटौदी/नजफगढ़ झील) की ओर प्रवाहित होने वाली प्रमुख आंतरिक नदी।
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सोता नदी: साबी की प्रमुख सहायक नदी (पावटा-बहरोड़ क्षेत्र)।
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बाणगंगा नदी: उद्गम स्थल बैराठ (विराटनगर) की पहाड़ियाँ (इसे ‘अर्जुन की गंगा’ व ‘ताला नदी’ भी कहा जाता है)।
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प्रमुख जलाशय/बांध: बुचारा बांध (सोता नदी पर), बावरिया बांध।
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पहाड़ियाँ: बीजक की पहाड़ी, भीम जी की डूंगरी, गणेश डूंगरी, महादेव डूंगरी (विराटनगर क्षेत्र)।
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खनिज एवं उद्योग:
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सीमेंट उद्योग: अल्ट्राटेक सीमेंट (कोटपूतली) — एशिया के बड़े सीमेंट उत्पादन संयंत्रों में शामिल।
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नीमराना जापानी जोन (Japanese Industrial Zone – JETRO): राजस्थान का प्रमुख ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और वैश्विक निवेश केंद्र (DMIC व रीको द्वारा विकसित)।
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2. राजवंश एवं प्रमुख इतिहास
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मत्स्य जनपद (महाभारत काल): 16 महाजनपदों में शामिल मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर (बैराठ) थी (शासक: राजा विराट)।
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राठ क्षेत्र के चौहान: 1192 के तराइन युद्ध के बाद पृथ्वीराज चौहान के वंशज राजा राजदेव द्वारा नीमराना को राजधानी बनाकर राठ शाखा की स्थापना की गई।
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खेतड़ी व तंवर प्रभाव: कोटपूतली क्षेत्र पूर्व में खेतड़ी ठिकाने और तंवर/शेखावत राजपूतों के नियंत्रण में रहा।
3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल
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बैराठ (विराटनगर) सभ्यता:
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बाणगंगा नदी घाटी में स्थित प्रागैतिहासिक, मौर्यकालीन व बौद्ध संस्कृति का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल।
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उत्खनन: दयाराम साहनी (1936 ई.), नीलरत्न बनर्जी व कैलाशनाथ दीक्षित (1962-63)।
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प्रमुख पुरातात्विक साक्ष्य:
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भाब्रू शिलालेख (Bhabru Edict): 1840 में कैप्टन बर्ट द्वारा बीजक की पहाड़ी से खोजा गया; इसमें सम्राट अशोक का बुद्ध, धम्म और संघ में त्रिरत्न विश्वास प्रकट होता है (वर्तमान में ‘एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल’, कोलकाता में सुरक्षित)।
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गोल बौद्ध मंदिर (Circular Buddhist Temple): भारत का सबसे प्राचीन ईंटों से निर्मित गोलाकार बौद्ध स्तूप व चैत्य (ह्वेनसांग ने यहाँ 8 बौद्ध मठों का उल्लेख किया था)।
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स्वर्ण मंजूषा: राजा रामसिंह (जयपुर) के काल में खुदाई के दौरान मिली सोने की डिबिया जिसमें भगवान बुद्ध की अस्थियों के अवशेष माने गए।
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मुद्राएं: 36 चांदी की मुद्राएं (8 पंचमार्क + 28 इंडो-ग्रीक सिक्के, जिनमें 16 सिक्के राजा मिनांडर के हैं)।
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जोधपुरा सभ्यता (साबी नदी तट):
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साबी नदी बेसिन में स्थित ताम्र-युगीन व लोह-युगीन सभ्यता।
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यहाँ से 2500 ई.पू. से 200 ई. तक के पांच सांस्कृतिक स्तर, लोहा गलाने की प्राचीन भट्ठियां, लोहे के तीर व ‘गेरुए रंग के मृद्भाण्ड’ (OCP) प्राप्त हुए।
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4. प्रमुख दुर्ग, बावड़ियाँ एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता / काल | प्रमुख विशेषता |
| नीमराना दुर्ग (पंचमहल) | राजा राजदेव (1464 ई.) | अरावली की पहाड़ी पर 10 मंजिलों में निर्मित भव्य राजपूत स्थापत्य; वर्तमान में भारत का अत्यंत लोकप्रिय ‘हेरिटेज फोर्ट पैलेस’। |
| नीमराना की 9 मंजिला बावड़ी | ठाकुर जनक सिंह / अकबर कालीन (18वीं सदी) | 9 मंजिला गहरी कलात्मक सीढ़ीदार बावड़ी; प्रत्येक मंजिल की ऊँचाई लगभग 20 फीट। |
| बानसूर दुर्ग | सामरिक पहाड़ी दुर्ग | बहुकोणीय संरचना वाला किला; जयपुर व अलवर रियासतों की सीमा का प्रहरी रहा। |
| तसींग दुर्ग (बहरोड़) | बड़गूजर / चौहान शासक | अरावली की तलहटी में स्थित मध्यकालीन सामरिक दुर्ग। |
| मुग़ल दरवाजा (विराटनगर) | मिर्जा राजा मानसिंह प्रथम | अकबर के विश्राम हेतु निर्मित 3 मंजिला छतरीनुमा भवन; इसमें 16वीं सदी के सुंदर भित्तिचित्र हैं। |
5. ऐतिहासिक किसान आंदोलन एवं ‘नीमूचाणा हत्याकांड’
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नीमूचाणा हत्याकांड (14 मई 1925 – बानसूर तहसील):
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कारण: अलवर महाराजा जयसिंह द्वारा जंगली सुअरों के आतंक और 1923-24 में भू-राजस्व (लगान) दरों में भारी वृद्धि के विरोध में राजपूत व अन्य किसानों का आंदोलन।
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घटना: 14 मई 1925 को नीमूचाणा गाँव में शांतिपूर्ण किसान सभा पर कमांडर छाजू सिंह (‘राजस्थान का जनरल डायर’) के नेतृत्व में राज्य की पुलिस ने मशीनगनों से अंधाधुंध गोलियां चलाईं और पूरे गाँव को आग लगा दी।
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बलिदान: सैकड़ों किसान शहीद हुए और सैंकड़ों घर जलकर राख हो गए।
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महात्मा गांधी की प्रतिक्रिया: गांधी जी ने ‘यंग इंडिया’ में इस कांड को जलियांवाला बाग से भी अधिक वीभत्स बताते हुए ‘दोहरी डायरशाही’ (Dyerism Double Distilled) की संज्ञा दी।
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‘रियासत’ समाचार पत्र ने इसकी तुलना सीधे जलियांवाला बाग हत्याकांड से की थी।
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6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं पौराणिक संदर्भ
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महाभारत कालीन अज्ञातवास (विराटनगर):
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पांडवों ने 12 वर्ष के वनवास के बाद अपना 1 वर्ष का अज्ञातवास राजा विराट के दरबार में बिताया था (अर्जुन ‘बृहन्नला’, युधिष्ठिर ‘कंक’, भीम ‘वल्लभ’ बने थे)।
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भीमलत कुंड: द्रौपदी की प्यास बुझाने हेतु भीम द्वारा चट्टान पर गदा/पैर मारकर निकाला गया मीठे पानी का कुंड।
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बाणगंगा तीर्थ (विराटनगर): मान्यता है कि अर्जुन ने बाण मारकर गंगा की धारा (बाणगंगा) प्रकट की थी; प्रतिवर्ष वैशाख पूर्णिमा को बाणगंगा मेला भरता है।
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मनसा माता मंदिर (दहमी, बहरोड़): 600 वर्ष से अधिक प्राचीन शक्तिपीठ (मराठा सरदारों द्वारा स्थापित ऐतिहासिक घंटा)।
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भैरव बाबा मंदिर (पावटा): स्थानीय आस्था का प्रमुख केंद्र।
7. कला, संस्कृति, भाषा एवं लोक जीवन
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राठी (अहीरवाटी) बोली:
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बहरोड़, नीमराना और मांढण क्षेत्र की प्रमुख बोली।
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यह ढूंढाड़ी, मारवाड़ी और हरियाणवी (बांगर) का सुंदर मिश्रण है (संत चरणदास और जोधराज के ग्रंथों में अहीरवाटी का प्रभाव)।
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जोगी व नाथ संप्रदाय: सारंगी के साथ ‘भरथरी’ और ‘गोपीचंद’ की लोकगाथाओं का वादन करने वाले लोक गायक।
8. स्वतंत्रता संग्राम एवं प्रमुख व्यक्तित्व
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स्वतंत्रता आंदोलन में बानसूर व कोटपूतली का योगदान: अलवर प्रजामंडल (हरिनारायण शर्मा, कुंजबिहारी लाल मोदी) और जयपुर प्रजामंडल के संयुक्त आंदोलनों की सक्रिय कर्मस्थली।
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मास्टर भोलानाथ: राठ क्षेत्र में राष्ट्रीय चेतना और शिक्षा के प्रमुख प्रसारक।
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पहलवान व सैनिक परंपरा: बहरोड़-नीमराना अंचल भारतीय सेना में अहीर व राजपूत सैनिकों की बहुलता हेतु प्रसिद्ध।