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करौली जिला: ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य

करौली, राजस्थान जिला दर्शन (District GK) पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 01 September 2026
मुख्य बिंदु: करौली जिले (डांग व ब्रज अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: गोपाल पाल (कल्याणपुरी)। उपनाम: डांग की रानी (Queen of Dang), कैला मैया की नगरी, मदनमोहन जी का शहर, लाल बलुआ पत्थरों की पावन भूमि। स्थापना व गठन: 1348 […]
करौली जिले (डांग व ब्रज अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:

1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य

  • प्राचीन नाम: गोपाल पाल (कल्याणपुरी)।
  • उपनाम: डांग की रानी (Queen of Dang), कैला मैया की नगरी, मदनमोहन जी का शहर, लाल बलुआ पत्थरों की पावन भूमि।
  • स्थापना व गठन:
    • 1348 ई. में यदुवंशी राजा अर्जुनपाल यादव द्वारा भद्रावती नदी के तट पर ‘कल्याणपुरी’ (करौली) की स्थापना की गई।
    • 19 जुलाई 1997 को सवाई माधोपुर से पृथक कर राजस्थान का 32वाँ स्वतंत्र जिला बनाया गया।
  • भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
    • प्रमुख नदियाँ: चंबल (सीमावर्ती), बनास, भद्रावती, गंभीर (गंभीरी), अटा, माची, बरखेड़ा, भैंसावट।
    • पांचना बांध (गुड़ला गाँव):
      • 5 नदियों (अटा, माची, भद्रावती, बरखेड़ा, भैंसावट) के संगम पर मिट्टी से बना राजस्थान का सबसे बड़ा बांध (Earth Dam); अमेरिका के आर्थिक सहयोग से निर्मित।
    • डांग क्षेत्र (Dang Area): चंबल नदी बेसिन के गहरे खड्डों, बीहड़ों और वनाच्छादित ऊबड़-खाबड़ पठारों का क्षेत्र (डांग का राजा: धौलपुर, डांग की रानी: करौली)।
    • खनिज: लाल व गुलाबी बलुआ पत्थर, सिलिका सैंड, सोपस्टोन।

2. राजवंश एवं प्रमुख शासक

  • राजवंश: यदुवंशी / जादौन (यादव) राजवंश (स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का वंशज मानते हैं)।
  • कुलदेवी: कैला देवी (महिषासुरमर्दिनी/अंजना माता स्वरूप)।
  • आराध्य देव: मदनमोहन जी (श्रीकृष्ण)।
  • प्रमुख शासक व उपलब्धियाँ:
    • विजयपाल (1040 ई.): बयाना (भरतपुर) में यदुवंश की नींव रखी और तिमनगढ़ दुर्ग बनवाया।
    • अर्जुनपाल (1348 ई.): कल्याणपुरी (करौली) नगर बसाया।
    • गोपाल सिंह (1724–1757 ई.): करौली के राजमहलों (सिटी पैलेस) का निर्माण कराया; मदनमोहन जी की मूर्ति वृंदावन से लाकर स्थापित की।
    • महाराजा हरबख्शपाल: 15 नवंबर 1817 को अंग्रेजों (ईस्ट इंडिया कंपनी) के साथ ‘अधीनस्थ पार्थक्य की संधि’ (Subordinate Alliance) करने वाली राजस्थान की प्रथम रियासत करौली थी।
    • महाराजा मदनपाल: 1857 की क्रांति के समय कोटा के घेरे में फंसे महाराव रामसिंह द्वितीय को मुक्त कराने हेतु 2000 सैनिक भेजे; अंग्रेजों ने प्रसन्न होकर इनकी तोपों की सलामी 15 से बढ़ाकर 17 कर दी और ‘GCSI’ (ग्रैंड कमांडर ऑफ द स्टार ऑफ इंडिया) की उपाधि दी।
    • महाराजा गणेशपाल: राजस्थान एकीकरण (18 मार्च 1948 – मत्स्य संघ) के समय करौली के अंतिम शासक।

3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल

  • तिमनगढ़ (Timangarh / तहनगढ़):
    • राजा तिमनपाल द्वारा 11वीं सदी में निर्मित विशाल दुर्ग; मूर्तिकला और अष्टधातु की मूर्तियों के अवैध व्यापार को लेकर चर्चित रहा।
    • यहाँ ‘नथनी की छतरी’, ‘जगन सागर तालाब’ और प्राचीन मंदिर स्थित हैं।
  • ऊंटगिरि व मंडरायल: मध्यकालीन सामरिक दुर्ग; ‘मंडरायल दुर्ग’ को ‘ग्वालियर दुर्ग की कुंजी’ कहा जाता था।

4. प्रमुख दुर्ग, महल एवं स्थापत्य

स्मारक / स्थल निर्माता प्रमुख विशेषता
करौली सिटी पैलेस (भद्रावती पैलेस) अर्जुनपाल (1348 ई.) व गोपाल सिंह भद्रावती नदी के किनारे लाल बलुआ पत्थर से निर्मित विशाल परकोटेदार राजमहल; जालीदार झरोखों, शीश महल और भित्तिचित्रों हेतु प्रसिद्ध।
तिमनगढ़ दुर्ग (तहनगढ़) राजा तिमनपाल (1058 ई.) मसानिया पहाड़ी पर स्थित विशाल गिरि दुर्ग; इसमें नथनी की छतरी, ननद-भौजाई का कुआं और प्राचीन मंदिर स्थित हैं।
मंडरायल दुर्ग यदुवंशी शासक चंबल नदी के किनारे स्थित सामरिक दुर्ग; इसे ‘ग्वालियर की कुंजी’ कहा जाता था। यहाँ ‘मरदान शाह की दरगाह’ स्थित है।
ऊंटगिरि दुर्ग (कल्याणपुरा) यदुवंशी शासक घने बीहड़ों में स्थित प्राकृतिक जल व गिरि दुर्ग।
राव गोपाल सिंह की छतरी करौली राजपरिवार करौली शहर में स्थित कलात्मक लाल पत्थर की विशाल छतरी।

5. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ

  • कैला देवी धाम (त्रिकूट पर्वत):
    • कालीसिल नदी के तट पर त्रिकूट पर्वत की घाटी में स्थित उत्तर भारत का विख्यात शक्तिपीठ।
    • मान्यता: भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय कंस के हाथ से छूटी कन्या (योगमाया) तथा हनुमान जी की माता ‘अंजना’ का अवतार।
    • मेला: प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल अष्टमी को विशाल लक्खी मेला भरता है।
    • लांगुरिया व जोगणिया गीत: कैला देवी के भक्तों द्वारा गाए जाने वाले अत्यंत लोकप्रिय भक्ति गीत।
    • बोहरा भगत की छतरी: मंदिर प्रांगण के सामने स्थित; यहाँ झाड़-फूंक द्वारा बच्चों के रोगों और ऊपरी हवाओं का निवारण होता है।
  • मदनमोहन जी मंदिर (करौली):
    • गौड़ीय/वल्लभ संप्रदाय का प्रतिष्ठित मंदिर; मूर्ति वृंदावन से लाई गई थी।
    • (मान्यता: जयपुर के गोविंद देव जी का मुख, करौली के मदनमोहन जी का वक्ष/सीना और नाथद्वारा के श्रीनाथजी के चरण एक ही दिव्य विग्रह के स्वरूप हैं)।
  • महावीर जी तीर्थ (श्री महावीर जी):
    • गंभीर नदी के तट पर स्थित जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का अतिशय क्षेत्र।
    • किंवदंती: ‘कृपा चमार’ की गाय द्वारा एक टीले पर स्वतः दूध देने से यह मूर्ति प्रकट हुई थी।
    • मेला: चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से वैशाख कृष्ण द्वितीया तक; रथयात्रा में रथ का पहला सारथी स्थानीय चमार/मीणा परिवार का व्यक्ति बनता है (सामाजिक समरसता का प्रतीक)।
    • लठमार होली: महावीर जी की लठमार होली पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है।
  • अंजनि माता मंदिर: त्रिकूट पर्वत पर स्थित; हनुमान जी को स्तनपान कराती हुई अंजना माता की भारत में दुर्लभ प्रतिमा।
  • गुफा मंदिर (कबीर आश्रम): बीहड़ों में संतों की प्राचीन तपोभूमियाँ।

6. कला, संस्कृति, हस्तशिल्प एवं वन्यजीव

  • कन्हैया दंगल (Kanhaiya Dangal):
    • करौली, सवाई माधोपुर व भरतपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय काव्यमय लोक गायन शैली; इसमें पौराणिक आख्यानों को ‘मेड़’ (गायक मंडली) द्वारा गाया जाता है।
  • लाख की चूड़ियां व खिलौने: करौली के ‘मणियार’ समुदाय द्वारा लाख की कलात्मक चूड़ियां और खिलौने बनाने की प्राचीन हस्तकला।
  • लकड़ी के खिलौने: करौली का खराद व काष्ठ उद्योग।
  • कैला देवी वन्यजीव अभयारण्य:
    • 1983 में अधिसूचित; रणथंभौर टाइगर रिजर्व का बफर जोन (धौंक वनों की प्रचुरता, चिंकारा, भालू व बघेरे का प्राकृतिक वास)।

7. स्वतंत्रता संग्राम, प्रजामंडल एवं एकीकरण

  • करौली प्रजामंडल (1939 ई.):
    • संस्थापक: त्रिलोकचंद माथुर, चिरंजीलाल शर्मा और कुंवर मदन सिंह।
  • कुंवर मदन सिंह: 1927 में किसान आंदोलन का नेतृत्व किया और बेगार प्रथा व जंगली सुअरों के आतंक के विरुद्ध आवाज उठाई।
  • मत्स्य संघ में विलय (18 मार्च 1948):
    • राजस्थान एकीकरण के प्रथम चरण में करौली का विलय ‘मत्स्य संघ’ में हुआ।
    • उप-राजप्रमुख: करौली के महाराजा गणेशपाल देव बनाए गए।

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