मुख्य बिंदु: पाली जिले (गोडवाड़ अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: पल्लिका / पालिका (पालीवाल ब्राह्मणों की कर्मभूमि होने के कारण)। उपनाम: गोडवाड़ का हृदय स्थल, मेहंदी की नगरी (सोजत), राजस्थान का टेक्सटाइल हब। भौगोलिक स्थिति व सीमाएँ: राजस्थान के पुनर्गठन […]
पाली जिले (गोडवाड़ अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
-
प्राचीन नाम: पल्लिका / पालिका (पालीवाल ब्राह्मणों की कर्मभूमि होने के कारण)।
-
उपनाम: गोडवाड़ का हृदय स्थल, मेहंदी की नगरी (सोजत), राजस्थान का टेक्सटाइल हब।
-
भौगोलिक स्थिति व सीमाएँ:
-
राजस्थान के पुनर्गठन से पूर्व पाली सर्वाधिक 8 जिलों की सीमाओं को छूने वाला एकमात्र आंतरिक जिला था।
-
-
नदियाँ एवं जल परियोजनाएं:
-
प्रमुख नदियाँ: जवाई (लूनी की प्रमुख सहायक नदी), बांडी (रासायनिक प्रदूषण के कारण ‘केमिकल नदी’), सूकड़ी, मीठड़ी, गुहिया, लीलड़ी।
-
जवाई बांध (सुमेरपुर, पाली):
-
1946 ई. में जोधपुर के महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा शुरू (इंजीनियर: एडगर व फर्गुसन)।
-
इसे ‘मारवाड़ का अमृत सरोवर’ कहा जाता है (पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा जल जलाशय)।
-
जवाई बांध में जलापूर्ति बढ़ाने हेतु उदयपुर से ‘सेई जल सुरंग’ (राजस्थान की पहली जल सुरंग) जोड़ी गई है।
-
जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व: पैंथरों (Leopards) और ग्रेनाइट चट्टानों के सह-अस्तित्व हेतु विश्व विख्यात।
-
-
सरदार समंद झील: महाराजा उम्मेद सिंह द्वारा अकाल राहत हेतु निर्मित सुंदर झील।
-
2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
-
पालीवाल ब्राह्मण: मध्यकाल में पाली समृद्ध व्यापारिक नगर था, जहाँ पालीवाल ब्राह्मणों ने वैज्ञानिक जल संरक्षण विधि ‘खड़ीन’ विकसित की थी।
-
राठौड़ वंश की स्थापना (13वीं सदी):
-
राव सीहा: कन्नौज से आकर पालीवाल ब्राह्मणों की रक्षा हेतु पाली (खेड़/बिठू) में राठौड़ वंश की नींव रखी। बिठू गाँव में राव सीहा का स्मारक व शिलालेख (1273 ई.) स्थित है।
-
-
नाडोल के चौहान (960 ई.):
-
लक्ष्मण चौहान (लाखा): शाकंभरी के शासक वाकपतिराज के पुत्र; नाडोल (पाली) में चौहान वंश की स्वतंत्र शाखा स्थापित की।
-
-
मारवाड़ का ठिकाना – आउवा (चंपावत राठौड़):
-
ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत: 1857 की क्रांति में अंग्रेजों व जोधपुर की सेना को लगातार दो युद्धों में पराजित करने वाले अमर नायक।
-
3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं ऐतिहासिक स्थल
-
नाडोल (Nadol): नाडोल चौहानों की राजधानी; आशापुरा माता का मूल मंदिर और 10वीं-12वीं सदी के प्राचीन जैन-हिंदू मंदिर।
-
घाणेराव (Ghanerao): गोडवाड़ क्षेत्र का प्रमुख ऐतिहासिक ठिकाना; अपने जैन मंदिरों और कलात्मक छतरियों हेतु प्रसिद्ध।
4. प्रमुख दुर्ग, मंदिर एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| रणकपुर जैन मंदिर (चौमुखा मंदिर) | सेठ धरनक शाह (महाराणा कुंभा काल, 1439 ई.) | मघई नदी के तट पर स्थित; प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) को समर्पित। वास्तुकार: देपाक (देपा)। इसमें कुल 1444 नक्काशीदार खंभे हैं (कोई भी दो खंभे एक जैसे नहीं हैं); इसे ‘स्तंभों का वन’ (Forest of Pillars) और ‘त्रिलोक दीपक’ कहा जाता है। |
| सोजत दुर्ग | निंबा (राव जोधा के पुत्र, 1460 ई.) | नानी सिरडी पहाड़ी पर स्थित; इसके नीचे सोजत की विश्व प्रसिद्ध मेहंदी उगाई जाती है। |
| सुगाली माता मंदिर (आउवा) | आउवा के ठाकुरों की कुलदेवी | 10 सिर और 54 भुजाओं वाली देवी; 1857 के क्रांतिकारियों की प्रेरणास्रोत (वर्तमान में पाली संग्रहालय में मूर्ति सुरक्षित)। |
| परशुराम महादेव मंदिर (सादड़ी) | प्राकृतिक गुफा | अरावली की दुर्गम गुफा में स्थित; इसे ‘राजस्थान का अमरनाथ’ कहा जाता है (मान्यता है कि परशुराम जी ने यहाँ तपस्या की थी)। |
| मूछाला महावीर मंदिर (घाणेराव) | प्राचीन जैन तीर्थ | मूंछों वाले भगवान महावीर स्वामी की दुर्लभ व चमत्कारी प्रतिमा। |
| ओम बन्ना धाम (बुलेट बाबा – चोटिला): | लोक आस्था केंद्र | एनएच-62 पर स्थित; स्वर्गीय ओम सिंह राठौड़ की 350cc रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक की पूजा होती है (सड़क दुर्घटनाओं से रक्षा हेतु)। |
| जाडन आश्रम (ओम आकार का मंदिर): | स्वामी महेश्वरानंद जी | विश्व का पहला ‘ॐ’ (OM) की भौगोलिक आकृति में निर्मित भव्य शिव मंदिर परिसर। |
5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध एवं 1857 की क्रांति
-
गिरी-सुमेल का युद्ध (1544 ई., जैतारण / तत्कालीन पाली):
-
मारवाड़ के राव मालदेव (सेनापति: जैता व कूंपा) और शेरशाह सूरी के बीच।
-
जैता और कूंपा के अद्भुत शौर्य से घबराकर शेरशाह ने कहा था: “एक मुट्ठी बाजरे के लिए मैं पूरे हिंदुस्तान की सल्तनत खो बैठता।”
-
-
1857 की क्रांति और आउवा का संघर्ष (ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत का नेतृत्व):
-
बिथोड़ा का युद्ध (8 सितंबर 1857): कुशाल सिंह की सेना ने जोधपुर के कैप्टन हीथकोट और तख्तसिंह के सेनापति ओंकार सिंह को पराजित किया (ओंकार सिंह मारा गया)।
-
चेलावास का युद्ध (18 सितंबर 1857): इसे ‘काले और गोरों का युद्ध’ कहा जाता है। एजीजी जॉर्ज लॉरेंस और जोधपुर के पॉलिटिकल एजेंट मॉक मेसन की सेना पराजित हुई; क्रांतिकारियों ने मॉक मेसन का सिर काटकर आउवा के किले के दरवाजे पर लटका दिया।
-
आउवा का पतन (जनवरी 1858): कर्नल होम्स के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने आउवा पर अधिकार कर सुगाली माता की मूर्ति को अजमेर ले गए।
-
6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं संप्रदाय
-
भक्त शिरोमणि मीराबाई (कुड़की गाँव):
-
मीराबाई का जन्म 1498 ई. में कुड़की गाँव (जैतारण, पाली) में रतनसिंह राठौड़ के घर हुआ था।
-
-
संत दरियाव जी (रेण शाखा के प्रवर्तक): इनका जन्म जैतारण (पाली) में हुआ था।
-
आशापुरा माता (नाडोल): चौहानों की कुलदेवी; बिस्सा ब्राह्मणों की आराध्य देवी।
-
सोमनाथ मंदिर (पाली): गुजरात के राजा कुमारपाल सोलंकी द्वारा 12वीं सदी में निर्मित प्राचीन ऐतिहासिक देवालय।
7. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प
-
सोजत की मेहंदी (Sojat Henna):
-
सोजत की लाल-सुर्ख प्राकृतिक मेहंदी पूरे विश्व में विख्यात है; इसे भारत सरकार द्वारा जीआई (GI) टैग प्राप्त है।
-
-
तेरहताली नृत्य का उद्गम (पादरला गाँव, पाली):
-
लोकदेवता रामदेव जी की आराधना में कांबड़िया पंथ की महिलाओं द्वारा बैठकर किया जाने वाला प्रसिद्ध नृत्य।
-
शरीर पर 13 मंजीरे बांधकर मुंह में तलवार व सिर पर लोटा रखकर कलाबाजी की जाती है (प्रसिद्ध नृत्यांगना: मांगी बाई एवं मोहिनी देवी)।
-
-
पाली की सूती वस्त्र छपाई (टेक्सटाइल उद्योग):
-
रँगाई-छपाई और पॉपलिन (Poplin) कपड़े के उत्पादन में राजस्थान का अग्रणी केंद्र।
-
8. प्रमुख विभूतियाँ एवं संस्थान
-
मेजर शैतान सिंह भाटी (बाणासुर के शहीद):
-
1962 के भारत-चीन युद्ध में रेजांग ला (लद्दाख) की बर्फीली चौकी पर 120 जवानों के साथ अदम्य शौर्य दिखाते हुए वीरगति प्राप्त की; परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित।
-
-
देपाक (Depa): रणकपुर जैन मंदिर के विश्व प्रसिद्ध वास्तुकार।
-
पालीवाल ब्राह्मण: प्राचीन जल संचयन तकनीक ‘खड़ीन’ के जनक और राजस्थान के अग्रणी व्यापारिक समुदाय।
9. स्वतंत्रता संग्राम एवं किसान आंदोलन
-
पाली में प्रजामंडल आंदोलन:
-
मारवाड़ लोक परिषद के बैनर तले आउवा, सोजत और पाली में सामंती अत्याचारों व लाग-बाग के विरुद्ध व्यापक जनआंदोलन।
-
-
विजय सिंह पथिक व जयनारायण व्यास की गतिविधियाँ:
-
पाली मारवाड़ रियासत की जनजागृति का प्रमुख संपर्क केंद्र रहा।
-